नई दिल्ली. पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते (DA) के भुगतान से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतरिम राहत दी है. शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चल रही दीवानी और आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. इसके साथ ही अदालत ने पंजाब सरकार को बकाया भुगतान के लिए विस्तृत योजना पेश करने का निर्देश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से 1 दिसंबर 2026 तक लिक्विडेशन प्लान दाखिल करने को कहा है. इसमें यह बताना होगा कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित डीए का भुगतान किस तरह और कितनी अवधि में पूरा किया जाएगा. अदालत ने 31 मार्च 2027 तक किए जाने वाले संभावित भुगतान का विस्तृत ब्योरा भी मांगा है.
मुख्य सचिव की पेशी पर भी फिलहाल रोक
यह आदेश जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. मामला हाईकोर्ट के 12 अक्टूबर और 30 अक्टूबर 2026 के आदेशों से संबंधित था.
दरअसल, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बकाया डीए भुगतान में देरी को लेकर अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी. हाईकोर्ट ने 30 अक्टूबर के आदेश में पंजाब के मुख्य सचिव को 5 नवंबर को आपराधिक अवमानना मामले में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था.
पंजाब सरकार ने इन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट में चल रही दोनों तरह की अवमानना कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी.
1 दिसंबर तक देना होगा बकाया भुगतान का पूरा हिसाब
सुप्रीम कोर्ट ने केवल अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाकर मामले को समाप्त नहीं किया है, बल्कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाये के निपटारे को लेकर सरकार से ठोस वित्तीय योजना मांगी है.
अदालत के निर्देश के अनुसार, राज्य सरकार को अपने प्रस्ताव में यह स्पष्ट करना होगा कि:
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कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का कितना डीए बकाया है.
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बकाया राशि का भुगतान किस चरण में किया जाएगा.
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भुगतान के लिए वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था कैसे होगी.
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31 मार्च 2027 तक कितनी राशि जारी की जाएगी.
इससे सरकार को भुगतान की समयसीमा और वित्तीय व्यवस्था का स्पष्ट खाका अदालत के सामने रखना होगा.
सिविल और क्रिमिनल अवमानना दोनों पर रोक
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित आपराधिक अवमानना की आगे की कार्यवाही अगले आदेश तक स्थगित रहेगी. साथ ही दीवानी अवमानना मामले में भी राज्य सरकार और उसके वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ फिलहाल कोई प्रतिकूल या दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा.
इस आदेश के बाद मुख्य सचिव की व्यक्तिगत पेशी से जुड़ी कार्यवाही पर भी अंतरिम रोक प्रभावी हो गई है.
अब इस मामले में पंजाब सरकार के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी निर्धारित समयसीमा के भीतर डीए बकाये के भुगतान का वित्तीय रोडमैप पेश करने की है. कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें अब 1 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली कार्रवाई पर रहेंगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-
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