वाशिंगटन.अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय गलियारों में उस समय तेज हलचल मच गई जब 23 दिसंबर 2025 की रात अमेरिकी न्याय विभाग ने दिवंगत और कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी जांच फाइलों का एक नया और बेहद संवेदनशील सेट सार्वजनिक कर दिया। इन दस्तावेजों के सामने आते ही दुनिया भर की निगाहें वाशिंगटन पर टिक गईं, क्योंकि नई फाइलों में मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम एक बार फिर प्रमुखता से दर्ज पाया गया है। खास तौर पर इन फाइलों में शामिल उड़ान रिकॉर्ड्स ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को नई दिशा दे दी है, जिनके मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने एपस्टीन के निजी विमान से कम से कम आठ बार यात्रा की थी। यही वह खुलासा है जिसने इस मामले को एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों के केंद्र में ला खड़ा किया है।
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए इस नए जत्थे को पारदर्शिता कानून के तहत सार्वजनिक किया गया है, जिसके तहत संघीय सरकार को एपस्टीन से जुड़ी जांचों के दस्तावेज साझा करने के लिए बाध्य किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि यह खुलासे ऐसे समय में सामने आए हैं, जब हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन खुद भी एपस्टीन फाइलों के बड़े संग्रह को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया में शामिल रहा है। नए दस्तावेजों में शामिल फ्लाइट मैनिफेस्ट और रिकॉर्ड्स ने यह साफ किया है कि ट्रंप का नाम उन यात्रियों में दर्ज है, जिन्होंने एपस्टीन के निजी विमान से सफर किया। हालांकि, इन फाइलों के साथ ही यह स्पष्ट कर दिया गया है कि संघीय एजेंसियों ने राष्ट्रपति ट्रंप पर एपस्टीन से जुड़े किसी भी आपराधिक कृत्य को लेकर कोई आरोप तय नहीं किया है।
इसके बावजूद, इन दस्तावेजों का सार्वजनिक होना अपने आप में राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ मैदान में उतर आए। ट्रंप के आलोचकों ने इन उड़ानों को उनके अतीत से जुड़े गंभीर सवालों के रूप में पेश किया, वहीं समर्थकों का कहना है कि केवल किसी निजी विमान में यात्रा करना किसी अपराध का प्रमाण नहीं हो सकता। उनका तर्क है कि एपस्टीन उस दौर में कई अमीर और प्रभावशाली लोगों के संपर्क में था और सामाजिक मेलजोल के तहत ऐसे सफर आम बात थे।
फाइलों में दर्ज विवरणों के अनुसार, ये उड़ानें अलग-अलग समय अवधि में हुई थीं और इनमें विभिन्न स्थानों का जिक्र है। हालांकि न्याय विभाग ने अभी तक यह सार्वजनिक नहीं किया है कि इन यात्राओं का उद्देश्य क्या था या उन उड़ानों के दौरान कौन-कौन लोग मौजूद थे। यही अस्पष्टता इस मामले को और रहस्यमय बना रही है। आम लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन उड़ानों के पीछे केवल सामाजिक संबंध थे या फिर कोई ऐसा पहलू है, जो अब तक सामने नहीं आया है।
जेफ्री एपस्टीन का नाम पहले ही दुनिया भर में यौन शोषण और सत्ता के दुरुपयोग के प्रतीक के रूप में जाना जाता रहा है। उसकी गिरफ्तारी, जेल में हुई रहस्यमयी मौत और उसके बाद चली जांचों ने कई शक्तिशाली हस्तियों को कठघरे में खड़ा किया था। ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू से लेकर हॉलीवुड और राजनीति की कई बड़ी हस्तियों तक, एपस्टीन का नेटवर्क हमेशा से संदेह और साजिशों से घिरा रहा है। ऐसे में राष्ट्रपति ट्रंप का नाम एक बार फिर इन फाइलों में आना स्वाभाविक रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर रहा है।
लंदन, न्यूयॉर्क और वाशिंगटन जैसे शहरों में पहले से ही एपस्टीन और ट्रंप को लेकर विरोध प्रदर्शन और पोस्टरबाजी देखने को मिल चुकी है। 2025 के मध्य में लंदन स्थित अमेरिकी दूतावास के पास लगाए गए पोस्टरों की तस्वीरें एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें ट्रंप और एपस्टीन को साथ दिखाया गया था। अब नए दस्तावेजों के आने से उन तस्वीरों और अभियानों को एक नया संदर्भ मिल गया है।
पत्रकारिता के नजरिए से देखें तो यह मामला केवल एक नाम के फाइल में दर्ज होने भर का नहीं है। यह सत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ सवाल है। अमेरिकी लोकतंत्र में यह हमेशा से अपेक्षा रही है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के अतीत की जांच पारदर्शी तरीके से हो। न्याय विभाग का कहना है कि इन फाइलों को सार्वजनिक करने का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि जनता के सामने तथ्य रखना है, ताकि अफवाहों और अटकलों की जगह प्रमाण आधारित चर्चा हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन दस्तावेजों के गहन विश्लेषण के बाद आने वाले दिनों में और भी जानकारियां सामने आ सकती हैं। 1000 पन्नों से अधिक के इस दस्तावेजी संग्रह में केवल उड़ान रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि गवाहियों, ईमेल्स और अन्य संदर्भों का भी उल्लेख है, जिनका अध्ययन अभी जारी है। मानवाधिकार संगठनों और पीड़ितों के पक्ष में काम करने वाले समूहों ने इन खुलासों को न्याय की दिशा में एक और कदम बताया है। उनका कहना है कि चाहे कितनी भी ताकतवर शख्सियत क्यों न हो, सच्चाई का सामने आना जरूरी है।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस खुलासे का असर अमेरिकी घरेलू राजनीति पर भी पड़ सकता है। चुनावी माहौल में ऐसे दस्तावेज विरोधियों के लिए एक मजबूत हथियार बन सकते हैं, भले ही उनमें किसी तरह का आपराधिक आरोप न हो। ट्रंप प्रशासन के लिए यह चुनौती होगी कि वह इन सवालों का जवाब कैसे देता है और जनता के भरोसे को कैसे बनाए रखता है।
फिलहाल अमेरिकी न्याय विभाग ने यह संकेत दिया है कि पारदर्शिता की यह प्रक्रिया यहीं खत्म नहीं होगी। आने वाले समय में एपस्टीन से जुड़ी और भी फाइलें सार्वजनिक की जा सकती हैं। ऐसे में यह मामला केवल अतीत की कहानी नहीं रह जाता, बल्कि भविष्य की राजनीति और वैश्विक विमर्श को भी प्रभावित करने वाला विषय बन गया है। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इन फाइलों से और कौन-कौन से नाम और किस तरह के तथ्य सामने आते हैं, और क्या ये खुलासे सत्ता के सबसे ऊंचे गलियारों तक कोई नई बहस और जवाबदेही की मांग खड़ी करेंगे।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

