बांसवाड़ा में जुटेगा शिक्षकों का महाकुंभ, शिक्षा और शिक्षक हितों पर होगा बड़ा मंथन

बांसवाड़ा में जुटेगा शिक्षकों का महाकुंभ, शिक्षा और शिक्षक हितों पर होगा बड़ा मंथन

प्रेषित समय :19:09:29 PM / Thu, Dec 18th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बांसवाड़ा (व्हाट्सएप -  6367472963) प्रदेश के शिक्षा जगत की धड़कन अगले दो दिनों तक वागड़ अंचल में सुनाई देगी, जब राजस्थान के सबसे बड़े शिक्षक संगठन राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) का दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन 19 दिसंबर से लियो संस्थान, डांगपाड़ा, बांसवाड़ा में आरंभ होगा। सम्मेलन को लेकर जिले में उत्साह का माहौल है और आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रदेश भर से हजारों शिक्षक इस सम्मेलन में भाग लेने बांसवाड़ा पहुंचेंगे, जिससे यह आयोजन एक बड़े शैक्षिक महाकुंभ का रूप लेगा।

सम्मेलन से पहले लियो संस्थान परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमेशचन्द्र पुष्करणा ने बताया कि राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) प्रदेश का सबसे बड़ा शिक्षक संगठन है, जो अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से संबद्ध है। संगठन की सदस्य संख्या लगभग दो लाख सत्तर हजार है और यह संगठन शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थी—तीनों के हितों को साथ लेकर निरंतर कार्य करता रहा है। उन्होंने बताया कि 19 और 20 दिसंबर 2025 को होने वाला यह शैक्षिक सम्मेलन केवल औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि इसमें शिक्षा व्यवस्था के सुधार और शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं पर गंभीर विमर्श किया जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि सम्मेलन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी, महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी महाराज, बेणेश्वर धाम के महंत अच्युतानंद महाराज, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता, राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, आरएसएस के क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य हनुमान सिंह राठौड़ और प्रांत कार्यवाह शंकरलाल माली जैसे विशिष्ट अतिथियों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इन प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति ने सम्मेलन की गरिमा और महत्व को और बढ़ा दिया है।

प्रेस वार्ता में बताया गया कि सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए विस्तृत कार्यक्रम तय किया गया है। पूरे दिन अलग-अलग बैठकें होंगी, जिनमें शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शिक्षकों से सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। प्राप्त सुझावों को प्रस्तावों के रूप में राज्य सरकार के समक्ष रखा जाएगा। दूसरे दिन खुला सत्र आयोजित होगा, जिसमें प्रदेश भर से आए शिक्षक अपनी समस्याएं और अनुभव साझा करेंगे तथा कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए जाएंगे।

शिक्षक संघ की प्राथमिक मांगों पर प्रकाश डालते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सबसे पहले शिक्षकों के स्थानांतरण पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाने की मांग की जाएगी। प्रतिबंध हटते ही सभी संवर्गों में स्थानांतरण किए जाएं, ताकि वर्षों से एक ही स्थान पर जमे शिक्षकों को राहत मिल सके। इसके साथ ही पदोन्नति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन की मांग है कि अप्रैल 2026 तक शून्य लंबित पदोन्नति का लक्ष्य रखा जाए और सभी लंबित पदोन्नतियों को पूरा किया जाए, जिससे शिक्षकों की कार्यक्षमता और मनोबल में वृद्धि हो।

ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए संगठन ग्रामीण भत्ता दिए जाने की मांग भी उठाएगा। संगठन का मानना है कि शहरी भत्ते की तर्ज पर ग्रामीण भत्ता मिलने से शिक्षक दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों में सेवा देने के लिए अधिक प्रेरित होंगे। इसके अलावा प्रदेश में कार्यरत लगभग 35 हजार संविदा शिक्षकों के नियमितीकरण की मांग भी सम्मेलन में प्रमुखता से रखी जाएगी। पंचायत सहायक, शिक्षाकर्मी और पेरा टीचर जैसे विभिन्न नामों से कार्यरत इन शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ठोस निर्णय की आवश्यकता बताई गई।

वेतन विसंगति का मुद्दा भी सम्मेलन में अहम रहेगा। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि 2005 से 2010 के बीच नियुक्त प्रबोधकों के वेतन निर्धारण में हुई एक तकनीकी त्रुटि के कारण उन्हें आज तक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। छठे वेतन आयोग में उनका वेतन 11,170 के बजाय 12,900 पर फिक्स होना था, जिसे अब तक संशोधित नहीं किया गया है। इस विसंगति को दूर करने के लिए सरकार से विशेष आग्रह किया जाएगा।

प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने कहा कि यह अधिवेशन केवल शिक्षकों की मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, समाज और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर भी केंद्रित रहेगा। उन्होंने कहा कि संगठन शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच के साथ काम करता है और कई समस्याओं का समाधान सरकार से संवाद के माध्यम से पहले ही कराया जा चुका है। जो समस्याएं अभी शेष हैं, उन्हें भी इस मंच के माध्यम से सरकार के समक्ष रखा जाएगा।

सम्मेलन के संयोजक डॉ. ऋषिन चौबीसा ने बताया कि बांसवाड़ा संभाग के बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों के शिक्षकों और कार्यकर्ताओं ने मिलकर आयोजन की व्यापक तैयारियां की हैं। अधिवेशन स्थल पर दस हजार से अधिक शिक्षकों के बैठने की व्यवस्था की गई है। दूर-दराज से आने वाले शिक्षकों के लिए आवास और भोजन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने टीएसपी क्षेत्र के सभी शिक्षकों से इस दो दिवसीय सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया।

आयोजन के लिए व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर ली गई हैं और प्रदेश भर से आने वाले हजारों शिक्षकों में भारी उत्साह है। प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश से योगेश कुमार, प्रदेश मंत्री अमरजीत सिंह, सह संयोजक दिनेश मईडा, प्रदेश उपाध्यक्ष बांसवाड़ा संभाग देवीलाल पाटीदार, संभाग संगठन मंत्री दिलीप पाठक, आशीष उपाध्याय, जयदीप पाटीदार, प्रवीण जैन, बलवंत बामणिया,मोहनलाल शर्मा, रमेशचन्द्र पाटीदार, जनक भट्ट, कमलसिंह सोलंकी, शंकरलाल कटारा, देवीलाल निनामा आदि उपस्थित रहे।बांसवाड़ा में होने जा रहा यह शैक्षिक सम्मेलन शिक्षक हितों, शिक्षा नीति और शैक्षिक उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, जिस पर अब पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-