दिवाली पर घर की सजावट में न करें ये गलतियां, मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए अपनाएं वास्तु के 7 खास उपाय

दिवाली पर घर की सजावट में न करें ये गलतियां, मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए अपनाएं वास्तु के 7 खास उपाय

प्रेषित समय :22:41:20 PM / Tue, Nov 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

दीपों का पर्व दिवाली केवल रोशनी, मिठाइयों और खुशियों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना का भी विशेष अवसर है. हिंदू धर्म में दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी अपने भक्तों के घर पधारती हैं और उन्हें धन-धान्य, सुख-संपन्नता तथा खुशहाली का आशीर्वाद देती हैं. यही वजह है कि दिवाली आने से कई दिन पहले ही घरों में साफ-सफाई, रंग-रोगन और सजावट की तैयारियां शुरू हो जाती हैं.

लोग अपने घरों को फूलों, रंगोली, बंदनवार, रंगीन रोशनी और मिट्टी के दीपकों से सजाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर की सजावट केवल सुंदरता तक सीमित नहीं है? वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, दिशाओं और प्रकाश व्यवस्था को भी विशेष महत्व दिया गया है. मान्यता है कि स्वच्छ, व्यवस्थित और रोशनी से भरा घर सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक होता है. ऐसे में इस दिवाली यदि आप घर को आकर्षक बनाने के साथ पारंपरिक वास्तु मान्यताओं का भी ध्यान रखना चाहते हैं, तो कुछ आसान उपाय अपना सकते हैं.

1. मुख्य द्वार की सफाई से करें मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी

वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार से ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है. इसलिए दिवाली की सजावट शुरू करने से पहले प्रवेश द्वार की अच्छी तरह सफाई करें.

दरवाजे के आसपास जूते-चप्पल, कूड़ेदान, पुराने डिब्बे और अनुपयोगी सामान जमा न होने दें. दरवाजे के दोनों ओर पर्याप्त जगह रखें और प्रवेश मार्ग को साफ-सुथरा बनाएं. सजावट के लिए गेंदे के फूलों की माला, आम के पत्तों या अशोक के पत्तों का तोरण लगाया जा सकता है.

यदि मुख्य द्वार के आसपास पर्याप्त जगह है, तो वहां छोटे पौधे या पारंपरिक सजावटी दीपक भी रख सकते हैं. इससे घर का प्रवेश द्वार सुंदर और स्वागत योग्य दिखाई देगा.

2. मुख्य द्वार पर बनाएं स्वास्तिक और शुभ-लाभ के चिह्न

हिंदू धर्म में स्वास्तिक को मंगल, शुभता और कल्याण का प्रतीक माना जाता है. दिवाली के अवसर पर घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर स्वास्तिक बनाने की परंपरा है. इसके लिए रोली, हल्दी या कुमकुम का इस्तेमाल किया जा सकता है.

आप चाहें तो स्वास्तिक के साथ शुभ-लाभ या ओम का चिह्न भी बना सकते हैं. कई परिवार दरवाजे पर रंगोली के साथ इन धार्मिक प्रतीकों को सजाते हैं. इससे पारंपरिक सजावट को विशेष पहचान मिलती है.

वास्तु की मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार को साफ और सुंदर रखना शुभ माना जाता है. इसलिए दरवाजे पर सजावट करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आने-जाने का रास्ता बाधित न हो.

3. ईशान कोण को रखें साफ और व्यवस्थित

वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है. इस दिशा को पूजा-पाठ और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए विशेष महत्व दिया गया है. दिवाली से पहले घर के इस हिस्से की अच्छी तरह सफाई करना चाहिए.

यहां पुराने डिब्बे, टूटे बर्तन, खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान, अनुपयोगी फर्नीचर या कबाड़ जमा न होने दें. कोशिश करें कि यह स्थान खुला, स्वच्छ और व्यवस्थित रहे. यदि घर का पूजा स्थल इसी दिशा में है, तो उसे फूलों, स्वच्छ वस्त्र और दीपकों से सजा सकते हैं.

धार्मिक मान्यताओं में ईशान कोण को पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ा जाता है. इसलिए दिवाली पर इस स्थान को विशेष रूप से व्यवस्थित करना अच्छा माना जाता है.

4. लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों को साफ चौकी पर करें स्थापित

दिवाली की पूजा में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का विशेष स्थान है. पूजा की तैयारी करते समय सबसे पहले पूजा स्थल की सफाई करें. इसके बाद एक साफ चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां स्थापित करें.

वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, घर का पूजा स्थल उत्तर या पूर्व दिशा में होना शुभ माना जाता है. मूर्तियों को स्थापित करते समय उनकी स्थिति और पूजा की परंपरा का ध्यान रखें. चौकी के आसपास अनावश्यक सामान न रखें और पूजा सामग्री को व्यवस्थित तरीके से सजाएं.

पूजा स्थल को फूलों, दीपकों और पारंपरिक सजावटी वस्तुओं से आकर्षक बनाया जा सकता है. ध्यान रखें कि पूजा के दौरान पर्याप्त जगह हो और दीपक तथा अगरबत्ती सुरक्षित स्थान पर रखे जाएं.

5. घर के अलग-अलग हिस्सों में जलाएं दीपक

दिवाली का सबसे बड़ा आकर्षण दीपों की रोशनी है. दीपक को अंधकार पर प्रकाश की विजय और शुभता का प्रतीक माना जाता है. इस दिन घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, आंगन, बालकनी और खिड़कियों के पास दीपक जलाने की परंपरा है.

वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर के प्रवेश द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है. पूजा स्थल पर घी का दीपक और घर के अन्य हिस्सों में तेल के दीपक जलाए जा सकते हैं. मिट्टी के पारंपरिक दीपक दिवाली की सजावट को खास बनाते हैं.

दीपक जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है. उन्हें पर्दों, कागज, कपड़ों और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें. छोटे बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से भी दीपकों को सुरक्षित रखना चाहिए.

6. रंगोली से सजाएं घर का प्रवेश द्वार

दिवाली पर रंगोली बनाने की परंपरा सदियों पुरानी है. इसे शुभता, खुशियों और उत्सव का प्रतीक माना जाता है. घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाने से सजावट में रंगों की सुंदरता जुड़ जाती है.

आप कमल, स्वास्तिक, दीपक, फूलों या पारंपरिक ज्यामितीय आकृतियों वाली रंगोली बना सकते हैं. इसके लिए प्राकृतिक रंगों, चावल के आटे और फूलों की पंखुड़ियों का इस्तेमाल किया जा सकता है.

रंगोली बनाते समय दरवाजे से आने-जाने का रास्ता खुला रखें. यदि घर में छोटे बच्चे या बुजुर्ग हैं, तो फिसलन पैदा करने वाले रंगों और सजावटी सामग्री से बचें. फूलों की रंगोली एक सुंदर और पारंपरिक विकल्प हो सकती है.

7. रोशनी और सजावट में रखें संतुलन

दिवाली पर घर को रोशनी से सजाना उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा है. रंगीन लाइट्स, झालर और छोटे सजावटी दीपक घर को आकर्षक बनाते हैं. वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं में घर के अंधेरे और अव्यवस्थित हिस्सों को साफ करके रोशन रखने पर जोर दिया जाता है.

आप मुख्य द्वार, बालकनी, खिड़कियों और आंगन में रोशनी की व्यवस्था कर सकते हैं. सजावट के लिए सुनहरी, पीली और गर्म रोशनी वाली लाइट्स का इस्तेमाल घर को सौम्य और उत्सवी रूप दे सकता है.

हालांकि सजावट करते समय बिजली के तारों और प्लग की गुणवत्ता जांचना जरूरी है. एक ही सॉकेट में बहुत सारे उपकरण न लगाएं और खराब वायरिंग का इस्तेमाल न करें. सुरक्षित रोशनी ही त्योहार की खुशियों को बनाए रख सकती है.

दिवाली की सजावट में इन गलतियों से बचें

घर को सुंदर बनाने के उत्साह में कई बार लोग ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे सजावट अव्यवस्थित हो जाती है. वास्तु की मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर घर में टूटे-फूटे सामान और अनुपयोगी वस्तुओं को जमा करके नहीं रखना चाहिए.

  • मुख्य द्वार के सामने जूते-चप्पल और कूड़ा जमा न करें.

  • पूजा स्थल के आसपास अनावश्यक सामान न रखें.

  • ईशान कोण को कबाड़ और भारी अनुपयोगी वस्तुओं से भरने से बचें.

  • टूटे हुए दीपक और खराब सजावटी सामान का इस्तेमाल न करें.

  • रंगोली और सजावट के कारण आने-जाने का रास्ता बाधित न होने दें.

  • दीपक और बिजली की झालरों को असुरक्षित तरीके से न लगाएं.

आस्था, स्वच्छता और सुंदरता से खास बनेगी दिवाली

दिवाली पर घर की सजावट का उद्देश्य केवल दीवारों और दरवाजों को सुंदर बनाना नहीं, बल्कि परिवार के साथ खुशियों और सकारात्मकता का वातावरण तैयार करना भी है. वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार मुख्य द्वार की सफाई, ईशान कोण की व्यवस्था, पूजा स्थल की पवित्रता, दीपकों का प्रकाश और रंगोली जैसे उपाय शुभ माने जाते हैं.

इस दिवाली घर को सजाते समय इन पारंपरिक तरीकों को अपनाकर उत्सव को और खास बनाया जा सकता है. हालांकि वास्तु संबंधी उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इनके परिणाम की वैज्ञानिक गारंटी नहीं है. घर की वास्तविक सुंदरता स्वच्छता, सुरक्षा, आपसी प्रेम और परिवार के साथ बिताए गए खुशनुमा पलों से ही बढ़ती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-