भोपाल. मध्य प्रदेश में अब वाहन चालकों को 'हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट' (HSRP) के नियमों का उल्लंघन करना भारी पड़ने वाला है. राज्य सरकार ने परिवहन विभाग के साथ मिलकर एक सख्त और नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर ली है, जिसके तहत यदि किसी वाहन पर HSRP नहीं लगी पाई गई, तो उसका मोटा चालान सीधे मालिक के घर भेजा जाएगा. यह व्यवस्था जल्द ही पूरे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू होने जा रही है, जिसने उन लाखों वाहन मालिकों में हड़कंप मचा दिया है, जिन्होंने अभी तक इस अनिवार्य नियम को गंभीरता से नहीं लिया है.
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित इस नियम को मध्य प्रदेश में सख्ती से लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य वाहनों की सुरक्षा, चोरी पर नियंत्रण और एक केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार करना है. हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट न केवल वाहन की पहचान को सुरक्षित करती है, बल्कि इसमें लगा एक विशेष 'होलोग्राम' और 'पिन' नंबर यह सुनिश्चित करता है कि नंबर प्लेट बदली न जा सके या नकली न हो. इसके बिना चलने वाले वाहन अब सीधे तौर पर परिवहन विभाग की रडार पर होंगे.
नई व्यवस्था के तहत, प्रदेश के विभिन्न शहरों और प्रमुख सड़कों पर लगे इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के अत्याधुनिक कैमरे और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का उपयोग किया जाएगा. ये कैमरे हर गुजरते वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे. चूंकि HSRP प्लेट्स में विशेष फॉन्ट और निर्धारित प्रारूप होता है, गैर-HSRP या पुरानी स्टाइल की नंबर प्लेट्स को यह सिस्टम तुरंत पहचान लेगा. जैसे ही सिस्टम ऐसी किसी प्लेट को पकड़ेगा, वह वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर मालिक का डेटा परिवहन विभाग के डेटाबेस से निकालेगा और चालान जनरेट कर देगा. यह चालान सीधे वाहन मालिक के पंजीकृत पते पर भेज दिया जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे ओवर-स्पीडिंग के मामलों में होता है.
परिवहन विभाग के सूत्रों के अनुसार, शुरुआती चरण में इस नियम की अनदेखी करने वालों पर ₹5000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जो बार-बार उल्लंघन करने पर बढ़ भी सकता है. सरकार का यह कदम केवल राजस्व इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि प्रदेश की सड़कों पर चलने वाले हर वाहन को कानूनी दायरे में लाना है. यह देखा गया है कि वाहन चोरी करने वाले अक्सर सबसे पहले नंबर प्लेट बदल देते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है. HSRP के अनिवार्य होने से इस तरह की आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगेगी.
हालांकि, इस नई व्यवस्था को लेकर आम लोगों में कुछ चिंताएं भी हैं. कई वाहन मालिकों का कहना है कि HSRP लगवाने की प्रक्रिया अभी भी उतनी सरल नहीं है जितनी होनी चाहिए. डीलरों के पास लंबी वेटिंग लिस्ट है, और ऑनलाइन बुकिंग की प्रक्रिया में कई बार तकनीकी खामियां आ रही हैं. विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे कस्बों के लोगों के लिए, जिन्हें HSRP लगवाने के लिए जिला मुख्यालयों तक की यात्रा करनी पड़ती है, यह एक बड़ी चुनौती है. यदि सरकार चालान की प्रक्रिया को सख्त कर रही है, तो उसे पहले HSRP की उपलब्धता और उसे लगवाने की प्रक्रिया को भी उतना ही सुगम और तीव्र बनाना होगा.
परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि दोपहिया, तिपहिया, चार पहिया और व्यावसायिक वाहनों सहित सभी प्रकार के वाहनों के लिए HSRP अनिवार्य है. विभाग ने जनता से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और जल्द से जल्द अधिकृत डीलरों या परिवहन कार्यालय की वेबसाइट के माध्यम से अपनी नंबर प्लेट बुक कराएं. विभाग का कहना है कि जागरूकता अभियान पहले ही पर्याप्त समय तक चलाया जा चुका है, और अब नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा.
यह निर्णय मध्य प्रदेश को देश के उन राज्यों की श्रेणी में खड़ा करेगा जो डिजिटल ट्रैफिक प्रवर्तन (Digital Traffic Enforcement) में अग्रणी हैं. ANPR और ITMS का यह गठजोड़ न केवल नंबर प्लेट के नियमों का पालन कराएगा, बल्कि टोल कलेक्शन, पार्किंग प्रबंधन और सड़क सुरक्षा के अन्य पहलुओं में भी सुधार लाएगा. लेकिन इस पूरे अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि परिवहन विभाग HSRP लगाने की प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को कितनी जल्दी दूर करता है, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के वाहन मालिकों को अनावश्यक रूप से जुर्माने का सामना न करना पड़े. चालान घर पहुंचने की यह नई व्यवस्था जल्द ही प्रदेश की सड़कों पर एक बड़ा बदलाव लाएगी और नियम तोड़ने वालों पर डिजिटल चाबुक बनकर बरसेगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

