नई दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों को कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति देने की मांग अब न्यायिक स्तर पर पहुंच गई है. दिल्ली हाईकोर्ट ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका (PIL) पर बुधवार को सुनवाई करते हुए सीबीएसई और केंद्र सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. अदालत ने नोटिस का जवाब छह सप्ताह के भीतर देने को कहा है. हालांकि, सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से स्पष्ट किया कि कैलकुलेटर इस्तेमाल की अनुमति देने संबंधी अपने ही विशेषज्ञ समिति के प्रस्ताव को लागू करना है या नहीं, इसका निर्णय सीबीएसई को ही करना होगा.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. याचिका में मांग की गई है कि कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों को विशेष रूप से अकाउंटेंसी विषय में बेसिक और नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी करीब दो वर्ष पहले इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है, लेकिन अब तक इसे लागू करने के संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.
सीबीएसई की अपनी समिति ने दिसंबर 2024 में दी थी मंजूरी
याचिका का मुख्य आधार सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी की 140वीं बैठक है, जो 26 दिसंबर 2024 को आयोजित हुई थी. इस बैठक के एजेंडे में आइटम नंबर 4.08 के तहत कक्षा 12वीं की अकाउंटेंसी परीक्षा में कैलकुलेटर इस्तेमाल की अनुमति देने के प्रस्ताव पर विचार किया गया था.
बैठक के रिकॉर्ड के अनुसार, विद्यार्थियों को बेसिक और नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी. इसके पीछे उद्देश्य लंबी और जटिल गणनाओं के कारण विद्यार्थियों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को कम करना था, ताकि वे गणितीय गणनाओं में अधिक समय लगाने के बजाय विश्लेषणात्मक क्षमता, अवधारणाओं की समझ और केस स्टडी पर ध्यान केंद्रित कर सकें.
प्रस्ताव में यह भी कहा गया था कि कैलकुलेटर के अनुमत मॉडल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि सभी विद्यार्थियों के लिए समान व्यवस्था सुनिश्चित हो सके. इस पहल को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की उच्च स्तरीय चिंतन क्षमता और विश्लेषणात्मक कौशल विकसित करने की अवधारणा के अनुरूप बताया गया था.
दो साल बाद भी लागू करने पर फैसला नहीं, कोर्ट पहुंच गए अभिभावक
याचिका दाखिल करने वाले अभिभावकों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि दिसंबर 2024 में पाठ्यक्रम समिति द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बावजूद अब तक इस पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है.
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि सीबीएसई ने स्वयं यह प्रस्ताव तैयार किया था और इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों से भी जोड़ा था. ऐसे में बोर्ड को अनिश्चितकाल तक इस विषय को लंबित नहीं रखना चाहिए. उसे स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए कि कैलकुलेटर इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी या नहीं.
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि क्या गवर्निंग बॉडी की बैठक में लिया गया निर्णय बाध्यकारी है? इस पर याचिकाकर्ताओं के वकील ने स्वीकार किया कि यह निर्णय अपने आप में बाध्यकारी नहीं है. हालांकि, उनका तर्क था कि जब बोर्ड की अपनी समिति ने प्रस्ताव पर विचार कर उसे मंजूरी दी है, तो उस पर अंतिम निर्णय लेने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए.
अदालत ने अकादमिक मामलों में हस्तक्षेप को लेकर जताई सावधानी
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने शैक्षणिक नीतियों और परीक्षा संबंधी निर्णयों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं पर भी टिप्पणी की. पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि अदालतों को अकादमिक अनुशासन और शैक्षणिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना चाहिए.
अदालत ने सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी की बैठक के रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रस्ताव बैठक के मिनट्स में दर्ज है, लेकिन इसे लागू करना है या नहीं, यह निर्णय बोर्ड को ही लेना है.
याचिकाकर्ताओं की ओर से जवाब दिया गया कि सीबीएसई ने अभी तक प्रस्ताव को न तो स्वीकार किया है और न ही औपचारिक रूप से खारिज किया है. बोर्ड इस मामले पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपना रहा है. ऐसे में अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को स्थिति स्पष्ट हो सके.
सीबीएसई ने कहा 204 विषयों के लिए विशेषज्ञ समिति की जरूरत
सीबीएसई की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि बोर्ड के अंतर्गत कुल 204 विषय संचालित होते हैं. इनमें केवल अकाउंटेंसी ही नहीं, बल्कि कई अन्य विषयों में भी गणनाओं की आवश्यकता पड़ती है. ऐसे में यदि कैलकुलेटर इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है, तो इसके व्यापक प्रभावों का अध्ययन करना जरूरी होगा.
बोर्ड की ओर से कहा गया कि इस संबंध में संबंधित विषयों के विशेषज्ञों की समिति गठित कर उनकी सिफारिशें लेना आवश्यक है. इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति देने से जुड़ी व्यवस्थाओं और संचालन संबंधी पहलुओं पर भी विचार करना होगा.
सीबीएसई के वकील ने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा से संबंधित नियमों में बदलाव का अंतिम निर्णय परीक्षा समिति के अधिकार क्षेत्र में आता है, जबकि कैलकुलेटर इस्तेमाल का प्रस्ताव पाठ्यक्रम समिति की ओर से आया था. बोर्ड ने इस विषय पर निर्देश प्राप्त करने के लिए अदालत से समय मांगा.
दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए भी कैलकुलेटर सुविधा बढ़ाने की मांग
यह जनहित याचिका केवल अकाउंटेंसी विषय तक सीमित नहीं है. इसमें गणितीय गणना करने में विशेष कठिनाई का सामना करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी सुविधा बढ़ाने की मांग की गई है.
याचिकाकर्ताओं ने डिस्कैल्कुलिया (Dyscalculia) से प्रभावित विद्यार्थियों को पहले से उपलब्ध कैलकुलेटर संबंधी राहत का विस्तार अन्य श्रेणियों के दिव्यांग विद्यार्थियों तक करने का अनुरोध किया है. इसके अलावा गणित विषय में भी कैलकुलेटर सुविधा लागू करने की संभावना का अध्ययन करने के लिए समयबद्ध विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई है.
याचिका में कहा गया है कि 17 अगस्त 2026 को सीबीएसई को इस संबंध में अभ्यावेदन भेजा गया था, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद अभिभावकों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.
केस स्टेटस और अगली सुनवाई 27 जनवरी 2027 को
इस मामले का शीर्षक Vishal Dua & Ors. v. Union of India & Ors. है. याचिका विशाल दुआ सहित 11 अभिभावकों की ओर से दायर की गई है. इसमें सीबीएसई को अकाउंटेंसी परीक्षा में कैलकुलेटर इस्तेमाल संबंधी प्रस्ताव पर आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लेकर उसे अधिसूचित और लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है.
4 नवंबर 2026 को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया. नोटिस छह सप्ताह में जवाब के लिए वापसी योग्य रखा गया है. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2027 निर्धारित की है.
फिलहाल सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में कैलकुलेटर इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी गई है. अदालत ने केवल याचिका पर नोटिस जारी किया है. अब सीबीएसई के जवाब और आगे की सुनवाई से स्पष्ट होगा कि बोर्ड अपने पुराने प्रस्ताव को लागू करने की दिशा में क्या निर्णय लेता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

