जबलपुर. एमपी की राजधानी भोपाल के बजरिया में रहने वाली एक युवती 10 महीने पहले अचानक ही घर से लापता हो गई. परिवार वालों ने उसे काफी तलाश कियाए पर जब वह नहीं मिली तो पिता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका हाईकोर्ट में दायर की. इसके बाद पुलिस ने युवती को तलाश करना शुरू किया तो वह इंदौर की एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हुए मिली. हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने युवती को जब पेश किया तो उसने बताया कि वह आईएएस बनना चाहती है, जिसकी तैयारी कर रही है. पिता ने शादी का दबाव बनाया था.
युवती ने बताया कि वह भोपाल के बजरिया क्षेत्र की रहने वाली है. पिता द्वारा 12वीं के बाद पढ़ाई रोक दी गई थी और उसके ऊपर शादी का भी दबाव डाला जा रहा थाए जिस वजह से उसने घर छोड़ दिया था. युवती ने बताया कि किराए के एक कमरे में रहते हुए एक निजी कंपनी में नौकरी कर रही हूं और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी कर रही हूं. हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने युवती को पेश किया था और फिर कोर्ट के सामने युवती ने अपनी आपबीती सुनाई.
युवती ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को बताया कि उसके पिता उसे 12वीं के बाद आगे नहीं पढऩे देना चाहते थेए जिस वजह से उसने घर छोड़ दिया था. युवती ने हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि वह पिता के साथ नहीं जाना चाहती. पिता ने कोर्ट के सामने ही प्रताडि़त न करने का भरोसा देते हुए घर भेजने का आग्रह किया. मामले पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली कोर्ट ने युवती से कहा कि वह 4 से 5 दिन पिता के साथ रहे. अगर सब कुछ ठीक रहता है तो ठीक है, नहीं तो पढ़ाई और रहने की व्यवस्था प्रशासन करवाएगा. अगली सुनवाई अब 12 नवंबर को होगी.
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