देवघर में संगठित साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ और छह शातिर अपराधी गिरफ्तार

देवघर में संगठित साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ और छह शातिर अपराधी गिरफ्तार

प्रेषित समय :21:37:46 PM / Sat, Dec 20th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अनिल मिश्र/रांची 

झारखंड के देवघर जिले से शनिवार को साइबर अपराध के विरुद्ध पुलिस को एक ऐसी बड़ी कामयाबी मिली है जिसने डिजिटल ठगी करने वाले गिरोहों के बीच हड़कंप मचा दिया है। देवघर जिला मुख्यालय स्थित साइबर थाना पुलिस ने एक गुप्त और सटीक सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए संगठित तरीके से लोगों को चूना लगाने वाले छह शातिर साइबर अपराधियों को रंगे हाथों दबोच लिया है। जैसे ही यह खबर क्षेत्र में फैली, आम जनता के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता बढ़ गई कि आखिर ये अपराधी किस आधुनिक तरीके से ठगी को अंजाम दे रहे थे और इनके पास से क्या-क्या आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इजहार आलम, परवेज अंसारी, सफाउल अंसारी, रमजान मियां उर्फ गुड्डू, खुर्शीद अंसारी और हिमांशु कुमार दास के रूप में हुई है। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने साइबर अपराधियों के उस सुरक्षित ठिकाने को ध्वस्त कर दिया है जहाँ से वे देशभर के निर्दोष लोगों के बैंक खातों में सेंध लगा रहे थे।

इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी देते हुए देवघर पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार ने बताया कि पुलिस को पुख्ता इनपुट मिला था कि पालोजोरी थाना क्षेत्र के तुरी पहाड़ी स्थित बड़ा चट्टान के पास कुछ अपराधी सक्रिय हैं और किसी बड़ी ठगी की साजिश रच रहे हैं। सूचना मिलते ही साइबर थाना देवघर की एक विशेष टीम गठित की गई जिसने बिना समय गंवाए पहाड़ी क्षेत्र की घेराबंदी कर दी। अचानक हुई इस छापेमारी से अपराधियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस ने इनके पास से आठ मोबाइल फोन और ग्यारह सिम कार्ड बरामद किए हैं, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात एक प्रतिबंधित सिम कार्ड की बरामदगी है। इस प्रतिबंधित सिम कार्ड ने पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों की जिज्ञासा बढ़ा दी है, क्योंकि इसके जरिए अपराधी संभवतः अंतरराष्ट्रीय स्तर पर या कानून की नजरों से बचकर कॉल करने की कोशिश कर रहे थे।

सोशल मीडिया और स्थानीय हलकों में इस गिरफ्तारी को लेकर जबरदस्त चर्चा है, क्योंकि देवघर और आसपास के इलाके लंबे समय से साइबर अपराध के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि क्या ये अपराधी केवल स्थानीय स्तर पर काम कर रहे थे या इनका नेटवर्क दूसरे राज्यों तक भी फैला हुआ है। पुलिस अधीक्षक के अनुसार, पकड़े गए अपराधी शातिर तरीके से संगठित होकर काम कर रहे थे, जहाँ हर सदस्य की अपनी एक विशेष भूमिका थी। बरामद मोबाइल फोनों से कई महत्वपूर्ण डेटा और बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारियां मिलने की उम्मीद है, जिससे आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। पुलिस अब इन अपराधियों से विस्तृत पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और ठगी की गई राशि को कहाँ निवेश किया गया है।

यह सफलता देवघर पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि पहाड़ी इलाकों का फायदा उठाकर अक्सर ये अपराधी पुलिस की पहुंच से दूर रहने की कोशिश करते हैं। इस कार्रवाई के बाद पालोजोरी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। जनता के बीच इस बात को लेकर राहत है कि पुलिस अब तकनीक और सूचना तंत्र के जरिए इन डिजिटल लुटेरों तक पहुँच रही है। अब सबकी निगाहें पुलिस की विस्तृत जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या इस गिरोह के पीछे कोई बड़ा सरगना भी शामिल है जो परदे के पीछे से इस पूरे सिंडिकेट को चला रहा है।

देवघर और झारखंड के अन्य 'साइबर हब' से गिरफ्तार अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले ठगी के तरीके बेहद शातिर और तकनीकी रूप से भ्रमित करने वाले होते हैं। पुलिस जांच और साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ये ठग मुख्य रूप से मनोवैज्ञानिक दबाव और लालच का सहारा लेते हैं। नीचे उनके प्रमुख तरीकों और पुलिस द्वारा जारी सुरक्षा अलर्ट का विस्तृत विवरण दिया गया है:

साइबर ठगों के प्रमुख 'मोडस ऑपरेंडी' 

फेक कस्टमर केयर और हेल्पलाइन: अपराधी गूगल सर्च इंजन पर विभिन्न बैंकों, ई-कॉमर्स कंपनियों (जैसे Amazon, Flipkart) या कूरियर सेवाओं के फर्जी नंबर डाल देते हैं। जब कोई व्यक्ति समस्या समाधान के लिए इन नंबरों पर कॉल करता है, तो ये ठग खुद को अधिकारी बताकर उनसे AnyDesk या TeamViewer जैसे रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाते हैं और पूरे फोन का कंट्रोल लेकर खाता खाली कर देते हैं।

  • बिजली बिल और केवाईसी (KYC) अपडेट: ठग लोगों को मैसेज भेजते हैं कि "आपका बिजली बिल जमा नहीं होने के कारण आज रात कनेक्शन काट दिया जाएगा।" डर के मारे लोग दिए गए नंबर पर कॉल करते हैं, जहाँ उनसे एक छोटा सा रिचार्ज (जैसे 10 रुपये) करने को कहा जाता है और लिंक के जरिए उनकी बैंकिंग डिटेल चुरा ली जाती है। यही तरीका बैंक केवाईसी अपडेट के नाम पर भी अपनाया जाता है।

  • प्रतिबंधित और 'बर्निंग' सिम कार्ड का उपयोग: जैसा कि देवघर की हालिया घटना में प्रतिबंधित सिम कार्ड मिला है, ये अपराधी अक्सर फर्जी आईडी पर लिए गए सिम का उपयोग करते हैं। ये सिम कार्ड कुछ ही दिनों में फेंक दिए जाते हैं (बर्निंग सिम), जिससे पुलिस के लिए इनका लोकेशन ट्रैक करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

  • इनाम और लॉटरी का लालच (KBC/WhatsApp Scam): व्हाट्सएप पर ऑडियो मैसेज या वीडियो कॉल के जरिए बताया जाता है कि आपने 25 लाख की लॉटरी जीती है। फिर 'फाइल चार्ज' या 'जीएसटी' के नाम पर किश्तों में लाखों रुपये ठग लिए जाते हैं।

  • सोशल इंजीनियरिंग और हनीट्रैप: युवाओं को निशाना बनाने के लिए अपराधी फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल (अक्सर महिला के नाम से) बनाकर दोस्ती करते हैं और फिर वीडियो कॉल रिकॉर्ड कर ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू करते हैं।


पुलिस द्वारा जारी सुरक्षा अलर्ट और सावधानियां

झारखंड पुलिस और साइबर सेल ने आम जनता के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं:

  • अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें: यदि कोई आपको मैसेज में लिंक भेजकर दावा करे कि आपकी लॉटरी लगी है या खाता बंद होने वाला है, तो उस पर क्लिक न करें। आधिकारिक वेबसाइट या बैंक शाखा में जाकर ही पुष्टि करें।

  • रिमोट एक्सेस ऐप्स से बचें: कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने फोन में AnyDesk, ScreenShare या QuickSupport जैसे ऐप इंस्टॉल न करें। बैंक कभी भी ऐसे ऐप्स डाउनलोड करने को नहीं कहता।

  • UPI पिन केवल पैसे भेजने के लिए: याद रखें, पैसे प्राप्त (Receive) करने के लिए कभी भी पिन (PIN) डालने या क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होती। अगर कोई आपसे पैसे देने के लिए पिन मांग रहा है, तो वह ठग है।

  • गूगल सर्च पर अंधविश्वास न करें: बैंकों या टोल फ्री नंबरों को केवल उनकी आधिकारिक वेबसाइट (जो https:// से शुरू हो) से ही लें। गूगल मैप्स पर दिए गए नंबर अक्सर ठगों द्वारा बदले हुए होते हैं।

ठगी होने पर क्या करें?

अगर आप या आपका कोई परिचित साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो समय बहुत कीमती होता है। पुलिस ने 'गोल्डन आवर' (पहले 2 घंटे) के भीतर कार्रवाई की सलाह दी है:

  1. तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।

  2. पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें।

  3. अपने बैंक को तुरंत सूचित कर खाते और कार्ड को ब्लॉक करवाएं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-