अभिमनोजः हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में बागी बात बिगाड़ेंगे या मान जाएंगे?

अभिमनोजः हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में बागी बात बिगाड़ेंगे या मान जाएंगे?

प्रेषित समय :21:38:21 PM / Wed, Oct 26th, 2022

पल-पल इंडिया. गुजरते समय के साथ केंद्रीय नेतृत्व कमजोर पड़ रहा है, तो बीजेपी में भी बागियों की संख्या बढ़ती जा रही है?
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए टिकट आवंटन से नाराज करीब एक दर्जन बागियों को मनाने में बीजेपी कामयाब नहीं हुई, तो कई सीटों पर तगड़ा सियासी झटका लग सकता है!
इसके अलावा ऐसे नाराज नेताओं की भी कमी नहीं है, जो बागी होकर चुनाव तो नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी उदासीनता बीजेपी को भारी पड़ सकती है?
खबरों पर भरोसा करें तो हिमाचल प्रदेश के तकरीबन हर जिले में बीजेपी नेता टिकट आवंटन से नाराज चल रहे हैं और उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन पत्र भरा है, जैसे.... किन्नौर विधानसभा सीट से पूर्व विधायक तेजवंत सिंह नेगी का टिकट कटने के बाद उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर पर्चा दाखिल किया है, तो आनी से विधायक किशोरी लाल का टिकट कटा तो उन्होंने भी बतौर निर्दलीय नामांकन पत्र दाखिल कर दिया.
इसी तरह, बंजार से बीजेपी के पूर्व सांसद महेश्वर सिंह के बेटे ने बतौर स्वतंत्र उम्मीदवार पर्चा भरा, तो बेटे के बागी होने के बाद बीजेपी ने कुल्लू से भाजपा प्रत्याशी महेश्वर सिंह का भी टिकट काट दिया, नतीजा.... उन्होंने भी स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन पत्र भर दिया है.
उधर, धर्मशाला से पूर्व विधायक विशाल नैहरिया का टिकट कटा, तो वह भी बतौर निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं.
इसी तरह, देहरा से होशियार सिंह का टिकट काटने के बाद वह भी चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार बने हैं, याद रहे.... वह पिछले विधानसभा चुनाव में भी निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीते थे और कुछ समय पहले ही बीजेपी में शामिल हुए थे.
उधर, बिलासपुर सदर से सुभाष शर्मा स्वतंत्र चुनाव लड़ रहे हैं, तो नालागढ़ से केएल ठाकुर निर्दलीय उम्मीदवार बने हैं, जबकि भरमौर से जियालाल स्वतंत्र उम्मीदवार हैं.
कुछ नेताओं के टिकट बदले भी गए हैं, चंबा से पहले इंदिरा कपूर को और बाद में टिकट बदलकर नीलम नैय्यर को दिया, तो नूरपुर से राकेश पठानिया का टिकट बदला गया और उनकी जगह रणबीर सिंह निक्का को टिकट दिया गया है, जबकि शिमला ग्रामीण से प्रमोद शर्मा का टिकट काटकर रवि मेहता को दिया गया.
हालात यह हैं कि अब अनुशासन का सियासी डंडा भी बेअसर होता जा रहा है?
हिमालच प्रदेश में टिकट को लेकर बीजेपी के भीतर चल रही नाराजगी और बगावती तेवरों के मद्देनजर बीजेपी नेतृत्व एक्शन में है, खबरे हैं कि अब बगावत नियंत्रण के लिए खुद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मोर्चा संभाला है, देखना दिलचस्प होगा कि सियासी प्रबंधन में एक्सपर्ट मोदी टीम चुनाव में कितना राजनीतिक नुकसान बचा पाती है!

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