नई दिल्ली.भारतीय पुलिस सेवा के गलियारों से आज एक ऐसी बड़ी खबर सामने आई है जिसने महाराष्ट्र के प्रशासनिक और सुरक्षा महकमे में हलचल तेज कर दी है। केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी के महानिदेशक और 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी सदानंद वसंत दाते को समय से पहले उनके मूल कैडर महाराष्ट्र में वापस भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सोमवार देर रात जारी हुए इस सरकारी आदेश के बाद अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि सदानंद दाते महाराष्ट्र के अगले पुलिस महानिदेशक (DGP) होंगे। वर्तमान डीजीपी रश्मि शुक्ला आगामी 3 जनवरी को सेवानिवृत्त होने जा रही हैं और उनकी विदाई के बाद सदानंद दाते राज्य के सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं। यह खबर केवल एक स्थानांतरण की सूचना नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र पुलिस की कमान एक ऐसे अधिकारी के हाथों में सौंपने की तैयारी है जिसने मुंबई की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी थी और जिसके शरीर में आज भी दुश्मन के ग्रेनेड के टुकड़े 'पदक' की तरह समाए हुए हैं।
जनता के बीच सदानंद दाते की वापसी को लेकर जबरदस्त उत्सुकता इसलिए भी है क्योंकि उन्हें 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के वास्तविक नायक के रूप में जाना जाता है। उस खौफनाक रात को जब लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने मुंबई को लहूलुहान किया था, तब सदानंद दाते मध्य क्षेत्र के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के रूप में तैनात थे। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर हुई गोलीबारी की सूचना मिलते ही वे कामा अस्पताल की ओर दौड़े थे, जहां उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर खूंखार आतंकी अजमल कसाब और अबू इस्माइल को अस्पताल की छत पर घेर लिया था। उस आमने-सामने की जंग में आतंकियों ने उन पर कई ग्रेनेड फेंके, जिससे दाते गंभीर रूप से घायल हो गए थे। आज भी उनकी आंखों के करीब और शरीर के अन्य हिस्सों में उन ग्रेनेड के धात्विक छर्रे मौजूद हैं। दाते अक्सर अपनी इन चोटों को घाव नहीं बल्कि युद्ध के मैदान से मिले 'मेडल' कहते हैं। उनकी इसी बहादुरी के लिए उन्हें राष्ट्रपति के पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया गया था।
सदानंद दाते की छवि केवल एक साहसी फील्ड ऑफिसर की ही नहीं है, बल्कि वे एक उच्च शिक्षित और जांच विशेषज्ञ अधिकारी भी माने जाते हैं। पुणे विश्वविद्यालय से आर्थिक अपराधों (Economic Offences) में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल करने वाले दाते ने अपने 59 साल के जीवन में सुरक्षा और जांच के लगभग हर महत्वपूर्ण मोर्चे पर काम किया है। उन्होंने महाराष्ट्र एटीएस (ATS) के प्रमुख के रूप में कमान संभाली, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में उप महानिरीक्षक रहे और सीआरपीएफ (CRPF) में आईजी ऑपरेशंस के रूप में अपनी सेवाएं दीं। मीरा-भयंदर और वसई-विरार के पुलिस आयुक्त के रूप में उनके कार्यकाल को आज भी उनकी सख्त कार्यशैली और प्रशासनिक पकड़ के लिए याद किया जाता है। महाराष्ट्र की जनता और पुलिस बल के भीतर यह जिज्ञासा बनी हुई है कि क्या दाते का यह अनुभव राज्य की कानून व्यवस्था को एक नई दिशा देने में सफल होगा, खासकर तब जब देश की सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं।
मार्च 2023 में एनआईए प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने देश की इस प्रमुख आतंकवाद विरोधी जांच एजेंसी को नए आयाम दिए। अब उनकी महाराष्ट्र वापसी ऐसे समय में हो रही है जब राज्य को एक अनुभवी और निर्विवाद छवि वाले नेतृत्व की आवश्यकता है। पत्रकारिता के नजरिए से देखें तो सदानंद दाते का प्रोफाइल आज के सुरक्षा परिदृश्य में बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि उनके पास काउंटर टेररिज्म का जमीनी अनुभव और जटिल आर्थिक अपराधों की गहरी समझ दोनों मौजूद हैं। 3 जनवरी को रश्मि शुक्ला के रिटायरमेंट के बाद जब वे औपचारिक रूप से कार्यभार संभालेंगे, तो उनके सामने मुंबई जैसे महानगर और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य की सुरक्षा को अभेद्य बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। केंद्र सरकार का उन्हें समय से पहले वापस भेजना यह संकेत देता है कि राज्य सरकार ने उनके नाम पर अपनी सहमति जता दी है और बहुत जल्द आधिकारिक तौर पर उनके नाम की घोषणा डीजीपी के रूप में कर दी जाएगी।
इस खबर ने न केवल पुलिस महकमे में बल्कि आम नागरिकों में भी सुरक्षा के प्रति एक नया विश्वास जगाया है क्योंकि सदानंद दाते जैसे 'वार जोन' से निकले अधिकारी का शीर्ष पद पर होना अपने आप में एक संदेश है। लोग अब यह जानने को उत्सुक हैं कि दाते की कार्यशैली में क्या नया बदलाव होगा और वे पुलिस बल के आधुनिकीकरण के लिए क्या कदम उठाएंगे। फिलहाल महाराष्ट्र के नए 'टॉप कॉप' के रूप में सदानंद दाते का नाम सबसे आगे है और उनकी वापसी ने राज्य के सियासी और प्रशासनिक हलकों में एक नई चर्चा छेड़ दी है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

