नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के गलियारों में इस समय एक ऐसी हलचल मची है जिसने खेल प्रेमियों की नींद उड़ा दी है और यह सवाल हर जुबान पर है कि क्या टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर की कुर्सी अब वाकई खतरे में है? साल 2025 की विदाई और 2026 की आहट के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के भीतर से छनकर आ रही खबरें संकेत दे रही हैं कि बोर्ड अब टेस्ट क्रिकेट के लिए एक अलग विजन पर काम करने का मन बना चुका है. दरअसल, व्हाइट-बॉल क्रिकेट यानी टी20 और वनडे में तो गौतम गंभीर का रिकॉर्ड किसी शानदार सफर जैसा रहा है, जहाँ टीम ने आईसीसी और एसीसी की ट्रॉफियां अपने नाम कीं, लेकिन जैसे ही बात सफेद जर्सी और रेड-बॉल क्रिकेट की आती है, गंभीर का विजय रथ थमता हुआ नजर आ रहा है. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज में मिली करारी हार ने आग में घी डालने का काम किया है और अब रिपोर्ट्स की मानें तो बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अनौपचारिक रूप से दिग्गज बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण से संपर्क कर उन्हें टेस्ट टीम का मुख्य कोच बनने का प्रस्ताव दिया है.
गौतम गंभीर का बीसीसीआई के साथ अनुबंध वैसे तो साल 2027 के वनडे वर्ल्ड कप तक है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में सेना (SENA) देशों के खिलाफ पिछले 10 मैचों में भारत का जो हश्र हुआ है, उसने बोर्ड के आला अधिकारियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. दक्षिण अफ्रीका की उछाल भरी पिचों पर भारतीय बल्लेबाजों का सरेंडर और कोच की रणनीतियों का नाकाम होना अब गंभीर के भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है. बीसीसीआई के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या एक ही कोच के कंधों पर तीनों फॉर्मेट का बोझ डालना सही है या फिर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर भारत को भी 'स्पिलिट कोचिंग' यानी अलग-अलग फॉर्मेट के लिए अलग-अलग कोच की राह पकड़नी चाहिए. इसी सिलसिले में 'वेरी वेरी स्पेशल' लक्ष्मण का नाम सबसे ऊपर उभरकर आया है, जिन्हें अपनी तकनीकी मजबूती और धैर्यपूर्ण खेल के लिए जाना जाता है.
हालांकि, वीवीएस लक्ष्मण को लेकर पेंच अभी फंसा हुआ है. सूत्र बताते हैं कि लक्ष्मण फिलहाल बेंगलुरु स्थित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (CoE) में 'हेड ऑफ क्रिकेट' की अपनी भूमिका से काफी संतुष्ट हैं और वे सीनियर टीम के साथ लगातार विदेशी दौरों पर रहने वाली भागदौड़ भरी जिंदगी में फिर से लौटने के ज्यादा इच्छुक नहीं दिख रहे हैं. लक्ष्मण का मानना है कि वे एकेडमी में रहकर भारतीय क्रिकेट की नई पौध तैयार करने में ज्यादा बेहतर योगदान दे पा रहे हैं. लेकिन बीसीसीआई के एक धड़े का मानना है कि अगर लक्ष्मण रेड-बॉल टीम की जिम्मेदारी संभालते हैं, तो भारतीय टेस्ट टीम की बल्लेबाजी में वह पुरानी मजबूती वापस आ सकती है जो विदेशी दौरों पर अक्सर गायब दिखती है.
गौतम गंभीर के लिए आने वाले पांच हफ्ते किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होने वाले हैं. आगामी टी20 वर्ल्ड कप में भारत का प्रदर्शन यह तय करेगा कि गंभीर का दबदबा बरकरार रहेगा या उनके अधिकारों में कटौती की जाएगी. अगर भारतीय टीम इस टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुँचती है या खिताब जीतती है, तो गंभीर की स्थिति मजबूत होगी, लेकिन अगर नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, तो वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) 2025-27 के बाकी बचे नौ टेस्ट मैचों के लिए बोर्ड नया चेहरा तलाशने में जरा भी देर नहीं करेगा. भारत को आने वाले समय में श्रीलंका, न्यूजीलैंड और फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की बेहद महत्वपूर्ण टेस्ट सीरीज खेलनी है, जहाँ एक छोटी सी गलती भी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की राह मुश्किल कर सकती है.
क्रिकेट जगत में यह भी चर्चा है कि गौतम गंभीर की कोचिंग शैली और उनका आक्रामक अंदाज छोटे फॉर्मेट में तो रंग लाता है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में जिस ठहराव और दीर्घकालिक योजना की जरूरत होती है, वहां तालमेल नहीं बैठ पा रहा है. दक्षिण अफ्रीका दौरे पर हार के बाद बोर्ड के अधिकारी इस बात से नाराज दिखे कि टीम इंडिया विदेशी परिस्थितियों में अपनी लय क्यों खो रही है. ऐसे में लक्ष्मण जैसे शांत और सुलझे हुए दिग्गज का नाम सामने आना स्वाभाविक है. बीसीसीआई अब शायद उस रणनीति पर काम कर रहा है जहां गंभीर को केवल वनडे और टी20 तक सीमित रखा जाए और टेस्ट की बागडोर किसी ऐसे विशेषज्ञ को सौंपी जाए जो भारतीय दीवार को विदेशी दौरों पर ढहने से बचा सके.
जैसे-जैसे 2026 की चुनौतियां करीब आ रही हैं, टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम का माहौल काफी तनावपूर्ण होने की आशंका है. खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के बीच का सामंजस्य और बोर्ड का उन पर भरोसा ही भविष्य की दिशा तय करेगा. क्या गंभीर अपनी रणनीतियों में बदलाव कर टेस्ट क्रिकेट में वापसी करेंगे या फिर वीवीएस लक्ष्मण को बोर्ड मना लेने में सफल रहेगा, यह भारतीय क्रिकेट के इतिहास का एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है. फिलहाल, क्रिकेट फैंस की नजरें दक्षिण अफ्रीका की हार के बाद होने वाली बोर्ड की आधिकारिक समीक्षा बैठक पर टिकी हैं, जहाँ गंभीर के भविष्य और लक्ष्मण के ऑफर पर अंतिम मुहर लग सकती है. भारतीय क्रिकेट के इस संक्रमण काल में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बोर्ड 'भाईजान' जैसी दबंगई दिखाने वाले गंभीर पर दांव खेलता रहता है या फिर 'कलाई के जादूगर' लक्ष्मण के भरोसे टेस्ट क्रिकेट की नई इबारत लिखता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

