वोटर लिस्ट से नाम कटे तो किचन औजारों से लड़ें ममता बनर्जी की महिलाओं को अपील

वोटर लिस्ट से नाम कटे तो किचन औजारों से लड़ें ममता बनर्जी की महिलाओं को अपील

प्रेषित समय :21:39:45 PM / Thu, Dec 11th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और महिलाओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों के लिए खड़ी हों। उन्होंने कहा कि अगर वोटर लिस्ट से उनके नाम हटाए जाते हैं, तो वे अपने किचन के औजारों से लड़ें और अपने अधिकारों की रक्षा करें। बनर्जी का यह बयान चुनाव आयोग द्वारा उत्तर प्रदेश समेत छह राज्यों में SIR की समयसीमा बढ़ाने की घोषणा के बीच आया है।

कृष्णानगर में आयोजित एक जनसभा में ममता बनर्जी ने कहा कि SIR का इस्तेमाल महिलाओं के अधिकार छीनने और उन्हें डराने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असम में SIR क्यों नहीं हो रहा, क्या इसका कारण यह है कि वह BJP शासित राज्य है? बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की मंशा चुनाव के दौरान महिलाओं को डराकर उनका वोट प्रभावित करना है और इसके लिए दिल्ली पुलिस की मदद ली जा रही है।

सीएम ने सीधे महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा, "अगर आपके नाम काटे जाते हैं, तो आपके घर में औजार हैं ना? जिनका इस्तेमाल आप खाना बनाने के लिए करती हैं? क्या आप में हिम्मत है? अगर वे आपके नाम काटते हैं, तो आप उन्हें जाने नहीं देंगी। महिलाएं इस लड़ाई में आगे रहेंगी और पुरुष उनके पीछे खड़े रहेंगे। मैं देखना चाहती हूं कि हमारी महिलाओं की ताकत BJP से बड़ी है या नहीं।"

ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी तीखा हमला किया और उन्हें 'खतरनाक' बताते हुए कहा कि उनकी आंखों में 'दुर्योधन' और 'दु:शासन' नजर आते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वोटर लिस्ट के SIR के दौरान एक भी योग्य मतदाता का नाम हटाया गया, तो वह खुद धरना देंगी।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले SIR का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "अगर एक भी योग्य मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया, तो मैं धरना दूंगी। पश्चिम बंगाल में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं बनेगा। केंद्र सरकार वोटों के भूखे हैं और चुनाव से ठीक दो महीने पहले SIR करवा रही है।"

ममता बनर्जी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि देश का गृह मंत्री बंगालियों को बांग्लादेशी साबित करके उन्हें डिटेंशन सेंटर में भेजने की धमकी दे रहा है। उन्होंने कहा, "हम किसी को भी पश्चिम बंगाल से बाहर नहीं निकालने देंगे। अगर किसी को जबरन निकाला जाता है, तो उसे वापस लाने का तरीका हम जानते हैं।"

सीएम ने यह भी आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए भाजपा से जुड़े अधिकारियों को राज्य में तैनात कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में स्थिति पर नजर रखने के लिए दिल्ली से भाजपा समर्थित कुछ लोग भेजे गए हैं और वे SIR की सुनवाई के दौरान जिला मजिस्ट्रेटों के काम की निगरानी कर रहे हैं।

ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा कि वे सांप्रदायिक राजनीति में विश्वास नहीं करतीं। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा सेक्युलर राजनीति करती हूं। चुनावों में भाजपा पैसे का इस्तेमाल करके और दूसरे राज्यों से लोगों को लाकर वोटों को बांटने की कोशिश करती है।"

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ममता बनर्जी का यह बयान SIR के विरोध को लेकर महिलाओं को जागरूक करने और उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में है। SIR, यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, वोटर लिस्ट में बदलाव का एक महत्वपूर्ण उपाय है, लेकिन विपक्षी दल इसे चुनाव में राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगा रहे हैं।

बंगाल में SIR के दौरान नाम कटने या वंचित होने की आशंका को लेकर महिलाओं में भारी चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है। इस मुद्दे पर बनर्जी का रुख स्पष्ट है कि वह किसी भी स्थिति में बंगालियों के अधिकारों की रक्षा करेंगी और केंद्र सरकार की किसी भी नीति को राज्यवासियों के खिलाफ नहीं चलने देंगी।

चुनाव आयोग ने हाल ही में उत्तर प्रदेश समेत छह राज्यों में SIR की समयसीमा बढ़ाई है, लेकिन ममता ने इसे भाजपा और केंद्र की रणनीति का हिस्सा बताते हुए इसे 'मतदाता अधिकारों पर हमला' बताया। उन्होंने कहा कि SIR का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ प्राप्त करना नहीं, बल्कि इसे चुनाव के दौरान मतदाताओं को डराने और उनकी आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है।

ममता बनर्जी के इस बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों को और गरम कर दिया है। उन्होंने महिलाओं को सक्रिय रूप से इस लड़ाई में शामिल होने की अपील की और कहा कि महिलाओं की शक्ति ही इस लड़ाई की कुंजी है। उनके इस सशक्त संदेश ने राज्य की जनता और विपक्षी दलों में बहस को और तेज कर दिया है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, ममता का यह कदम महिलाओं को सशक्त करने के साथ-साथ केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम हटने पर वह व्यक्तिगत रूप से धरना देंगी और वोटर लिस्ट के प्रति जनता की जागरूकता बढ़ाएंगी।

पश्चिम बंगाल की महिलाओं में अब इस अपील को लेकर उत्सुकता और सक्रियता देखी जा रही है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ममता बनर्जी का यह संदेश केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का प्रतीक बनता जा रहा है।

इस बीच, SIR की प्रक्रिया और वोटर लिस्ट में बदलाव की निगरानी पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो गए हैं और केंद्र की नीति के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी राजनीतिक दबाव या धमकी के सामने नहीं झुकेंगी और पश्चिम बंगाल की जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ SIR के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र और महिला सशक्तिकरण के लिए भी है।

इस प्रकार ममता बनर्जी का बयान SIR और वोटर लिस्ट के मुद्दे को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और महिला सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित बन गया है। यह कहना गलत नहीं होगा कि पश्चिम बंगाल में इस अपील का प्रभाव चुनावी राजनीति और मतदाता जागरूकता दोनों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

कुल मिलाकर ममता बनर्जी ने महिलाओं को सक्रिय होकर अपने अधिकारों के लिए खड़े होने और SIR के खिलाफ विरोध करने की अपील की है। उनके इस संदेश ने राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को नई दिशा दी है और यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता अधिकारों की रक्षा उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-