284 शहरों में प्रदूषण का कहर, बल्लभगढ़ सबसे जहरीला और दिल्ली पांचवें स्थान पर, कई शहरों में सांस लेना हुआ मुश्किल

284 शहरों में प्रदूषण का कहर, बल्लभगढ़ सबसे जहरीला और दिल्ली पांचवें स्थान पर, कई शहरों में सांस लेना हुआ मुश्किल

प्रेषित समय :22:30:18 PM / Sat, Nov 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. देश में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की सात नवंबर की दैनिक वायु गुणवत्ता रिपोर्ट के अनुसार, देश के 284 शहरों में हरियाणा का बल्लभगढ़ सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 409 दर्ज किया गया. यह गंभीर श्रेणी में आता है. दिल्ली का औसत एक्यूआई 369 रहा, जिसके साथ वह देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में पांचवें स्थान पर रही. सिरसा, गजरौला और पंचगांव जैसे शहरों में भी प्रदूषण खतरनाक स्तर के करीब पहुंच गया है. हवा में सूक्ष्म धूलकणों की बढ़ती मात्रा ने लोगों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

बल्लभगढ़ में प्रदूषण गंभीर श्रेणी में, सिरसा और गजरौला भी बेहाल

सीपीसीबी के सात नवंबर के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा के बल्लभगढ़ में एक्यूआई 409 दर्ज किया गया. यह देश के निगरानी में शामिल 284 शहरों में सबसे अधिक रहा. गंभीर श्रेणी की वायु गुणवत्ता में स्वस्थ व्यक्तियों को भी श्वसन संबंधी परेशानी हो सकती है, जबकि पहले से सांस और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए जोखिम और बढ़ जाता है.

दूसरे स्थान पर हरियाणा का सिरसा रहा, जहां एक्यूआई 383 दर्ज हुआ. गजरौला में वायु गुणवत्ता सूचकांक 382 और पंचगांव में 377 रहा. इन शहरों की हवा बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई. आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण का संकट केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और मध्यम आकार के शहर भी इसकी चपेट में हैं.

दिल्ली में एक्यूआई 369, मामूली सुधार के बावजूद हवा बेहद खराब

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सात नवंबर को आधिकारिक दैनिक एक्यूआई 369 दर्ज किया गया. इससे एक दिन पहले छह नवंबर को यह 382 था. इस प्रकार 24 घंटे में 13 अंकों का सुधार हुआ, लेकिन हवा की गुणवत्ता अब भी बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है.

तीन नवंबर को दिल्ली का एक्यूआई 350 दर्ज किया गया था. इसके बाद प्रदूषण के स्तर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला. सात नवंबर का आंकड़ा तीन नवंबर के बाद सबसे कम रहा, हालांकि इससे स्थिति सामान्य होने का संकेत नहीं मिलता.

शनिवार रात नौ बजे दिल्ली का घंटेवार एक्यूआई 368 दर्ज हुआ. यह भी बेहद खराब श्रेणी में था. दिन के आधिकारिक औसत और रात के घंटेवार आंकड़े में मामूली अंतर से स्पष्ट है कि प्रदूषण का दबाव बना हुआ था.

बहादुरगढ़ से गुरुग्राम तक प्रदूषण का व्यापक असर

दिल्ली के आसपास के शहरों में भी हवा की स्थिति चिंताजनक रही. हरियाणा के बहादुरगढ़ में एक्यूआई 364 दर्ज किया गया, जबकि खोड़ा में यह 352 रहा. गुरुग्राम में एक्यूआई 345 दर्ज हुआ. इन सभी स्थानों की हवा बेहद खराब श्रेणी में रही.

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर भी कई शहर प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझते दिखाई दिए. बिलाईपदा में एक्यूआई 350 और अनपरा में 345 दर्ज किया गया. इस तरह देश के दस सर्वाधिक प्रदूषित स्थानों में कई औद्योगिक और शहरी क्षेत्र शामिल रहे.

हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार अलग-अलग शहरों की एक्यूआई रैंकिंग की तुलना करते समय सावधानी जरूरी है. किसी शहर का औसत आंकड़ा एक निगरानी केंद्र पर आधारित हो सकता है, जबकि दिल्ली जैसे महानगरों में दर्जनों केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया जाता है.

पीएम 2.5 बना सबसे बड़ा खतरा, सूक्ष्म कणों से बढ़ी चिंता

दिल्ली के 59 रिपोर्टिंग निगरानी केंद्रों के पिछले 24 घंटे के प्रदूषण आंकड़ों में पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक के रूप में सामने आया. अधिकांश केंद्रों पर सूक्ष्म कणों का प्रभाव सबसे अधिक रहा, जबकि शेष केंद्रों पर पीएम 10 प्रमुख प्रदूषक पाया गया.

पीएम 2.5 के प्रदूषक-विशिष्ट सूचकांक का मध्य मान 386 दर्ज हुआ, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है. अलग-अलग केंद्रों पर इसका न्यूनतम स्तर 63 और अधिकतम 439 रहा. इससे स्पष्ट है कि दिल्ली के विभिन्न इलाकों में प्रदूषण की तीव्रता में बड़ा अंतर मौजूद है.

पीएम 2.5 ऐसे सूक्ष्म कण होते हैं जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है. ये सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं.

पीएम 10 का स्तर भी चिंताजनक, कई केंद्रों पर स्थिति गंभीर

दिल्ली में पीएम 10 का मध्य सूचकांक 307 दर्ज किया गया. विभिन्न निगरानी केंद्रों पर इसका न्यूनतम स्तर 166 और अधिकतम 437 रहा. पीएम 10 में सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाले कण और अन्य स्रोतों से उत्पन्न अपेक्षाकृत बड़े कण शामिल होते हैं.

कार्बन मोनोऑक्साइड का मध्य सूचकांक 68 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का 53 दर्ज हुआ. दोनों संतोषजनक श्रेणी में रहे. ओजोन का मध्य सूचकांक 41, सल्फर डाइऑक्साइड का 15 और अमोनिया का आठ दर्ज हुआ. ये तीनों अच्छी श्रेणी में रहे.

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दिल्ली में इस अवधि के दौरान वायु गुणवत्ता बिगाड़ने में मुख्य भूमिका सूक्ष्म और मोटे कणों की रही. हालांकि, प्रदूषकों की स्थिति प्रत्येक निगरानी केंद्र पर अलग-अलग थी.

प्रदूषण के आंकड़ों की गणना कैसे होती है

सीपीसीबी वायु गुणवत्ता का आकलन विभिन्न प्रदूषकों की निर्धारित अवधि के औसत के आधार पर करता है. पीएम 2.5, पीएम 10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और अमोनिया के लिए पिछले 24 घंटे के आंकड़ों का उपयोग किया जाता है. वहीं ओजोन और कार्बन मोनोऑक्साइड के लिए आठ घंटे की अवधि का औसत लिया जाता है.

भारत में एक्यूआई शून्य से 50 तक अच्छा, 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बेहद खराब और 401 से 500 तक गंभीर माना जाता है.

बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ सकता है स्वास्थ्य जोखिम

लगातार बेहद खराब और गंभीर श्रेणी में बनी हवा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और श्वसन संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों के लिए विशेष चिंता का विषय है. प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने से खांसी, गले में जलन, आंखों में परेशानी और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.

स्वास्थ्य संबंधी सामान्य सावधानियों के तहत अत्यधिक प्रदूषण वाले समय में अनावश्यक बाहरी गतिविधियों को सीमित करना, भारी व्यायाम से बचना और जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला एन95 मास्क इस्तेमाल करना उपयोगी हो सकता है.

प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती अब कई शहरों के सामने

सात नवंबर की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि खराब वायु गुणवत्ता केवल दिल्ली की समस्या नहीं रह गई है. बल्लभगढ़ से लेकर सिरसा, गजरौला, पंचगांव, बहादुरगढ़, गुरुग्राम और अनपरा तक प्रदूषण का व्यापक असर दिखाई दे रहा है.

वाहनों से उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण कार्यों की धूल, कचरा जलाने और मौसमी परिस्थितियों जैसे कारक वायु प्रदूषण को प्रभावित कर सकते हैं. हालांकि, किसी विशेष शहर में प्रदूषण के स्रोतों की सटीक हिस्सेदारी अलग वैज्ञानिक अध्ययन से ही निर्धारित की जा सकती है.

सीपीसीबी के ताजा उपलब्ध कराए गए आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता पर सतत निगरानी और प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण उपायों की आवश्यकता बनी हुई है.

देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी अलग-अलग रही हवा की गुणवत्ता

सात नवंबर के सीपीसीबी दैनिक बुलेटिन पर आधारित एक अन्य प्रकाशित डैशबोर्ड के अनुसार, दिल्ली और उसके आसपास के शहरों से बाहर भी वायु गुणवत्ता में बड़ा अंतर दर्ज किया गया. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक्यूआई 207, कानपुर में 231 और वाराणसी में 175 रहा. राजस्थान के जयपुर में 231 तथा पंजाब के लुधियाना में 222 दर्ज किया गया. लखनऊ, कानपुर, जयपुर और लुधियाना की हवा खराब श्रेणी में रही, जबकि वाराणसी की हवा मध्यम श्रेणी में थी.

देश के अन्य महानगरों की बात करें तो मुंबई में एक्यूआई 108, पुणे में 157, कोलकाता में 165 और अहमदाबाद में 176 दर्ज हुआ. इन शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में रही. वहीं हैदराबाद में 76, चेन्नई में 74 और बेंगलुरु में 59 एक्यूआई दर्ज किया गया, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है. इससे स्पष्ट है कि सात नवंबर को उत्तर भारत के कई शहरों में प्रदूषण का दबाव दक्षिण भारत के प्रमुख महानगरों की तुलना में अधिक था.

 

नोट- समाचार में 284 शहरों की रैंकिंग के लिए आपके उपलब्ध कराए गए सीपीसीबी बुलेटिन के आंकड़े और अन्य महानगरों के लिए अलग से प्रकाशित सीपीसीबी-आधारित आंकड़े इस्तेमाल किए गए हैं. दोनों स्रोतों के आंकड़ों को एक ही सत्यापित राष्ट्रीय रैंकिंग नहीं माना जाना चाहिए.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-