मोदी ने मणिपुर में शांति के संदेश के साथ ही 8,500 करोड़ की परियोजनाओं का ऐलान

मोदी ने मणिपुर में शांति के संदेश के साथ ही 8,500 करोड़ की परियोजनाओं का ऐलान

प्रेषित समय :21:49:52 PM / Sat, Sep 13th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

इंफाल. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मणिपुर पहुँचे. यह उनकी पहली यात्रा थी जब से दो साल पहले मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा भड़की थी, जिसमें 260 से अधिक लोग मारे गए और करीब 60 हज़ार लोग बेघर हुए. मोदी ने कुकी-बहुल चुराचांदपुर ज़िले में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि “आशा और विश्वास की एक नई सुबह उग रही है” और सभी समूहों से शांति के मार्ग पर आगे बढ़ने की अपील की.

प्रधानमंत्री ने यहाँ डिजिटल माध्यम से 7,300 करोड़ रुपये की आधारभूत परियोजनाओं की नींव रखी. इनमें सड़कें, पुल, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाएँ शामिल हैं. उन्होंने घोषणा की कि चुराचांदपुर में नया मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा और 7,000 विस्थापित परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध कराए जाएँगे.

इसके बाद मोदी इंफाल पहुँचे, जहाँ उन्होंने लगभग 1,200 करोड़ रुपये की 17 योजनाओं का उद्घाटन किया. इसमें नया सिविल सचिवालय, आईटी स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन, राज्य पुलिस मुख्यालय और महिलाओं के लिए विशेष “इमा मार्केट” खुदरा केंद्र शामिल है. पीएम ने कहा कि यह बाज़ार स्थानीय उद्यमिता को नई ऊर्जा देगा और महिलाओं की आर्थिक भूमिका को मज़बूत करेगा.

मोदी ने अपने संबोधन में कनेक्टिविटी और विकास की प्रतिबद्धता को दोहराया. उन्होंने याद दिलाया कि 2014 में किए गए वादे के अनुसार सीमावर्ती राज्यों में संपर्क बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता रही है. उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार और पड़ोसी मिज़ोरम में बैराबी–सैरांग रेल लाइन की शुरुआत का ज़िक्र किया. पीएम ने कहा कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है और मणिपुर को भी राष्ट्र की गति के साथ कदम मिलाकर चलना होगा.

प्रधानमंत्री ने राहत शिविरों में ठहरे परिवारों से भी मुलाकात की और भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार “हर परिस्थिति में मणिपुर के साथ खड़ी है.” विपक्षी दलों ने उनकी यात्रा का स्वागत किया लेकिन साथ ही आलोचना भी की कि यह कदम बहुत देर से आया और अगर समय पर हस्तक्षेप होता तो कई जानें बचाई जा सकती थीं.

इस यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे. इंफाल और चुराचांदपुर दोनों जगहों पर केंद्रीय और राज्य बलों के 7,000 से अधिक जवान तैनात थे. संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू रही.

मोदी की यह मणिपुर यात्रा उनके 13–15 सितंबर के पूर्वोत्तर दौरे का हिस्सा है, जिसके तहत मिज़ोरम और असम में भी कुल मिलाकर 27,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएँ शुरू की गईं.

पृष्ठभूमि: कैसे भड़की हिंसा
मणिपुर की हिंसा की जड़ें लंबे समय से सामाजिक और जातीय तनाव में रही हैं. राज्य में मैतेई, जो मुख्य रूप से हिंदू और शहरी आबादी का बड़ा हिस्सा हैं, तथा कुकी और नागा जैसे आदिवासी समुदायों के बीच भूमि, पहचान और आरक्षण को लेकर विवाद चलता रहा है.
2023 में स्थिति तब बिगड़ी जब मैतेई समुदाय ने अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा माँगा, जिससे आदिवासी समूहों ने कड़ा विरोध किया. उनका कहना था कि यदि मैतेई को यह दर्जा मिल गया तो उनकी ज़मीन और अवसरों पर खतरा मंडराएगा. इस मांग ने आपसी अविश्वास को और गहरा किया और परिणामस्वरूप हिंसक झड़पें हुईं. गाँवों में आगजनी, हथियारों की लूट और सामूहिक पलायन ने हालात को विस्फोटक बना दिया.

प्रभावित लोगों की स्थिति
हिंसा के बाद हजारों परिवार अपने घर-बार छोड़ने को मजबूर हुए. कई महीनों तक राहत शिविरों में उनका जीवन कठिनाइयों से भरा रहा. राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को पर्याप्त भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और शिक्षा जैसी मूलभूत सेवाओं की कमी झेलनी पड़ी.
विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हुए. कई बच्चे अपनी पढ़ाई से वंचित हो गए, जबकि महिलाएँ रोजगार और सुरक्षा दोनों को लेकर चिंतित रहीं. मानसून के दौरान राहत शिविरों की हालत और बिगड़ गई जब बारिश और बीमारी ने मुश्किलें बढ़ा दीं. प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का एक बड़ा हिस्सा इन परिवारों से मिलकर उन्हें विश्वास दिलाना था कि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाएगा.

मोदी का संदेश और वादे
मोदी ने कहा, “आशा और विश्वास की एक नई सुबह उग रही है. हमें मिलकर आगे बढ़ना है, शांति और विकास दोनों का रास्ता यही है.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार न केवल विकास परियोजनाओं में निवेश करेगी बल्कि सामाजिक सौहार्द को बहाल करने में भी सक्रिय भूमिका निभाएगी.
उनकी ओर से घोषित 7,000 घरों की योजना विशेष रूप से उन लोगों को राहत देने के लिए है जिन्होंने हिंसा में अपना सब कुछ खो दिया. मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य परियोजनाएँ इस क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही चिकित्सा सुविधाओं की कमी को दूर करेंगी.

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
प्रधानमंत्री की यात्रा का स्वागत किया गया लेकिन विपक्ष ने तीखी आलोचना भी की. कांग्रेस नेताओं का कहना था कि यदि प्रधानमंत्री ने समय रहते मणिपुर का दौरा किया होता तो हालात इतने बिगड़ते नहीं. उनका आरोप था कि केंद्र सरकार ने हिंसा को नियंत्रित करने में ढिलाई बरती और देर से हस्तक्षेप किया.
दूसरी ओर, भाजपा ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि मोदी ने मणिपुर की जनता के साथ खड़े होने का स्पष्ट संदेश दिया है. राज्य की भाजपा सरकार ने भी इस दौरे को “नई शुरुआत” बताया और भरोसा दिलाया कि हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास और विकास में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी.

सामाजिक प्रभाव और जनता की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री की यात्रा ने आम जनता में आशा और संकोच दोनों जगाए. राहत शिविरों में रह रहे कई परिवारों ने कहा कि वे पहली बार महसूस कर रहे हैं कि उनकी आवाज़ दिल्ली तक पहुँची है. लेकिन कुछ लोग संशय में हैं कि क्या घोषित परियोजनाएँ ज़मीनी स्तर तक पहुँच पाएँगी.
स्थानीय बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों का कहना है कि विकास योजनाएं तभी सार्थक होंगी जब उनमें सभी समुदायों को समान रूप से भागीदार बनाया जाएगा. अगर केवल एक वर्ग को लाभ हुआ तो तनाव और गहराने की आशंका बनी रहेगी.

हिंसा के कारणों का गहरा विश्लेषण
मणिपुर की हिंसा केवल जातीय विवाद का परिणाम नहीं है बल्कि इसमें राजनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक तत्व भी शामिल हैं. म्यांमार की सीमा से लगे इस राज्य में लंबे समय से अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी होती रही है. इनसे उपजी आपराधिक गतिविधियाँ भी हिंसा को भड़काने में अहम रही हैं.
भूमि विवाद, विशेषकर “हिल” और “वैली” इलाकों के बीच, सामाजिक दूरी को और बढ़ाते हैं. आर्थिक अवसरों की असमानता भी तनाव को हवा देती है. मैतेई समुदाय शहरी और शिक्षा के क्षेत्र में अपेक्षाकृत आगे है जबकि कुकी और नागा समुदाय खुद को हाशिए पर मानते हैं. इस असमानता ने राजनीतिक माँगों को और कठोर बना दिया.

प्रधानमंत्री की यात्रा ने एक सकारात्मक माहौल तो बनाया है लेकिन शांति और स्थिरता लाने के लिए केवल आर्थिक पैकेज पर्याप्त नहीं होंगे. इसके लिए समुदायों के बीच भरोसे का माहौल बनाना ज़रूरी है. विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को स्थायी समाधान के लिए संवाद की प्रक्रिया को तेज करना होगा.
सामाजिक मेल-जोल को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम, शिक्षा और रोजगार के अवसरों में समान भागीदारी, और अवैध हथियारों पर सख्ती जैसे कदम उठाए जाने होंगे.

प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए. इंफाल और चुराचांदपुर दोनों जगहों पर 7,000 से अधिक सुरक्षा बल तैनात रहे. संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू रही ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके. यह सख़्ती बताती है कि हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं.

मोदी की मणिपुर यात्रा केवल विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भर नहीं थी, बल्कि यह एक प्रतीकात्मक संदेश भी था कि केंद्र सरकार इस संकटग्रस्त राज्य को लेकर गंभीर है. लेकिन वास्तविक चुनौती अब शुरू होती है—कि घोषित योजनाएँ कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी ढंग से ज़मीनी स्तर पर पहुँचती हैं.मणिपुर की जनता शांति चाहती है लेकिन उनके सामने प्रश्न यह है कि क्या उनके दर्द और संघर्ष को राजनीति से परे रखकर वास्तविक समाधान लाया जाएगा. यदि सरकार विकास और सामाजिक संतुलन दोनों पर बराबर ध्यान देती है तो यह दौरा मणिपुर की दिशा बदलने वाला साबित हो सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-