भीड़भाड़ से दूर सुकून की तलाश में हैं तो नए साल के स्वागत के लिए उत्तराखंड का लैंडोर होगा सबसे बेहतरीन डेस्टिनेशन

भीड़भाड़ से दूर सुकून की तलाश में हैं तो नए साल के स्वागत के लिए उत्तराखंड का लैंडोर होगा सबसे बेहतरीन डेस्टिनेशन

प्रेषित समय :19:46:06 PM / Sat, Dec 27th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

साल 2025 अब अपनी अंतिम सांसें ले रहा है और कैलेंडर के पन्ने पलटने के साथ ही हम नए साल 2026 की दहलीज पर खड़े हैं. हर साल की तरह इस बार भी लोगों के मन में जश्न को लेकर उत्साह तो है, लेकिन एक बड़ा सवाल भी साथ खड़ा है कि आखिर नए साल का स्वागत किया कहाँ जाए? आमतौर पर जब भी नए साल के सेलिब्रेशन की बात आती है, तो हमारे जेहन में गोवा के वो शोर-शराबे वाले समुद्र तट या मनाली और शिमला की सड़कों पर घंटों लगा रहने वाला ट्रैफिक जाम उभर आता है. अगर आप भी इस बार उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं जो डिस्को लाइट्स और कान फोड़ देने वाले संगीत के बजाय खुले आसमान के नीचे तारों की छांव और पहाड़ों की ठंडी हवाओं के बीच एक शांत शुरुआत करना चाहते हैं, तो यह खबर आपकी जिज्ञासा को शांत करने और आपके नए साल के प्लान को एक नया मोड़ देने के लिए ही है.

लैंडोर की शांत वादियों में नए साल का जश्न मनाने का विचार जितना लुभावना है, वहां की यात्रा की योजना बनाना उतना ही दिलचस्प. मसूरी के ठीक ऊपर बसा यह इलाका अपनी सीमित पहुंच और 'नो-हॉर्न' जोन की वजह से आज भी अपनी शुद्धता बनाए हुए है. अगर आप 2026 के स्वागत के लिए लैंडोर जा रहे हैं, तो रुकने के ठिकानों और वहां पहुँचने के रास्तों की यह विस्तृत जानकारी आपकी यात्रा को सुगम बना देगी.

लैंडोर पहुँचने के सबसे सुगम रास्ते
लैंडोर जाने के लिए सबसे पहले आपको उत्तराखंड के प्रवेश द्वार देहरादून पहुँचना होगा. यहाँ से आगे का सफर पहाड़ों की घुमावदार सड़कों से होकर गुजरता है:

हवाई मार्ग द्वारा: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जौली ग्रांट (देहरादून) है. यहाँ से लैंडोर की दूरी लगभग 60-65 किलोमीटर है. एयरपोर्ट से आप सीधी टैक्सी ले सकते हैं, जो करीब 2.5 से 3 घंटे में आपको लैंडोर पहुँचा देगी.

रेल मार्ग द्वारा: देहरादून रेलवे स्टेशन देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है. स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको मसूरी और लैंडोर के लिए बसें और प्राइवेट टैक्सियाँ आसानी से मिल जाती हैं.

सड़क मार्ग द्वारा (स्वयं के वाहन से): यदि आप दिल्ली या एनसीआर से आ रहे हैं, तो दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे एक बेहतरीन विकल्प है. देहरादून पहुँचने के बाद आपको मसूरी की ओर बढ़ना होगा. ध्यान रहे, लैंडोर जाने के लिए आपको मसूरी के मुख्य 'मॉल रोड' के बजाय 'किंकरेग' (Kingcraig) से सीधे 'पिक्चर पैलेस' की ओर मुड़ना होगा. वहां से चढ़ाई थोड़ी खड़ी है, इसलिए गाड़ी के ब्रेक और टायर्स की जांच पहले ही कर लें.

ठहरने के लिए बेहतरीन होमस्टे और लॉज
लैंडोर में बड़े होटलों के बजाय 'कटेज' और 'होमस्टे' का चलन ज्यादा है, जो आपको पहाड़ी जीवन का असली अनुभव देते हैं. यहाँ कुछ बेहतरीन विकल्प दिए गए हैं:

लाल टिब्बा होमस्टे: यह लैंडोर के सबसे ऊंचे बिंदु के करीब स्थित है. यहाँ से हिमालय की चोटियों का नजारा सबसे साफ दिखता है. यह उन लोगों के लिए बेस्ट है जो सुबह उठते ही बर्फीले पहाड़ों को देखना चाहते हैं.

द आइवी बैंक (The Ivy Bank): यह एक ऐतिहासिक ब्रिटिशकालीन बंगला है जिसे अब होमस्टे में बदल दिया गया है. यदि आप पुराने जमाने के फर्नीचर, चिमनी और बड़े बागानों के शौकीन हैं, तो यह जगह आपको बहुत पसंद आएगी.

रॉकबी मैनर (Rokeby Manor): हालांकि यह एक लग्जरी होटल की श्रेणी में आता है, लेकिन इसका अनुभव किसी भव्य घर जैसा ही है. 1840 में बनी यह इमारत अपने 'विक्टोरियन' स्टाइल और लाजवाब खाने (विशेषकर इनके बेकरी आइटम्स) के लिए मशहूर है.

एल्थोप होमस्टे (Althope): अगर आप एकांत चाहते हैं, तो यह एक छोटा और शांत ठिकाना है. यहाँ के मेजबान आपको स्थानीय कहानियों और घर के बने ताजे खाने से रूबरू कराएंगे.

ला विला बेला (La Villa Bella): यह होमस्टे अपनी बालकनी से दिखने वाले 'विंटर लाइन' के नजारे के लिए जाना जाता है. नए साल की शाम को यहाँ बैठकर सूर्यास्त देखना एक जादुई अनुभव होता है.

महत्वपूर्ण सुझाव (Travel Tips)
पार्किंग की समस्या: लैंडोर में सड़कों की चौड़ाई बहुत कम है और पार्किंग बहुत सीमित है. इसलिए अपने होमस्टे या होटल से पहले ही पुष्टि कर लें कि उनके पास पार्किंग की सुविधा है या नहीं.

पैदल चलने की तैयारी: लैंडोर का असली आनंद पैदल घूमने में ही है. 'सिस्टर्स बाजार' से लेकर 'चार दुकान' तक की सैर करने के लिए आरामदायक जूते साथ रखें.

भीषण ठंड: दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरुआत में यहाँ तापमान -2°C तक गिर सकता है. भारी ऊनी कपड़े, दस्ताने और थर्मल पहनना न भूलें.

एडवांस बुकिंग: नए साल के समय यहाँ 100% ऑक्युपेंसी रहती है, इसलिए कम से कम 15-20 दिन पहले अपनी बुकिंग सुरक्षित कर लें.

लैंडोर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक आप 'चार दुकान' की बेंच पर बैठकर वहां के लजीज व्यंजनों का स्वाद न चख लें. यह जगह दशकों से पर्यटकों और स्थानीय लोगों की पसंदीदा रही है. दिलचस्प बात यह है कि यहाँ नाम के अनुसार वास्तव में चार मुख्य दुकानें ही हुआ करती थीं, जो आज एक बड़े फूड हब में बदल चुकी हैं, लेकिन इनका ऐतिहासिक अहसास आज भी बरकरार है.

यहाँ के वे खास व्यंजन जिन्हें आपको बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए:

1. बन-मस्का और होममेड जैम
यह यहाँ का सबसे क्लासिक नाश्ता है. ताजे गर्म बन को बीच से काटकर उसमें मक्खन (मस्का) की मोटी परत लगाई जाती है. इसके साथ यहाँ का खास 'पीच एंड एप्रिकॉट' (आड़ू और खुबानी) का घर पर बना जैम परोसा जाता है. मक्खन की नमकीनियत और जैम की मिठास का संगम पहाड़ी सुबह को यादगार बना देता है.

2. अदरक-नींबू-शहद वाली चाय (Ginger Lemon Honey Tea)
लैंडोर की कड़कड़ाती ठंड में यह ड्रिंक किसी अमृत से कम नहीं है. ताजे अदरक, नींबू के रस और शुद्ध शहद से बनी यह चाय न केवल आपको गर्माहट देती है, बल्कि पहाड़ों की ताजी हवा के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. यदि आप कॉफी के शौकीन हैं, तो यहाँ की फिल्टर कॉफी भी बहुत मशहूर है.

3. रॉकबी मैनर की 'स्टिकर' और बेक्ड आइटम्स
चार दुकान के ठीक बगल में स्थित लैंडोर बेकहाउस की 'स्टिकर' (Sticky Toffee Pudding) और 'एप्पल पाई' पूरी दुनिया में मशहूर है. यहाँ के बिस्कुट, ताजी बनी ब्रेड और मफिन्स की खुशबू पूरे इलाके में महकती रहती है. अगर आप मीठा खाने के शौकीन हैं, तो यहाँ की हॉट चॉकलेट और क्रिसमस केक (नए साल के दौरान खास) जरूर ट्राई करें.

4. चीज मैगी और व्हाइट सॉस पास्ता
पहाड़ों में मैगी का अपना ही एक अलग मजा है, लेकिन चार दुकान की 'मसाला चीज मैगी' का स्वाद थोड़ा हटकर है. यहाँ प्रचुर मात्रा में चीज और ताजी सब्जियों का उपयोग किया जाता है. साथ ही, यहाँ का व्हाइट सॉस पास्ता अपनी क्रीमी बनावट और ताजे हर्ब्स की वजह से युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है.

5. मसाला ऑमलेट और पेनकेक्स
सुबह के नाश्ते के लिए यहाँ का भारी-भरकम मसाला ऑमलेट और बनाना-नूटेला पेनकेक्स बेहतरीन विकल्प हैं. पेनकेक्स इतने नरम और स्वाद से भरपूर होते हैं कि वे मुँह में जाते ही घुल जाते हैं.

6. मशहूर गार्लिक टोस्ट
अगर आप कुछ हल्का और कुरकुरा खाना चाहते हैं, तो यहाँ का गार्लिक टोस्ट जरूर आर्डर करें. इसे ताजी लहसुन की चटनी और मक्खन के साथ ग्रिल किया जाता है, जो चाय के साथ एक परफेक्ट स्नैक साबित होता है.

एक जरूरी सलाह: यहाँ की दुकानों पर अक्सर भीड़ होती है, इसलिए थोड़ा धैर्य रखें. यहाँ का असली मजा लकड़ी की बेंच पर बैठकर, पहाड़ों की धूप सेंकते हुए और धीमी गति से खाने का ही है.  

लैंडोर के बारे में सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहां के असली नजारे सड़कों पर नहीं, बल्कि उन 'पगडंडियों' (Trails) पर छिपे हैं जहां गाड़ियां नहीं जा सकतीं. अगर आप नए साल 2026 के पहले सूर्यास्त को बिना किसी शोर-शराबे के देखना चाहते हैं, तो इन रास्तों को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें:

1. परी टिब्बा (Pari Tibba) - 'द विचेस हिल'
रस्किन बॉन्ड की कहानियों में अक्सर जिक्र होने वाला 'परी टिब्बा' लैंडोर के सबसे रहस्यमयी और खूबसूरत रास्तों में से एक है. यह सर्किट हाउस के पास से शुरू होता है और घने बांज (Oak) और देवदार के जंगलों से होकर गुजरता है. इसे 'विचेस हिल' भी कहा जाता है क्योंकि यहां अक्सर बिजली गिरती रहती है.

खासियत: यहां से आपको दून घाटी और हिमालय की चोटियों का 360-डिग्री व्यू मिलता है. सूर्यास्त के समय जब पूरी घाटी नीचे जगमगाने लगती है, तो नजारा अलौकिक होता है.

2. सिस्टर्स बाजार से लाल टिब्बा (The Upper Chakkar)
यह एक गोल रास्ता है जिसे स्थानीय लोग 'अपर चक्कर' कहते हैं. यह सिस्टर्स बाजार से शुरू होकर लाल टिब्बा की ओर जाता है. लाल टिब्बा लैंडोर का सबसे ऊंचा पॉइंट है.

खासियत: ज्यादातर पर्यटक लाल टिब्बा पर भीड़ लगाते हैं, लेकिन अगर आप इस रास्ते पर पैदल चलेंगे, तो आपको रास्ते में कई ऐसी जगहें मिलेंगी जहां कोई नहीं होता. यहां से बंदरपूँछ, गंगोत्री और यमुनोत्री की चोटियां साफ नजर आती हैं.

3. रॉकबी मैनर से सेंट पॉल चर्च ट्रेल
यह छोटा सा रास्ता रॉकबी मैनर के पास से शुरू होता है और आपको सीधे पुराने जमाने के 'सेंट पॉल चर्च' तक ले जाता है.

खासियत: यह रास्ता देवदार के ऊंचे पेड़ों से ढका रहता है. दोपहर के समय जब पेड़ों के बीच से छनकर धूप आती है, तो यह फोटोग्राफी के लिए सबसे बेहतरीन जगह बन जाती है.

4. विंटर लाइन देखने का 'सीक्रेट स्पॉट'
लैंडोर में 'विंटर लाइन' (क्षितिज पर बनने वाली नारंगी रेखा) देखने के लिए 'कैसल हिल' के पीछे का रास्ता सबसे बेस्ट है.

खासियत: शाम के 5:00 से 5:45 के बीच जब सूरज ढल रहा होता है, तो यहां से आसमान किसी पेंटिंग जैसा नजर आता है. मसूरी की मुख्य सड़कों पर इसके लिए बहुत भीड़ होती है, लेकिन कैसल हिल के रास्तों पर आप शांति से इस नजारे को निहार सकते हैं.

कुछ जरूरी बातें:
जल्दी निकलें: पहाड़ों में शाम 5 बजे के बाद अंधेरा बहुत तेजी से होता है, इसलिए सूर्यास्त देखने के लिए कम से कम 1 घंटा पहले अपनी पसंद की जगह पर पहुँच जाएं.

टॉर्च साथ रखें: वापसी में रास्तों पर स्ट्रीट लाइट नहीं होती, इसलिए अपने फोन की बैटरी फुल रखें या छोटी टॉर्च साथ ले जाएं.

शांति बनाए रखें: लैंडोर एक 'साइलेंस जोन' की तरह है. यहां की शांति ही इसकी खूबसूरती है, इसलिए जंगलों में तेज संगीत न बजाएं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-