ऑपरेशन सिंदूर दस्तावेजी किताब जिसने दर्ज किया भारतीय शौर्य, जबलपुर में ऑनलाइन खरीद की होड़

ऑपरेशन सिंदूर दस्तावेजी किताब जिसने दर्ज किया भारतीय शौर्य, जबलपुर में ऑनलाइन खरीद की होड़

प्रेषित समय :20:50:56 PM / Thu, Dec 25th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर.भारतीय सेना की धड़कन कहे जाने वाले  मध्यप्रदेश के जबलपुर में इन दिनों एक किताब को लेकर खास हलचल है. यह वही शहर है जहां सेना के तीन बड़े रेजिमेंटल सेंटरों के मुख्यालय हैं, मध्य भारत का आर्मी एरिया हेडक्वार्टर स्थित है और देश की छह ऑर्डनेंस फैक्ट्रियां इसी शहर की पहचान हैं. कैंट क्षेत्र के प्रमुख चौराहों पर युद्ध में इस्तेमाल होने वाले टैंक खड़े हैं, जिन्हें देखकर ही कई लोग जबलपुर को ‘टैंकों का शहर’ कहने लगे हैं. ऐसे सैन्य परिवेश वाले शहर में दस्तावेजी पुस्तक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की ऑनलाइन खरीद अचानक चर्चा का विषय बन गई है.

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यह किताब तेजी से मंगाई जा रही है और सेना से जुड़े परिवारों, पूर्व सैनिकों तथा युवाओं के बीच इस पर खुलकर बातचीत हो रही है. वजह भी साफ है—आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सैन्य बलों की निर्णायक कार्रवाई पर आधारित यह किताब जबलपुर में केवल पढ़ी नहीं जा रही, बल्कि उसे लेकर गर्व, बहस और गहरी जिज्ञासा दिखाई दे रही है. जहां हर गली-मोहल्ले में फौज से जुड़ी कहानियां सांस लेती हैं, वहां ‘ऑपरेशन सिंदूर’ आतंक के खिलाफ देश की लड़ाई, शौर्य और बलिदान की स्मृतियों को एक बार फिर जीवंत कर रही है.

आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक लड़ाई और उसके पीछे छिपे वैश्विक षड्यंत्रों को अगर किसी एक किताब में समझना हो, तो वरिष्ठ पत्रकार नवीन कुमार की दस्तावेजी कृति ‘ऑपरेशन सिंदूर’ उस जरूरत को काफी हद तक पूरा करती है. यह किताब सिर्फ घटनाओं का संकलन नहीं है, बल्कि उन जख्मों, सवालों और जवाबों का सिलसिलेवार दस्तावेज है, जो पिछले कई दशकों से भारत झेलता आ रहा है. पुस्तक को पढ़ते हुए पाठक केवल सूचनाएं नहीं पाता, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा पर निकल पड़ता है, जहां पीड़ा, आक्रोश, राष्ट्रगौरव और सख्त फैसलों की गूंज लगातार सुनाई देती है.

किताब की शुरुआत होते ही पाठक का सामना उस स्याह सच से होता है, जिसने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान पूरे देश को झकझोर दिया था. लेखक यह बताने की कोशिश करते हैं कि किस तरह 26/11 केवल एक आतंकी घटना नहीं थी, बल्कि भारत की सहनशीलता की परीक्षा थी. उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए वह पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले तक पहुंचते हैं, जहां आतंकियों ने धर्म पूछकर पर्यटकों को निशाना बनाया. यह घटना न सिर्फ मानवता के खिलाफ अपराध थी, बल्कि भारत की आत्मा पर सीधा हमला थी. लेखक इन दोनों घटनाओं के बीच समानताओं को सामने रखते हुए यह संकेत देते हैं कि आतंक का स्रोत, उसकी सोच और उसका संरक्षण एक ही जगह से संचालित होता रहा है.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में आतंकवाद को केवल बंदूक और बम तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसे एक संगठित, प्रायोजित और लाभ का धंधा बताया गया है. लेखक विस्तार से बताते हैं कि किस तरह पाकिस्तान वर्षों से आतंकवाद को अपनी विदेश नीति का औजार बनाए हुए है. किताब में यह दावा भी मजबूती से उभरता है कि पाकिस्तान अब केवल आतंकवाद को पालने-पोसने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह आतंकवाद का निर्यातक बन चुका है. दुनिया के कई हिस्सों में फैले आतंकी नेटवर्क की डोर कहीं न कहीं पाकिस्तान से जुड़ी दिखाई देती है.

पुस्तक का सबसे महत्वपूर्ण और रोमांचक हिस्सा वह है, जहां भारतीय सैन्य बलों की कार्रवाई का वर्णन किया गया है. पहलगाम हमले के बाद भारत ने जिस तरह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, उसका विवरण लेखक ने तथ्यों और रणनीतिक विश्लेषण के साथ प्रस्तुत किया है. यह बताया गया है कि यह ऑपरेशन केवल बदले की कार्रवाई नहीं था, बल्कि एक स्पष्ट संदेश था कि अब भारत आतंकवाद को उसकी भाषा में जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा. इस अभियान में दर्जनों आतंकियों के मारे जाने और उनके अड्डों के ध्वस्त होने की कहानी किताब को पढ़ते समय पाठक के भीतर गर्व की भावना भर देती है.

लेखक यह भी उजागर करते हैं कि इस संघर्ष में पाकिस्तान अकेला नहीं था. चीन और तुर्किये जैसे देशों के हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तान की ओर से किया गया, जो इस पूरे घटनाक्रम को एक वैश्विक परिप्रेक्ष्य देता है. अमेरिका के पाकिस्तान के प्रति कथित नरम रुख पर भी सवाल उठाए गए हैं. किताब यह संकेत देती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नैतिकता अक्सर रणनीतिक हितों के आगे कमजोर पड़ जाती है. इसके बावजूद भारत ने अपने फैसलों में किसी बाहरी दबाव को हावी नहीं होने दिया.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल सैन्य कार्रवाई का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों की पीड़ा की भी कहानी है, जिन्होंने आतंकवाद के कारण अपने प्रियजनों को खोया. पहलगाम हमले के पीड़ित परिवारों की दास्तान को लेखक ने बेहद संवेदनशील तरीके से शब्दों में पिरोया है. इन पन्नों को पढ़ते हुए पाठक का मन बार-बार विचलित होता है और आंखें नम हो जाती हैं. यही वह भावनात्मक पक्ष है, जो इस किताब को एक साधारण विश्लेषण से कहीं ऊपर ले जाता है.

किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का भी उल्लेख है, जिसमें उन्होंने देश को भरोसा दिलाया था कि हर आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा. लेखक के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर उसी राजनीतिक इच्छाशक्ति और सैन्य आत्मविश्वास का परिणाम था. इस अभियान के दौरान पाकिस्तान को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा और उसकी गीदड़भभकी एक बार फिर बेनकाब हुई. यहां तक कि पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों तक भारतीय मिसाइल की पहुंच का जिक्र भी किताब में मिलता है, जो यह बताता है कि भारत की रणनीतिक क्षमता कितनी मजबूत हो चुकी है.

लेखक नवीन कुमार की पत्रकारिता का अनुभव इस किताब के हर अध्याय में झलकता है. बिहार के खगड़िया से निकलकर करीब 35 वर्षों से मुंबई में पत्रकारिता कर रहे नवीन कुमार ने इस पुस्तक को लिखने में व्यापक शोध और दस्तावेजों का सहारा लिया है. उनकी भाषा सरल है, लेकिन प्रभावशाली है. वह कहीं भी अनावश्यक उत्तेजना पैदा नहीं करते, बल्कि तथ्यों को इस तरह रखते हैं कि पाठक खुद निष्कर्ष तक पहुंच जाए.

न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित इस किताब का मुखपृष्ठ भी अपने आप में एक संदेश देता है. 299 रुपये मूल्य की यह पुस्तक अमेज़न पर उपलब्ध है और तेजी से पाठकों तक पहुंच रही है. मौजूदा दौर में, जब सूचनाएं सोशल मीडिया की अफवाहों में उलझ जाती हैं, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी दस्तावेजी किताबें सच और झूठ के बीच फर्क करने में मदद करती हैं. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ उन पाठकों के लिए जरूरी किताब बनकर सामने आती है, जो आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई को केवल खबरों की सुर्खियों में नहीं, बल्कि उसके पूरे संदर्भ और गहराई के साथ समझना चाहते हैं. यह किताब देशप्रेम को भावनाओं तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे तथ्यों, रणनीति और साहस के साथ जोड़ती है. यही वजह है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल एक किताब नहीं, बल्कि भारत के समकालीन इतिहास का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन जाती  है.   ऑनलाइन खरीदने के लिए लिंक को क्लिक करें :https://hosturl.link/p8q5oM

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-