सोशल मीडिया पर वायरल ज्योति याराजी की उपलब्धियां सिर्फ खेल नहीं, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का पैगाम

सोशल मीडिया पर वायरल ज्योति याराजी की उपलब्धियां सिर्फ खेल नहीं, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का पैगाम

प्रेषित समय :22:20:18 PM / Tue, Dec 23rd, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

सोशल मीडिया इन दिनों भारतीय एथलीट ज्योति याराजी की उपलब्धियों और संघर्ष की कहानी से गूंज रहा है। उनके प्रशंसक उनके हर रिकॉर्ड, हर दौड़ और हर चुनौती को साझा कर रहे हैं और खुले दिल से उनके अनुकरणीय प्रदर्शन की सराहना कर रहे हैं। यह केवल खेल का नाम नहीं बल्कि समाज और युवाओं के लिए प्रेरणा का जीवंत उदाहरण बन गया है। ज्योति ने यह साबित कर दिया है कि सही समय पर सही निर्णय, निरंतर मेहनत और मानसिक दृढ़ता किसी भी खिलाड़ी को असाधारण सफलता तक पहुंचा सकती है। उनके संघर्ष, अनुशासन और दृढ़ निश्चय ने उन्हें एशिया की हर्डल क्वीन बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

ज्योति याराजी का सफर आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से शुरू हुआ। 28 अगस्त 1999 को जन्मी ज्योति सीमित संसाधनों के बीच पली-बढ़ी। उनके पिता सूर्यनारायण एक प्राइवेट सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते हैं और उनकी माता कुमारी घरेलू सहायिका हैं। बचपन में ही उन्होंने खेलों में रुचि दिखाई और साल 2015 में आंध्र प्रदेश इंटर-डिस्ट्रिक्ट मीट में स्वर्ण पदक जीतकर पहली बार सुर्खियों में आईं। उनके प्रदर्शन ने उन्हें प्रेरित किया और अगले साल ओलंपियन और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच एन रमेश के मार्गदर्शन में हैदराबाद के साई सेंटर में प्रशिक्षण लेने भेजा गया।

ज्योति ने 2017 में लॉन्ग जंप छोड़कर हर्डल्स को अपनाया, जो उनके लिए नए अनुभव और नई चुनौती लेकर आया। इसके बाद उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें एशिया की हर्डल क्वीन बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। 2023 में बैंकॉक में आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ज्योति ने महिला 100 मीटर बाधा दौड़ का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। लगातार बारिश के बावजूद उन्होंने 12.96 सेकेंड का चैंपियनशिप रिकॉर्ड बनाया, जिससे जापान की युमी तनाका और चीन की यानि वू जैसी प्रतिस्पर्धी धाविकाओं को पीछे छोड़ दिया। इस अद्भुत फिनिश का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और दर्शकों में जोश और उत्साह भर दिया।

ज्योति का 2024 का साल भी यादगार रहा। उन्होंने 12.78 सेकेंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया, हालांकि पेरिस ओलंपिक में निराशा हाथ लगी। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 2025 में फिर से मैदान में उतरते हुए अपनी तकनीक और तैयारी को और बेहतर बनाया। पेरिस ओलंपिक में अपनाई गई सात-स्ट्राइड तकनीक को छोड़कर उन्होंने आठ-स्ट्राइड तकनीक अपनाई, जिससे चोट का खतरा कम हुआ और दौड़ का रिदम बेहतर हुआ। उनके कोच जेम्स हिलियर ने उनकी रणनीति और परिश्रम की खुले दिल से सराहना की।

ज्योति का सफर सिर्फ राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहा। 29 मई 2025 को दक्षिण कोरिया के गुमी में आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने फिर से अपनी छाप छोड़ी। लगातार बारिश के बावजूद उन्होंने खाली स्टेडियम में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 12.96 सेकेंड में दौड़ पूरी की। उनके प्रदर्शन ने न केवल भारत को स्वर्ण पदक दिलाया बल्कि उन्हें एशिया की हर्डल क्वीन के रूप में स्थापित कर दिया।

ज्योति याराजी की कहानी संघर्ष और दृढ़ निश्चय का प्रतीक है। उनके जीवन में चुनौतियां हमेशा रही हैं। उनके पति दिव्यांग हैं, और ज्योति ने परिवार के भरण-पोषण के लिए कठिन परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी। उनकी मेहनत और अनुशासन ने उन्हें न केवल खेल की दुनिया में बल्कि समाज और युवाओं के बीच भी प्रेरक बना दिया है।

सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसक लगातार उनके प्रदर्शन की सराहना कर रहे हैं। उनके अनुकरणीय संघर्ष ने यह दिखा दिया है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं बल्कि सही निर्णय, कड़ी मेहनत और मानसिक दृढ़ता से मिलती है। उनके हर कदम, हर रिकॉर्ड और हर चुनौती ने यह साबित कर दिया कि किसी भी खिलाड़ी को असाधारण सफलता के लिए निरंतर प्रयास और समर्पण की जरूरत होती है।

2025 में ज्योति ने पहली बार 13 सेकेंड से कम समय में दौड़ पूरी की। यह उनके लिए केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक नया रिकॉर्ड भी है। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर सही तकनीक और समर्पण के साथ मेहनत की जाए, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उनके द्वारा अपनाई गई रणनीति और नई तकनीक ने उन्हें चोटों से बचाया और दौड़ में निरंतरता बनाए रखी।

ज्योति की उपलब्धियां केवल पदक और रिकॉर्ड तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने यह भी दिखाया है कि खेल समाज और युवाओं के लिए प्रेरणा का एक स्रोत बन सकता है। उनके संघर्ष और सफलता ने यह संदेश दिया है कि किसी भी क्षेत्र में आने वाली बाधाओं को पार करने के लिए दृढ़ निश्चय, मेहनत और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।

अब ज्योति का लक्ष्य 2026 वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई करना है, जहां 12.73 सेकेंड का मानक पार करना होगा। उनकी तैयारियां और प्रशिक्षण अब उसी लक्ष्य के अनुरूप हैं। कोच जेम्स हिलियर और भारतीय एथलेटिक्स संघ उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

ज्योति याराजी की कहानी उन सभी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में भी सपने साकार करना चाहते हैं। उनका संघर्ष, उनकी मेहनत और उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही दिशा में लगातार प्रयास करने से असंभव भी संभव हो सकता है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और प्रशंसकों की प्रतिक्रियाएं यह दर्शाती हैं कि ज्योति ने केवल एथलेटिक्स में ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी और समाज के बीच भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उनके अनुकरणीय प्रदर्शन ने यह संदेश दिया है कि खेल सिर्फ खेल नहीं बल्कि प्रेरणा और नेतृत्व का माध्यम भी बन सकता है।

ज्योति याराजी की कहानी हमें यह सिखाती है कि सही समय पर सही निर्णय, लगातार मेहनत और मानसिक दृढ़ता किसी भी खिलाड़ी को असाधारण सफलता तक पहुंचा सकती है। उनके हर रिकॉर्ड, हर दौड़ और हर चुनौती ने उन्हें न केवल एशिया की हर्डल क्वीन बनाया है बल्कि उन्हें भारतीय खेल जगत की प्रेरक और मिसाल भी बना दिया है।

ज्योति याराजी का नाम अब केवल एथलेटिक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए आदर्श, समाज के लिए प्रेरणा और देश के लिए गौरव का प्रतीक बन गया है। उनकी मेहनत, संघर्ष और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरक कहानी के रूप में हमेशा जीवित रहेंगी।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-