जबलपुर. संस्कारधानी की फिजाओं में स्वच्छता का नया इंकलाब आने वाला है क्योंकि निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने कचरा प्रबंधन की लचर व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए अब तक का सबसे बड़ा 'सफाई सर्जिकल स्ट्राइक' प्लान लॉन्च कर दिया है। शहर को स्वच्छ सर्वेक्षण 2026 की ताजपोशी दिलाने के लिए निगमायुक्त ने खुद मैदान संभालते हुए नगर निगम वर्कशॉप पर धावा बोला और साफ शब्दों में अल्टीमेटम दे दिया है कि नए साल की पहली सुबह यानी 1 जनवरी से शहर की गलियों में कचरा गाड़ियों की मनमानी का पूरी तरह अंत हो जाएगा। निगमायुक्त के इस कड़े और आक्रामक तेवर ने निगम के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि अब केवल काम होगा, कोई बहाना नहीं चलेगा। वर्कशॉप के औचक निरीक्षण के दौरान जिस तरह निगमायुक्त ने कमियों पर अफसरों को आड़े हाथों लिया, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि जबलपुर को देश के स्वच्छतम शहरों की सूची में शीर्ष पर लाने के लिए प्रशासन अब किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
इस पूरे मिशन में सबसे बड़ा उलटफेर जवाबदेही को लेकर किया गया है, जहां अब मुख्य स्वच्छता निरीक्षकों को दफ्तरों से खींचकर सीधे सड़कों पर तैनात कर दिया गया है। अब तक कचरा गाड़ियों के खराब होने या गायब रहने पर जो अधिकारी पल्ला झाड़ लेते थे, उनकी गर्दन अब सीधे तौर पर फंसने वाली है क्योंकि गाड़ियों की फिटनेस और उनके समय पर संचालन की पूरी जिम्मेदारी अब स्वच्छता निरीक्षकों के कंधों पर डाल दी गई है। निगमायुक्त ने 'डेली रिपोर्टिंग' का ब्रह्मास्त्र चलाते हुए निर्देश दिए हैं कि हर दिन गाड़ियों की पल-पल की स्थिति लिखित में सहायक स्वास्थ्य अधिकारी को देनी होगी। इस नई व्यवस्था का सीधा मतलब यह है कि अगर किसी वार्ड में कचरा गाड़ी नहीं पहुँची, तो शाम होते-होते उस इलाके के निरीक्षक की जवाबदेही तय हो जाएगी, जिससे काम में टालमटोल की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई है।
सबसे बड़ा प्रहार उन लापरवाह ड्राइवरों पर होने जा रहा है जो अक्सर निर्धारित रूटों से गायब रहकर अपनी मनमर्जी करते थे। निगमायुक्त ने खुलेआम चेतावनी जारी कर दी है कि जो ड्राइवर रूट का पालन नहीं करेगा या कचरा संग्रहण में कोताही बरतेगा, उसे एक झटके में नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। अनुशासन का आलम यह होगा कि अब हर कचरा गाड़ी का मीटर चालू होना अनिवार्य है, ताकि नगर निगम प्रशासन मुख्यालय से ही यह ट्रैक कर सके कि कौन सी गाड़ी कितने किलोमीटर चली और उसने शहर के किन हिस्सों को कवर किया। इसके साथ ही, स्वच्छता जिंगल (गीत) को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए हैं—अब गाड़ी का जिंगल बंद करना ड्राइवर को भारी पड़ेगा क्योंकि यही वह आवाज है जो नागरिकों को सफाई की दस्तक का एहसास कराती है।
स्वच्छता के अंतरराष्ट्रीय मानकों को जबलपुर की गलियों में उतारने के लिए अब हर कचरा गाड़ी में 'पंचतत्व' यानी 5 डस्टबिन का होना अनिवार्य कर दिया गया है। यह जबलपुर के इतिहास में कचरा पृथक्करण का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे गीला, सूखा और हानिकारक कचरा स्रोत पर ही अलग-अलग हो सकेगा। निगमायुक्त के इस औचक निरीक्षण और सख्त निर्देशों ने वर्कशॉप से लेकर वार्ड कार्यालयों तक में खलबली मचा दी है। 1 जनवरी की डेडलाइन ने अधिकारियों की रातें काली कर दी हैं क्योंकि अब वर्कशॉप विभाग तकनीकी खराबी का पुराना राग नहीं अलाप पाएगा। निगमायुक्त का यह मास्टर प्लान बता रहा है कि जबलपुर इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण 2026 की जंग जीतने के लिए न केवल तैयार है, बल्कि किसी भी तरह की लापरवाही को कुचलने का मन बना चुका है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

