मूवी रिव्यू: ‘रामायण पार्ट 1’ में रणबीर कपूर बने मर्यादा पुरुषोत्तम राम, यश के रावण अवतार ने जमाया रंग; भव्य VFX के बावजूद संगीत ने किया निराश

मूवी रिव्यू: ‘रामायण पार्ट 1’ में रणबीर कपूर बने मर्यादा पुरुषोत्तम राम, यश के रावण अवतार ने जमाया रंग; भव्य VFX के बावजूद संगीत ने किया निराश

प्रेषित समय :17:21:06 PM / Thu, Nov 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. भारतीय पौराणिक कथाओं की सबसे चर्चित गाथा रामायण को बड़े पर्दे पर नए अंदाज में पेश करने की कोशिश निर्देशक नितेश तिवारी ने की है. फिल्म ‘रामायण पार्ट 1’ अपने विशाल बजट, भव्य सेट और अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स के कारण पहले से ही चर्चा में रही है. फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं, जबकि यश ने लंकापति रावण का किरदार निभाया है. दोनों कलाकारों की मौजूदगी इस पौराणिक कहानी को एक बड़े सिनेमाई अनुभव में बदलने का प्रयास करती है.

फिल्म की खास बात यह है कि कहानी केवल राम के जीवन पर केंद्रित नहीं रहती, बल्कि रावण की शक्ति, तपस्या और उसके भीतर पनपते अहंकार को भी विस्तार से दिखाती है. अयोध्या की भव्यता से लेकर लंका के साम्राज्य तक फिल्म का विजुअल संसार आकर्षित करता है. हालांकि, शानदार तकनीकी प्रस्तुति के बावजूद कुछ जगह कहानी की गति और संवाद अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाते.

कहानी: रावण की महत्वाकांक्षा से लेकर राम के वनवास और सीता हरण तक

फिल्म की शुरुआत अयोध्या के बजाय लंका से होती है. यहां दर्शकों को रावण के जीवन और उसके साम्राज्य की पृष्ठभूमि से परिचित कराया जाता है. यश ने रावण के उस व्यक्तित्व को पर्दे पर उतारा है, जिसमें अपार ज्ञान, तपस्या से प्राप्त शक्ति और सत्ता का अहंकार एक साथ दिखाई देते हैं. ब्रह्मा से वरदान प्राप्त करने, इंद्र को पराजित करने और कुबेर से लंका का अधिकार हासिल करने तक की घटनाएं उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाती हैं.

इसके बाद कहानी अयोध्या पहुंचती है, जहां राजा दशरथ के घर भगवान राम का जन्म होता है. रणबीर कपूर के किरदार के माध्यम से उनके बचपन, ऋषि विश्वामित्र के साथ यात्रा और मिथिला में सीता स्वयंवर के प्रसंग को दिखाया गया है. शिव धनुष तोड़ने के बाद राम और सीता का विवाह होता है.

लेकिन राजमहल की परिस्थितियां बदलने के साथ राम के जीवन में बड़ा मोड़ आता है. कैकेयी अपने वरदान मांगती हैं और राम को 14 वर्षों के वनवास पर जाना पड़ता है. सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वन की ओर प्रस्थान करते हैं.

वनवास के दौरान शूर्पणखा और स्वर्ण मृग से जुड़े प्रसंग कहानी को आगे बढ़ाते हैं. मारीच की माया के चलते राम और लक्ष्मण आश्रम से दूर चले जाते हैं. इसी अवसर का लाभ उठाकर रावण साधु का रूप धारण कर सीता का अपहरण कर लेता है. जटायु उन्हें बचाने के लिए रावण से संघर्ष करता है, लेकिन गंभीर रूप से घायल हो जाता है.

सीता की तलाश में निकले राम को जटायु अपहरण की जानकारी देता है. इसी भावनात्मक प्रसंग के साथ फिल्म का पहला भाग समाप्त होता है. पोस्ट क्रेडिट सीन में हनुमान जी की संक्षिप्त झलक भी दिखाई गई है, जो अगले भाग को लेकर उत्सुकता बढ़ाती है.

अभिनय: राम के रूप में रणबीर का संयम, रावण बनकर यश का प्रभावशाली अंदाज

रणबीर कपूर ने भगवान राम के किरदार में गंभीरता और शालीनता बनाए रखने की कोशिश की है. उनके अभिनय में संयम दिखाई देता है. वह किरदार को जरूरत से ज्यादा नाटकीय बनाने के बजाय सहज और गरिमापूर्ण तरीके से प्रस्तुत करते हैं.

सीता की भूमिका में साई पल्लवी अपने स्वाभाविक अभिनय से प्रभावित करती हैं. लक्ष्मण बने रवि दुबे भी अपने किरदार में भाई के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी का भाव दिखाते हैं.

दूसरी ओर, यश का रावण अवतार फिल्म के सबसे आकर्षक पहलुओं में शामिल है. उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और पर्दे पर मौजूदगी रावण के राजसी और शक्तिशाली स्वरूप को मजबूती देती है. रावण के क्रोध और अहंकार को व्यक्त करने में उनका अभिनय खास ध्यान खींचता है.

इसके अलावा अरुण गोविल, लारा दत्ता, शिबा चड्ढा और रकुल प्रीत सिंह भी अलग-अलग महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आते हैं. सनी देओल की हनुमान के रूप में झलक कहानी के अगले अध्याय के प्रति दिलचस्पी पैदा करती है.

निर्देशन: नितेश तिवारी के सामने बड़ी चुनौती

‘दंगल’ जैसी सफल फिल्म बना चुके नितेश तिवारी के लिए रामायण को पर्दे पर उतारना आसान चुनौती नहीं है. इस कहानी से करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं और दर्शकों की अपेक्षाएं भी काफी ऊंची हैं.

निर्देशक ने कहानी की शुरुआत रावण के व्यक्तित्व से करके एक अलग दृष्टिकोण अपनाया है. इससे दर्शकों को दोनों प्रमुख पात्रों की पृष्ठभूमि समझने का अवसर मिलता है. अयोध्या और लंका के संसार को अलग-अलग अंदाज में स्थापित करने की कोशिश भी दिखाई देती है.

हालांकि, कुछ घटनाओं में भावनात्मक गहराई और ठहराव की कमी महसूस होती है. कई संवाद ऐसे हैं, जिन्हें अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता था. रामायण जैसी महागाथा में संवादों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और इस मामले में फिल्म को कुछ अतिरिक्त मजबूती की जरूरत नजर आती है.

VFX और प्रोडक्शन डिजाइन: फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष

तकनीकी स्तर पर फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट इसकी बड़ी उपलब्धियों में शामिल है. अयोध्या के महल, लंका की भव्य इमारतें, प्राकृतिक दृश्य और पौराणिक परिवेश को बड़े स्तर पर तैयार किया गया है.

VFX के जरिए कई दृश्यों को प्रभावशाली रूप दिया गया है. कॉस्ट्यूम डिजाइन, सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन डिजाइन भी फिल्म के भव्य स्वरूप को बेहतर बनाते हैं.

हालांकि, कुछ मायावी जीवों और राक्षसों से जुड़े दृश्यों में कंप्यूटर ग्राफिक्स की कृत्रिमता दिखाई देती है. उनके हावभाव और गतिविधियों को और स्वाभाविक बनाया जा सकता था. इसके बावजूद बड़े पर्दे पर फिल्म का दृश्यात्मक अनुभव आकर्षक बना रहता है.

संगीत और बैकग्राउंड स्कोर: बड़ी उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरा

फिल्म के संगीत से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं. ए.आर. रहमान और हंस जिमर जैसे प्रतिष्ठित संगीतकारों का जुड़ाव इसे खास बनाता है. उम्मीद थी कि राम और रावण के किरदारों के लिए ऐसी धुनें तैयार होंगी, जो दर्शकों के मन में लंबे समय तक बनी रहें.

हालांकि, फिल्म में कुछ दृश्यों का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा प्रभाव छोड़ता है, लेकिन कोई ऐसी प्रमुख धुन सुनाई नहीं देती जो कहानी की पहचान बन सके. राम की दिव्यता और रावण के रौद्र व्यक्तित्व को संगीत के जरिए और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता था.

इस लिहाज से फिल्म का संगीत उसके भव्य विजुअल्स के मुकाबले थोड़ा कमजोर महसूस होता है.

फाइनल वर्डिक्ट: बड़े पर्दे का भव्य अनुभव, लेकिन कहानी और संगीत में सुधार की गुंजाइश

कुल मिलाकर ‘रामायण पार्ट 1’ एक महत्वाकांक्षी सिनेमाई प्रस्तुति है. रणबीर कपूर का मर्यादित अंदाज और यश का प्रभावशाली रावण अवतार फिल्म की प्रमुख खूबियां हैं. शानदार प्रोडक्शन डिजाइन और बड़े स्तर पर तैयार किए गए विजुअल्स पौराणिक संसार को आकर्षक बनाते हैं.

वहीं, कुछ हिस्सों में धीमी कहानी, साधारण संवाद और अपेक्षा से कमजोर संगीत फिल्म के प्रभाव को सीमित करते हैं. इसके बावजूद रामायण के प्रसंगों को भव्य सिनेमाई रूप में देखने की चाह रखने वाले दर्शकों के लिए इसमें काफी कुछ खास है.

पहले भाग का अंत दर्शकों को राम और रावण के बीच आने वाले बड़े संघर्ष की प्रतीक्षा में छोड़ देता है. अब नजरें दूसरे भाग पर रहेंगी, जिसमें हनुमान, लंका और महायुद्ध के प्रसंगों को देखने की उम्मीद है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-