भारत–पाक मुकाबले में चूक गई रणनीति और गलतियों ने बदला मैच का रुख, टीम इंडिया की हार के पांच बड़े कारण

भारत–पाक मुकाबले में चूक गई रणनीति और गलतियों ने बदला मैच का रुख, टीम इंडिया की हार के पांच बड़े कारण

प्रेषित समय :22:30:20 PM / Sun, Dec 21st, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला हर मुकाबला सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि भावनाओं, उम्मीदों और दबाव का महासंग्राम होता है। करोड़ों प्रशंसकों की निगाहें मैदान पर टिकी रहती हैं और खिलाड़ियों से असाधारण प्रदर्शन की अपेक्षा की जाती है। हालिया भारत–पाक मैच में भी यही माहौल था, लेकिन परिणाम टीम इंडिया के पक्ष में नहीं जा सका। मुकाबले के बाद जब उत्साह का शोर थमा, तो विश्लेषण शुरू हुआ कि आखिर ऐसी कौन-सी चूकें रहीं, जिनकी वजह से जीत हाथ से फिसल गई। सामूहिक खेल होने के बावजूद कुछ व्यक्तिगत प्रदर्शन ऐसे रहे, जिन्होंने भारत की हार की पटकथा लिखने में अहम भूमिका निभाई।

सबसे पहले बात बल्लेबाजी की करें तो शीर्ष क्रम से जिस ठोस शुरुआत की उम्मीद थी, वह देखने को नहीं मिली। पावरप्ले के अहम ओवरों में एक सीनियर बल्लेबाज का गैरजिम्मेदाराना शॉट चयन टीम पर भारी पड़ा। जब टीम को संभलकर पारी आगे बढ़ाने की जरूरत थी, तब जल्दबाजी में खेला गया शॉट विपक्षी गेंदबाजों का मनोबल बढ़ा गया। इस विकेट के गिरते ही दबाव ड्रेसिंग रूम तक साफ महसूस होने लगा और रन गति भी थम सी गई।

मध्यक्रम में एक भरोसेमंद बल्लेबाज से उम्मीद थी कि वह पारी को संभालेगा और अंत तक टिकेगा, लेकिन वह भी बड़े मंच के दबाव में बिखरता नजर आया। आसान गेंद पर गलत टाइमिंग और कैच थमा देना न सिर्फ एक विकेट गंवाना था, बल्कि उस साझेदारी का भी अंत था, जो मैच को भारत की ओर मोड़ सकती थी। पाकिस्तान के गेंदबाजों ने मौके का फायदा उठाया और लगातार सटीक लाइन-लेंथ से भारतीय बल्लेबाजी को जकड़ लिया।

इसके बाद जिम्मेदारी फिनिशर की थी, जिस पर अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाने का दारोमदार रहता है। लेकिन इस खिलाड़ी का दिन पूरी तरह खराब रहा। न तो वह स्ट्राइक रोटेट कर सका और न ही बड़े शॉट लगा पाया। अंतिम ओवरों में डॉट गेंदों का बढ़ता सिलसिला टीम इंडिया की रन गति को रोकता चला गया। जब विकेट हाथ में हों और ओवर कम, तब ऐसे मौके पर आक्रामकता की जरूरत होती है, जो यहां नजर नहीं आई।

गेंदबाजी में भी कुछ अहम चूकें सामने आईं। एक अनुभवी तेज गेंदबाज, जो आमतौर पर नई गेंद से खतरनाक साबित होता है, इस मैच में लय में नहीं दिखा। शुरुआती ओवरों में ढीली गेंदों ने विपक्षी बल्लेबाजों को सेट होने का मौका दिया। पावरप्ले में विकेट न मिलना हमेशा किसी भी टीम को बैकफुट पर धकेल देता है और यहां भी वही हुआ। पाकिस्तान के ओपनर्स ने बिना ज्यादा जोखिम लिए मजबूत आधार तैयार कर लिया।

मध्य ओवरों में एक स्पिनर से रन गति पर लगाम लगाने और विकेट निकालने की उम्मीद थी, लेकिन वह अपनी लाइन-लेंथ से भटकता नजर आया। आसान रन देते हुए उसने विपक्षी बल्लेबाजों का दबाव कम कर दिया। जब स्पिनर असरदार नहीं होते, तो कप्तान के पास विकल्प सीमित हो जाते हैं और यही स्थिति इस मुकाबले में भी दिखी।

फील्डिंग में हुई चूकें भी भारत की हार का बड़ा कारण बनीं। एक अहम मौके पर छोड़ा गया कैच मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। जिस बल्लेबाज को जीवनदान मिला, उसने बाद में टीम के खिलाफ निर्णायक रन बनाए। भारत जैसी शीर्ष टीम से ऐसी गलती की उम्मीद नहीं की जाती, खासकर तब जब मुकाबला इतना हाई-प्रोफाइल हो। इसके अलावा कुछ मिसफील्ड और थ्रो में देरी ने भी अतिरिक्त रन दिलाए, जो अंत में भारी पड़े।

कप्तानी फैसलों पर भी सवाल उठे। गेंदबाजों का सही समय पर इस्तेमाल न करना और फील्ड प्लेसमेंट में देर से बदलाव करना विपक्ष के लिए फायदेमंद साबित हुआ। भारत-पाक जैसे मुकाबलों में छोटे फैसले भी बड़े परिणाम लाते हैं और यहां रणनीतिक स्तर पर टीम इंडिया थोड़ी पीछे रह गई।

इस हार को केवल पांच खिलाड़ियों तक सीमित करना शायद पूरी तस्वीर नहीं दिखाता, लेकिन यह भी सच है कि इन अहम मौकों पर बेहतर प्रदर्शन से नतीजा अलग हो सकता था। टीम इंडिया में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और ऐसे मैचों से सीख लेकर आगे मजबूत वापसी करना उसकी पहचान रही है।

भारत-पाक मुकाबले हमेशा याद रखे जाते हैं, जीत के लिए भी और हार के सबक के लिए भी। यह हार जरूर चुभने वाली है, लेकिन यही खेल की प्रकृति है। आने वाले मैचों में टीम इंडिया से उम्मीद होगी कि वह इन गलतियों से सबक लेकर फिर उसी आक्रामकता और आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरे, जिसके लिए वह जानी जाती है। प्रशंसकों की उम्मीदें आज भी कायम हैं, बस जरूरत है उन्हें सही दिशा में प्रदर्शन से पूरा करने की।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-