कोहरे की सफेद चादर में लिपटी भारतीय रेल की रफ्तार और स्टेशनों पर ठिठुरते यात्रियों का सब्र टूटा

कोहरे की सफेद चादर में लिपटी भारतीय रेल की रफ्तार और स्टेशनों पर ठिठुरते यात्रियों का सब्र टूटा

प्रेषित समय :19:14:04 PM / Tue, Dec 23rd, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई  दिल्ली .उत्तर भारत के विशाल मैदानी इलाकों में कुदरत ने कोहरे की एक ऐसी अभेद्य दीवार खड़ी कर दी है जिसने देश की सबसे प्रतिष्ठित ट्रेनों की रफ्तार को पूरी तरह बेदम कर दिया है और दिल्ली आने-जाने वाले लाखों यात्रियों के जीवन में अनिश्चितता का गहरा अंधेरा भर दिया है। आज 23 दिसंबर 2025 की सुबह जब राजधानी दिल्ली के रेलवे स्टेशनों पर सूरज की पहली किरण पहुंचने की कोशिश कर रही थी, तब वहां का नजारा किसी आपदा क्षेत्र जैसा महसूस हो रहा था क्योंकि सियालदह राजधानी और पटना राजधानी जैसी हाई-प्रोफाइल ट्रेनें घंटों नहीं बल्कि आधे दिन से भी ज्यादा की देरी से रेंग रही थीं। रेल प्रशासन और यात्रियों के बीच इस समय जबरदस्त तनाव देखा जा रहा है क्योंकि सियालदह राजधानी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से 13 घंटे और पटना राजधानी 12 घंटे की देरी से चलने की सूचना है। यह केवल दो ट्रेनों का हाल नहीं है बल्कि तेजस, दुरंतो और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों सहित दर्जनों गाड़ियां घने कोहरे के जाल में इस कदर फंस गई हैं कि उनका सही लोकेशन बता पाना भी रेलवे के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आज सुबह से ही दर्दनाक और विचलित करने वाली तस्वीरें तैर रही हैं जिनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं कड़ाके की ठंड के बीच प्लेटफार्मों पर खुले आसमान के नीचे ठिठुरते नजर आ रहे हैं। यात्रियों की जिज्ञासा अब इस बात को लेकर है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर ट्रेनों में 'फाग डिवाइस' और 'कवच' जैसी तकनीकें लगाई गई थीं, तो आखिर हर साल कोहरे के सामने रेलवे इतना असहाय क्यों महसूस करता है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या डिजिटल इंडिया के इस युग में हमारे पास ऐसा कोई सिस्टम नहीं है जो इस सफेद अंधेरे को चीर सके। स्टेशनों पर मची अफरा-तफरी के बीच पूछताछ काउंटरों पर लंबी कतारें लगी हुई हैं लेकिन वहां तैनात कर्मचारी भी यात्रियों की जिज्ञासा को शांत करने में विफल साबित हो रहे हैं क्योंकि सिग्नल प्रणाली और विजिबिलिटी के शून्य होने के कारण ट्रेनों का रियल-टाइम स्टेटस हर 15 मिनट में बदल रहा है।

इस भयंकर सर्दी में जब पारा रिकॉर्ड स्तर पर गिर रहा है, स्टेशनों पर वेटिंग रूम खचाखच भरे हुए हैं और जो लोग वहां जगह नहीं पा सके, वे अपनी चादरें और कंबल बिछाकर प्लेटफार्म के फर्श पर ही लेटने को मजबूर हैं। यात्रियों के बीच इस बात को लेकर भारी उत्सुकता है कि आखिर कब तक यह स्थिति बनी रहेगी और क्या रेलवे के पास ऐसी आपात स्थितियों के लिए कोई ठोस वैकल्पिक योजना है। कोहरे के कारण न केवल ट्रेनें लेट हो रही हैं बल्कि कई ट्रेनों को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ रहा है जिससे यात्रियों के पास भोजन और पानी की भी किल्लत होने लगी है। सोशल मीडिया पर एक यात्री ने पटना राजधानी के अंदर से वीडियो साझा किया जिसमें यात्रियों का धैर्य जवाब देता नजर आ रहा है क्योंकि ट्रेन पिछले तीन घंटों से एक ही गुमनाम छोटे स्टेशन के आउटर पर खड़ी थी। यह स्थिति उन लाखों लोगों के लिए एक मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना जैसी है जिन्होंने महीनों पहले बड़े उत्साह के साथ अपने सफर की बुकिंग की थी।

पत्रकारिता की दृष्टि से देखें तो यह संकट रेलवे के उस दावे पर भी सवाल उठाता है जिसमें हर साल कोहरे से निपटने के लिए नई तकनीकों के सफल परीक्षण की बात कही जाती है। जनता यह जानने को बेताब है कि जब विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम रह जाती है, तब लोको पायलटों को किन परिस्थितियों में इंजन चलाना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोहरा केवल दृश्यता कम नहीं करता बल्कि यह रेल की पटरियों और सिग्नल के बीच एक ऐसा अवरोध पैदा कर देता है जिससे जरा सी भी लापरवाही बड़े हादसे को दावत दे सकती है। यही कारण है कि सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्रेनों की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित कर दी गई है। लेकिन यात्रियों की उत्सुकता इस तकनीकी स्पष्टीकरण से शांत नहीं हो रही है, उन्हें बस इस बात की चिंता है कि वे सुरक्षित और जल्द से जल्द अपनी मंजिल पर कब पहुंचेंगे। दिल्ली आने वाली ट्रेनों के लेट होने का असर देशभर के रेल नेटवर्क पर पड़ रहा है क्योंकि यही रैक वापसी में भी देरी से रवाना हो रहे हैं जिससे एक अंतहीन चक्र बन गया है।

उत्तर भारत में प्रकृति के कहर और कोहरे के भीषण प्रकोप ने भारतीय रेल की समय-सारिणी को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिसके कारण आज देश की सबसे प्रीमियम ट्रेनों की सूची में शामिल सियालदह राजधानी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से करीब 13 घंटे 30 मिनट की भारी देरी से चल रही है। इसी तरह बिहार से राजधानी आने वाली पटना राजधानी एक्सप्रेस भी कोहरे के जाल में फंसकर 12 घंटे 15 मिनट लेट हो गई है, जिससे यात्रियों को स्टेशन पर ही रात गुजारनी पड़ी। बंगाल से आने वाली हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस भी इस संकट से अछूती नहीं है और वह 11 घंटे 45 मिनट की देरी के साथ रेंग रही है, जबकि ओडिशा से आने वाली भुवनेश्वर राजधानी 10 घंटे 20 मिनट और असम की ओर से आने वाली डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस 11 घंटे पीछे चल रही है।

केवल राजधानी ही नहीं बल्कि आम आदमी की पसंदीदा कही जाने वाली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस आज रिकॉर्ड 14 घंटे की देरी से चल रही है, जिसने पुरी से दिल्ली तक के यात्रियों के धैर्य की कड़ी परीक्षा ली है। गया से नई दिल्ली आने वाली महाबोधि एक्सप्रेस 13 घंटे 10 मिनट और गोरखपुर से चलने वाली गोरखधाम एक्सप्रेस करीब 10 घंटे 45 मिनट की देरी के साथ उत्तर भारत के विभिन्न स्टेशनों पर खड़ी रही। इसके अलावा सियालदह दुरंतो और जम्मू राजधानी जैसी तेज रफ्तार ट्रेनों पर भी कोहरे का ब्रेक लगा है, जो क्रमशः साढ़े नौ और सवा आठ घंटे की देरी से चल रही हैं। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे घर से निकलने से पहले 139 नंबर या आधिकारिक ऐप पर अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति जरूर जांच लें।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-