जबलपुर. जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे लोगों को अविलंब ब्लड की जरूरत होती है, लेकिन पमरे के जबलपुर रेल मंडल के कोचिंग डिपो अधिकारी के फरमान से रक्तदाता रेल कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया है, जिसमें कहा गया है कि जिस किसी कर्मचारी को ब्लड डोनेट करना है, उसे इसके लिए पूर्व अनुमति लेना होगा. सीडीओ के इस फरमान से वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन (डबलूसीआरईयू) भड़क गई है, उसने डीआरएम को पत्र लिखकर गंभीर आपत्ति जताई है.
इस संबंध में यूनियन के मंडल सचिव का. रोमेश मिश्रा ने डीआरएम को पत्र लिखकर कहा है कि कोचिंग डिपो अधिकारी जबलपुर द्वारा उक्त संदर्भित पत्र स्टाफ के नाम जारी कर गंभीर मरीजो की जीवनरक्षा हेतु किये जाने वाले रक्तदान पर अंकुश लगाने की मंशा से यह निर्देशित किया है कि रक्तदान करने के पूर्व कर्मचारियों को उनका अपरूवल लेना आवश्यक है.
केंद्र सरकार की नीति के खिलाफ
यूनियन ने कहा है कि तरफ भारत सरकार/ स्वास्थ्य विभाग एवं सामाजिक संगठन रक्तदान करने लोगों को निरन्तर जागरूक कर रहे हैं. उन्हें पुरस्कृत किया जा रहा है. प्रशस्ति पत्र प्रदान किये जा रहे है. वहीं सी.डी.ओ. जबलपुर इस तरह की जन विरोधी मानसिकता वाला तुगलकी फरमान जारी कर रक्तदाताओं को हतोत्साहित करने का प्रयास कर रहे हैं. गंभीर मरीजों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं. ऐसा आदेश भारत सरकार की जनहितकारी/ गंभीर रोगियों की जीवनरक्षा संबंधी दिशा निर्देशों/ मंशा के विपरीत है. गंभीर रोगियों को रक्त की तत्काल आवश्यकता होती है. अत कभी-कभी रात्रि में भी रक्तदाता रकादान नहीं कर सकेंगे तथा गंभीर मरीजों को जान से हाथ धोना पड़ेगा. कई बार प्रशासनिक अधिकारियों एवं उनके परिजनों को अचानक रक्त की आवश्यकता पड़ी है. जिसे रेल कर्मचारियों ने तत्काल रक्तदान करके पूरा किया है.
डीआरएम से की ये अपील
यूनियन ने डीआरएम से अनुरोध किया है कि रक्तदान हेतु इस तरह की बाध्यता / व्यवधान पूरे देश कहीं भी लागू नहीं है. अत सीडीओ जबलपुर को निर्देशित कर इस तरह का बेतुका/औचित्यहीन, अनावश्यक निर्देश सत्काल निरस्त कराया जाये. ताकि गंभीर मरीजो की जीवनरक्षा हेतु कर्मचारी स्वेच्छा से रक्तदान कर सके. अन्यथा उनके इस जन कल्याण विरोधी आदेश को निरस्त कराने के लिए यूनियन आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

