उत्तर भारत के विशाल मैदानी इलाकों में शनिवार 20 दिसंबर की सुबह जब सूरज की पहली किरण निकलने की उम्मीद थी, तब समूचा क्षेत्र सफेद कोहरे की एक अभेद्य चादर में लिपटा हुआ था. इस मौसम के सबसे भीषण कोहरे ने न केवल दृश्यता को शून्य के करीब पहुंचा दिया, बल्कि भारतीय रेलवे की रफ्तार को भी बुरी तरह पंगु बना दिया है. विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली रेल सेवाओं पर इसका सीधा प्रहार हुआ है, जहां प्रीमियम श्रेणी की ट्रेनें जैसे राजधानी, मगध और संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस अपनी निर्धारित समय सारणी से 5 से 10 घंटे की भारी देरी से चल रही हैं. रेलवे स्टेशनों पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण और अफरा-तफरी भरी बनी हुई है क्योंकि हजारों की संख्या में यात्री कड़ाके की ठंड के बीच प्लेटफार्मों पर अपनी ट्रेनों का इंतजार करने को मजबूर हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर, जिसे अब एक्स (X) के नाम से जाना जाता है, पर यात्रियों का गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा है, जहां लोग रेलवे की तकनीकी तैयारियों और फॉग डिवाइस की सार्थकता पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं.
जैसे-जैसे कोहरे की तीव्रता बढ़ी, रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए लोको पायलटों के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल और 'फॉग डिवाइस' के अनिवार्य उपयोग के निर्देश जारी किए हैं. हालांकि, इन तकनीकों के बावजूद रेलगाड़ियों की औसत गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक सिमट गई है, क्योंकि पटरियों पर सामने का दृश्य लगभग अदृश्य हो चुका है. जनता के बीच इस बात को लेकर गहरी जिज्ञासा और चिंता है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च कर विकसित किए गए फॉग सेफ्टी डिवाइस ऐसी परिस्थितियों में कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं. नई दिल्ली और आनंद विहार जैसे बड़े स्टेशनों पर लंबी दूरी की ट्रेनों के रद्दीकरण और पुनर्निर्धारण (Rescheduling) की घोषणाओं ने यात्रियों की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं. कई लोग सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा कर रहे हैं कि कैसे वे घंटों तक स्टेशन की बेंचों पर बैठे रहे, लेकिन अंत में उनकी ट्रेन रद्द कर दी गई. उत्तर भारत के स्टेशनों पर वेटिंग रूम खचाखच भरे हुए हैं और प्लेटफॉर्मों पर अलाव जलाकर यात्री खुद को ठंड से बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं.
इस मौसमी आपदा ने भारतीय रेलवे के परिचालन तंत्र की सीमाओं को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है. रेल गलियारों में इस बात की चर्चा गरम है कि आधुनिक तकनीक और बुलेट ट्रेन के सपनों के बीच हर साल आने वाला यह कोहरा हमारी मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त क्यों कर देता है. यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत सूचना तंत्र को लेकर है, जहां 'नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम' पर अपडेट होने वाली जानकारी और स्टेशन पर दी जा रही घोषणाओं में अंतर देखने को मिल रहा है. लोगों में इस बात को लेकर उत्सुकता बनी हुई है कि क्या रेलवे आगामी कुछ दिनों के लिए और भी ट्रेनों को रद्द करने की योजना बना रहा है. ट्विटर पर #RailDelay और #NorthIndiaFog जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां यात्री रेल मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग कर तत्काल राहत की मांग कर रहे हैं. बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाले प्रवासियों के लिए यह समय विशेष रूप से कष्टकारी है, क्योंकि वे साल के अंत की छुट्टियों में घर जाने के लिए महीनों पहले टिकट बुक करवाते हैं, लेकिन अब कोहरे ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.
प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और धुंध के कारण सिग्नल दिखाई न देने की स्थिति में ट्रेन को तेज गति से चलाना आत्मघाती साबित हो सकता है. इसी बीच, रेलवे ने स्टेशनों पर यात्रियों के लिए अतिरिक्त खान-पान और सहायता बूथों के इंतजाम करने के दावे किए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से काफी अलग नजर आ रही है. जिज्ञासा इस बात को लेकर भी है कि आने वाले 24 से 48 घंटों में मौसम विभाग का क्या पूर्वानुमान है, क्योंकि अगर कोहरे की यह स्थिति बनी रही तो रेल यातायात का यह संकट एक बड़े संकट का रूप ले सकता है. कोहरे के कारण ट्रेनों के रद्दीकरण ने एयरलाइंस के टिकटों के दामों में भी उछाल ला दिया है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवार खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं. फिलहाल, पूरा उत्तर भारत रेल सेवाओं के इस 'ब्लैकआउट' जैसी स्थिति से जूझ रहा है और हर कोई बस एक ही प्रार्थना कर रहा है कि धुंध छटे और पटरियों पर फिर से वही चिर-परिचित रफ्तार लौट आए. शाम तक कई और ट्रेनों के देरी से चलने की आशंका जताई गई है, जिसने यात्रियों की बेचैनी को और चरम पर पहुंचा दिया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

