नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता जागरूकता अभियान को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि ऐसे अभियान चलाने का अधिकार केवल चुनाव आयोग तक सीमित नहीं है. अन्य संगठन भी मतदाताओं को जागरूक करने के लिए अभियान चला सकते हैं. अदालत ने यह टिप्पणी सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय के सिविल सोसाइटी समूह को चुनाव जागरूकता कार्यक्रम चलाने की अनुमति देने से इनकार किए जाने के मामले में की.
दरअसल, राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने सिविल सोसाइटी समूह को मतदाता जागरूकता अभियान चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद समूह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग को समूह को जागरूकता कार्यक्रम चलाने की अनुमति देने का निर्देश दिया. राजस्थान में 14 नवंबर को पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव होने हैं. अरुणा रॉय पूर्व आईएएस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता हैं.
निर्वाचन आयोग ने कानून-व्यवस्था का दिया तर्क
राज्य निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सिविल सोसाइटी समूह को अभियान चलाने की अनुमति नहीं दी गई थी. वहीं, अरुणा रॉय की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मतदाता जागरूकता कार्यक्रम राजनीतिक अभियान नहीं है. ऐसे में इस पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं है.
एसआईआर को लेकर भाजपा और विपक्ष आमने-सामने
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव जारी है. एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली के जरिए विपक्ष ने साफ किया था कि वह इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है.
वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को कांग्रेस सहित विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे एसआईआर के बहाने देश के 140 करोड़ लोगों के जनादेश का अपमान कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जनता इसे कभी माफ नहीं करेगी.
नवीन ने राहुल गांधी पर विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने और देश को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसा नहीं होने देगी. लोकतंत्र और संविधान की रक्षा सर्वोपरि है. इसी उद्देश्य से पार्टी जनता के बीच जाकर विपक्ष के कथित झूठ को उजागर कर रही है और अपना पक्ष रख रही है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

