1. मां सिद्धिदात्री का स्वरूप:-
मां सिद्धिदात्री का रंग उज्ज्वल और तेजस्वी है. वे कमल पर विराजमान होती हैं और उनके चार हाथों में चक्र, गदा, शंख और कमल शोभित होते हैं. उनका स्वरूप करुणामयी और भक्तों को कल्याण प्रदान करने वाला है.
2. मां सिद्धिदात्री की कथा:-
पुराणों के अनुसार, जब ब्रह्मांड की रचना प्रारंभ हुई तब भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की उपासना की. देवी ने उन्हें अर्धनारीश्वर रूप का आशीर्वाद दिया. तभी से मां सिद्धिदात्री को सभी सिद्धियों और शक्तियों की दात्री कहा जाता है.
3. मां सिद्धिदात्री का महत्व:-
मां सिद्धिदात्री की पूजा से भक्तों को अष्टसिद्धि और नव निधियों का आशीर्वाद मिलता है. वे साधकों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत हैं और उन्हें जीवन में सफलता और शांति प्रदान करती हैं.
4. पूजन विधि:-
नवरात्रि की नवमी के दिन प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें. मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं. उन्हें लाल और नीले पुष्प अर्पित करें. नारियल, धूप, धान और प्रसाद अर्पण करना शुभ माना जाता है. साथ ही दुर्गा सप्तशती या देवी माहात्म्य का पाठ करें.
माँ सिद्धिदात्री पूजा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त:-
5. पूजा तिथि:- 1 अक्टूबर 2025, बुधवार:-
6. अष्टमी और नवमी का संगम:- इस वर्ष अष्टमी 30 सितंबर को और नवमी 1 अक्टूबर को पड़ रही है. नवमी तिथि 30 सितंबर दोपहर 01 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर 1 अक्टूबर दोपहर 02 बजकर 24 मिनट तक रहेगी,, अतः नवमी तिथि के आधार पर माँ सिद्धिदात्री की पूजा 1 अक्टूबर को ही होगी.
7. पूजन मुहूर्त:- प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दिन में दोपहर 02 बजकर 24 मिनट तक है. शुभ समय में पूजा की जा सकती है.
नवमी पूजा की प्रक्रिया:-
8. स्नान और शुद्धिकरण
प्रातःकाल स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें.
9. मां सिद्धिदात्री की पूजा
मां सिद्धिदात्री की मूर्ति या चित्र को पूजा स्थल पर स्थापित करें.
पूजा सामग्री: लाल फूल, अक्षत, चंदन, धूप, दीप, शहद, नारियल, और मिठाई.
मंत्र जाप:-
“ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः” मंत्र का जाप करें.
मां को तिल और सफेद मिठाई का भोग अर्पित करें.
10. हवन विधि:-
नवरात्रि के अंतिम दिन हवन करना नकारात्मकता को दूर करने और देवी को प्रसन्न करने के लिए अनिवार्य माना जाता है.
हवन सामग्री:- आम की लकड़ी, गाय का घी, कपूर, जौ, चावल, तिल, और हवन कुंड.
हवन मंत्र:-
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः” का 108 बार जाप करें.
हवन समाप्ति पर हाथ जोड़कर देवी को अपनी प्रार्थना अर्पित करें.
11. कन्या पूजन और कन्या भोज
नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है.
कन्या पूजन की तैयारी:-
नौ कन्याओं को आमंत्रित करें.
उनके पैर धोकर उनका आदर करें.
प्रत्येक कन्या को रोली, चावल लगाएं और उन्हें फूलों की माला पहनाएं.
भोजन में क्या परोसें:-
उन्हें पूरी, हलवा, चने और मिठाई खिलाएं.
भोजन के बाद दक्षिणा और उपहार भेंट करें.
कन्याओं को विदा करते समय चरण स्पर्श करें और उनका आशीर्वाद लें.
12. सिद्धि:- आध्यात्मिक और अलौकिक शक्तियाँ:-
दात्री:- दान करने वाली
माँ सिद्धिदात्री को सभी आठ सिद्धियों (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व) की देवी माना गया है. पुराणों में वर्णित है कि भगवान शिव ने इन्हीं की कृपा से अर्धनारीश्वर रूप धारण किया था.
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Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

