नई दिल्ली. राष्ट्रीय जांच एजेंसी के दो दिवसीय आतंकवाद निरोधक सम्मेलन के मंच से शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ सरकार की रणनीति को बेहद स्पष्ट शब्दों में रखा. उन्होंने कहा कि देश अब केवल प्रतिक्रिया देने की नीति पर नहीं, बल्कि सटीक खुफिया जानकारी, तकनीक और समन्वित कार्रवाई के आधार पर निर्णायक प्रहार की दिशा में आगे बढ़ चुका है. शाह ने यह भी ऐलान किया कि केंद्र सरकार संगठित अपराध के खिलाफ 360 डिग्री हमला करने की व्यापक योजना पर काम कर रही है, ताकि अपराध और आतंक के गठजोड़ को जड़ से समाप्त किया जा सके.
गृह मंत्री ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन मैदान में हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने “पूर्ण और सफल” जांच को अंजाम दिया है. उन्होंने इसे केवल एक केस नहीं, बल्कि आने वाले समय में दुनिया भर की जांच एजेंसियों के लिए अध्ययन का विषय बताया. शाह के अनुसार इस जांच के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा करने का काम करेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहली बार हुआ है जब किसी आतंकी हमले की साजिश रचने वालों और उसे अंजाम देने वालों दोनों को अलग-अलग अभियानों के जरिए सजा दी गई.
गृह मंत्री ने बताया कि पहलगाम हमले के जरिए आतंकियों का उद्देश्य देश में सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना और कश्मीर में शुरू हुए विकास व पर्यटन के नए दौर को झटका देना था. लेकिन अत्यंत सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर भारतीय सुरक्षा बलों ने न केवल तीनों आतंकियों को मार गिराया, बल्कि पाकिस्तान को यह कड़ा संदेश भी दिया कि भारत अब हर साजिश का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है. उन्होंने कहा कि इस हमले की साजिश रचने वालों को ऑपरेशन सिंदूर के जरिए दंडित किया गया, जबकि हथियार उठाकर हमला करने वालों को ऑपरेशन महादेव के तहत निष्क्रिय किया गया.
अमित शाह ने 10 नवंबर को हुए लाल किला विस्फोट मामले का भी उल्लेख किया और जांच एजेंसियों की सराहना की. उन्होंने कहा कि समय रहते तीन टन विस्फोटक बरामद कर लिया गया, जिससे एक बड़ी आतंकी साजिश नाकाम हो गई. शाह ने जोर देकर कहा कि पहलगाम और दिल्ली के इन मामलों की जांच को सामान्य पुलिसिंग नहीं कहा जा सकता, बल्कि ये “वाटरटाइट” यानी पूरी तरह मजबूत और उदाहरणीय जांच के नमूने हैं. उनके मुताबिक, यह दिखाता है कि यदि अधिकारी सतर्क हों और एजेंसियों के बीच तालमेल हो, तो देश को बड़े संकट से बचाया जा सकता है.
सम्मेलन के दौरान गृह मंत्री ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा विकसित दो महत्वपूर्ण डाटाबेस भी लॉन्च किए. इनमें पहला संगठित अपराध नेटवर्क डाटाबेस है और दूसरा लूटे गए, खोए हुए या बरामद हथियारों से संबंधित डाटाबेस. शाह ने कहा कि ये दोनों डाटाबेस राज्य और केंद्र की एजेंसियों के लिए एक साझा संसाधन के रूप में काम करेंगे. इनके माध्यम से अपराधियों की कार्यप्रणाली, पुराने मामलों, नेटवर्क और हथियारों से जुड़ी सूचनाएं तुरंत उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे जांच की गति और सटीकता दोनों बढ़ेंगी.
गृह मंत्री ने संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच बढ़ते संबंधों पर भी गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि अक्सर संगठित अपराधी पहले फिरौती और उगाही जैसे अपराधों से शुरुआत करते हैं, लेकिन जब उनके सरगना देश छोड़कर विदेश में बस जाते हैं, तो उनका संपर्क आतंकी संगठनों से हो जाता है. इसके बाद वही अपराध से अर्जित धन देश के भीतर आतंक फैलाने में इस्तेमाल होने लगता है. शाह ने सभी राज्यों से आह्वान किया कि वे एनआईए, सीबीआई और खुफिया ब्यूरो के मार्गदर्शन में, इन नए डाटाबेस का उपयोग करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करें.
अमित शाह ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने आतंकवाद निरोधक दस्तों यानी एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड के लिए एक समान ढांचा तैयार किया है, जिसे सभी राज्यों की पुलिस को भेजा गया है. उन्होंने कहा कि देशभर में एक समान एटीएस संरचना लागू होने से हर स्तर पर समान तैयारी संभव होगी. इससे न केवल प्रशिक्षण और कार्यप्रणाली में एकरूपता आएगी, बल्कि किसी भी आतंकी खतरे से निपटने में राज्यों के बीच समन्वय भी मजबूत होगा. शाह ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों से इसे जल्द लागू करने की अपील की.
गृह मंत्री ने तकनीक के बदलते स्वरूप की ओर इशारा करते हुए कहा कि दुनिया भर में आतंकवाद का चेहरा बदल रहा है. अब आतंकी संगठन नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को भी उसी स्तर पर खुद को तैयार करना होगा. उन्होंने राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड यानी नैटग्रिड के उपयोग को कुछ खास प्रकार की जांच में अनिवार्य बनाने पर जोर दिया और कहा कि आतंकियों व अपराधियों का डाटाबेस ‘जीरो टेरर’ नीति की मुख्य संपत्ति बनना चाहिए.
अपने संबोधन के अंत में अमित शाह ने कहा कि यह सम्मेलन केवल वर्तमान खतरों पर चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि अदृश्य भविष्य की चुनौतियों को पहचानने और उन्हें रोकने की राष्ट्रीय जिम्मेदारी का हिस्सा है. उन्होंने भरोसा जताया कि जांच एजेंसियों, पुलिस बलों और खुफिया तंत्र के समन्वित प्रयासों से भारत आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ निर्णायक बढ़त बनाए रखेगा. देश की जनता के लिए यह संदेश साफ है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में सरकार किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी और हर साजिश का जवाब मजबूती और रणनीति के साथ दिया जाएगा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

