देवी कात्यायनी की पूजा का महत्व:-
माँ कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व है. खासकर अविवाहित कन्याओं के लिए. कहा जाता है कि जो कन्याएं माँ कात्यायनी की पूजा करती हैं, उनके शादी के योग जल्दी बनते हैं और विवाह के मार्ग में रुकावटें दूर होती हैं. इसके अलावा, देवी कात्यायनी की आराधना से भय, रोगों और जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है. उनकी पूजा से मानसिक शांति मिलती है और सभी बाधाओं का नाश होता है.
माँ कात्यायनी की पूजा से होने वाले लाभ:-
माँ कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व है. खासकर अविवाहित कन्याओं के लिए. कहा जाता है कि जो कन्याएं माँ कात्यायनी की पूजा करती हैं, उनके शादी के योग जल्दी बनते हैं और विवाह के मार्ग में रुकावटें दूर होती हैं. इसके अलावा, देवी कात्यायनी की आराधना से भय, रोगों और जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है. उनकी पूजा से मानसिक शांति मिलती है और सभी बाधाओं का नाश होता है.
मां कात्यायनी का स्वरूप:-
मां दुर्गा का यह स्वरूप अत्यंत दिव्य है. इनका रंग सोने के समान चमकीला है तो इनकी चार भुजाओं में से ऊपरी बाएं हाथ में तलवार और नीचले बाएं हाथ में कमल का फूल है. जबकि इनका ऊपर वाला दायां हाथ अभय मुद्रा में है और नीचे का दायां हाथ वरदमुद्रा में है.
इस विधान से इस नियम अनुसार करें मां कात्यायनी की पूजा:-
1. स्नान और संकल्प: प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और माँ कात्यायनी की पूजा करने का संकल्प लें.
2. मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें: पूजास्थल को गंगाजल से शुद्ध कर माँ कात्यायनी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
3. आवाहित करें: माँ को आसन देकर जल, अक्षत (चावल), पुष्प और रोली चढ़ाएं.
4. सिंदूर और वस्त्र अर्पित करें: माँ को लाल रंग प्रिय है. इसलिए उन्हें लाल रंग का वस्त्र अर्पित करें.
5. फूल-माला और प्रसाद अर्पण: देवी को गेंदा या गुलाब के फूल चढ़ाएं और गुड़ या शहद का भोग लगाएं.
6. धूप-दीप जलाएं: धूप, दीप जलाकर माँ की आरती करें और मंत्रों का जाप करें.
7. कथाओं का पाठ करें: माँ कात्यायनी से जुड़ी कथा पढ़ें या सुनें.
8. भोग वितरण करें: पूजा के बाद भक्तों में प्रसाद वितरित करें और व्रत का पारण करें.
मां कात्यायनी के मंत्र:-
बीज मंत्र: ॐ ह्रीं कात्यायन्यै स्वाहा.
कात्यायनी महामंत्र:- कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरी.
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः..
व्रत और उपवास नियम:-
व्रतधारी को पूरे दिन निराहार रहना चाहिए या फलाहार करना चाहिए.
सात्विक भोजन करें और तामसिक चीजों (लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा) से परहेज करें.
मन, वाणी और कर्म से शुद्ध रहें.
माँ कात्यायनी के मंत्रों का जाप करें.
कन्याओं को भोजन कराकर आशीर्वाद लें.
मां कात्यायनी की कृपा से मिलने वाले लाभ
विवाह में आ रही अड़चनों का समाधान होता है.
भय और नकारात्मकता दूर होती है.
रोगों से मुक्ति मिलती है.
कार्यों में सफलता मिलती है.
जीवन में सुख, समृद्धि और शक्ति प्राप्त होती है.
मां कात्यायनी की कथा:-
पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कात्यायन संतान की इच्छा से मां भगवती की कठोर तपस्या कर रहे थे. उनकी गहन साधना से प्रसन्न होकर देवी ने प्रकट होकर उन्हें वरदान दिया कि वह उनके घर पुत्री रूप में जन्म लेंगी. इसी कारण जब मां भगवती ने महर्षि कात्यायन के घर जन्म लिया तो वे कात्यायनी नाम से विख्यात हुईं.
इसी समय महिषासुर नामक दैत्य अपने अत्याचारों से तीनों लोकों को परेशान कर रहा था. देवता, मनुष्य और ऋषि सभी उसके आतंक से त्रस्त होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास पहुँचे. तब त्रिदेवों ने अपने-अपने तेज से देवी को उत्पन्न किया. यही देवी महर्षि कात्यायन के घर जन्मीं और कात्यायनी कहलाईं. महर्षि कात्यायन ने सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन देवी कात्यायनी की विधिपूर्वक पूजा की. इसके बाद दशमी के दिन देवी ने सिंह पर सवार होकर महिषासुर के साथ भीषण युद्ध किया और उसका वध कर दिया. इस प्रकार उन्होंने देवताओं और समस्त प्राणियों को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई.
मां कात्यायनी की यह कथा न केवल उनके साहस और शक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब भी धर्म पर संकट आता है, तब देवी अपने दिव्य स्वरूप से प्रकट होकर अधर्म का नाश करती हैं और भक्तों की रक्षा करती हैं. मान्यता है कि माँ कात्यायनी की पूजा से विवाह में आने वाली बाधाएँ दूर हो जाती हैं और कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है. उनकी उपासना से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है और जीवन में स्थिरता का आशीर्वाद मिलता है. यह भी माना जाता है कि माँ कात्यायनी की कृपा से साधक को साहस, आत्मविश्वास और जीवन की कठिनाइयों से उबरने की शक्ति मिलती है.
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Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

