डोंगरगढ़ रेल सेक्शन में मेगा ब्लॉक से छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बीच रेल संपर्क कटा, 21 ट्रेनों के पहिए थमने से यात्रियों में मची हाहाकार

डोंगरगढ़ रेल सेक्शन में मेगा ब्लॉक से छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बीच रेल संपर्क कटा, 21 ट्रेनों के पहिए थमने से यात्रियों में मची हाहाकार

प्रेषित समय :19:17:50 PM / Tue, Dec 23rd, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नागपुर.दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सबसे व्यस्त रूटों में शुमार डोंगरगढ़ सेक्शन से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बीच सफर करने वाले हजारों यात्रियों की योजना को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है। भारतीय रेलवे द्वारा अधोसंरचना विकास और सुरक्षा को पुख्ता करने के नाम पर आज यानी 23 दिसंबर से 26 दिसंबर तक के लिए नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य का बड़ा फैसला लिया गया है जिसके चलते इस रूट की कुल 21 ट्रेनों को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। साल के आखिरी हफ्ते में जब लोग क्रिसमस और छुट्टियों के लिए अपनों के पास जाने की तैयारी कर रहे थे तब अचानक लिए गए इस फैसले ने रेलवे स्टेशनों पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है। यह केवल कुछ ट्रेनों का रद्द होना नहीं है बल्कि यह दो प्रमुख राज्यों के बीच बहने वाली उस जनधारा को रोकने जैसा है जो पूरी तरह रेल पटरियों पर निर्भर है। डोंगरगढ़ सेक्शन में चौथी लाइन को जोड़ने और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के इस कार्य ने विकास और सुविधा के बीच एक नई बहस छेड़ दी है क्योंकि यात्री इस बात को लेकर बेहद उत्सुक और परेशान हैं कि आखिर इन चार दिनों तक वे अपनी मंजिल तक कैसे पहुंच पाएंगे।

जनता के बीच जिज्ञासा इस बात को लेकर सबसे ज्यादा है कि जब रेलवे को पता था कि दिसंबर का आखिरी हफ्ता छुट्टियों और पर्यटन के लिहाज से बेहद व्यस्त होता है तो आखिर इस मेगा ब्लॉक के लिए यही समय क्यों चुना गया। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और बिलासपुर से लेकर महाराष्ट्र के नागपुर और गोंदिया तक के रेल खंड पर सन्नाटा पसरा हुआ है और पूछताछ काउंटरों पर उन लोगों की भीड़ उमड़ रही है जिनके पास पहले से कन्फर्म टिकट थे। रद्द की गई ट्रेनों की सूची में कई ऐसी गाड़ियां शामिल हैं जो इस क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती हैं और जिनके बंद होने से सड़क परिवहन पर दबाव अचानक बढ़ गया है। लोग सोशल मीडिया पर यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या रेलवे ने इन रद्द ट्रेनों के बदले कोई विशेष बस सेवा या वैकल्पिक मार्ग का प्रबंध किया है। डोंगरगढ़ जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल के पास चल रहा यह काम न केवल यात्रियों को बल्कि स्थानीय व्यापारियों और टैक्सी संचालकों को भी आर्थिक चोट पहुंचा रहा है।

पत्रकारिता के मापदंडों पर देखें तो यह स्थिति एक बड़े परिवहन संकट की ओर इशारा करती है क्योंकि रद्द की गई 21 ट्रेनों में अधिकांश वे हैं जिनमें स्थानीय यात्री और छोटे व्यापारी सफर करते हैं। रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह 'नॉन-इंटरलॉकिंग' कार्य सिग्नल प्रणाली को आधुनिक बनाने और भविष्य में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए अनिवार्य है लेकिन वर्तमान में यह यात्रियों के लिए किसी सजा से कम नहीं लग रहा है। यात्री इस बात को लेकर भी असमंजस में हैं कि क्या 26 दिसंबर के बाद भी यह काम खिंचेगा या फिर तय समय पर ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जाएगा। जिज्ञासा का एक पहलू यह भी है कि जिन लोगों ने महीनों पहले रिजर्वेशन कराया था क्या उन्हें केवल टिकट का रिफंड देकर रेलवे अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेगा या फिर उन्हें दूसरी ट्रेनों में 'एडजस्ट' करने का कोई प्रावधान होगा। रायपुर और दुर्ग स्टेशनों पर यात्रियों का गुस्सा साफ देखा जा सकता है क्योंकि अचानक ट्रेनें रद्द होने से निजी बस ऑपरेटरों ने मनमाना किराया वसूलना शुरू कर दिया है जिससे आम आदमी की जेब पर दोहरी मार पड़ रही है।

जैसे-जैसे शाम ढल रही है और कोहरे का असर बढ़ रहा है रेल यात्रियों की दुश्वारियां और बढ़ती जा रही हैं क्योंकि जो ट्रेनें चल रही हैं वे भारी भीड़ के कारण पहले ही ओवरलोड हैं। डोंगरगढ़ सेक्शन में चल रहे इस भारी-भरकम काम की तस्वीरें और वीडियो भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं जहां सैकड़ों रेल कर्मचारी और अत्याधुनिक मशीनें पटरियों को आधुनिक बनाने में जुटी हैं। जनता के मन में यह कौतूहल बना हुआ है कि इस बड़े बदलाव के बाद क्या इस रूट पर ट्रेनों की लेटलतीफी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी या फिर यह भी एक रूटीन प्रक्रिया बनकर रह जाएगी। रेलवे के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी सूचनाओं के बीच फंसे हुए यात्री अब केवल 26 दिसंबर की सुबह का इंतजार कर रहे हैं जब यह ब्लॉक समाप्त होगा और पटरियों पर फिर से रौनक लौटेगी। फिलहाल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के रेल खंड पर बना यह गतिरोध विकास की कीमत और यात्रियों के धैर्य की एक बड़ी परीक्षा ले रहा है

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-