अश्लील और गैरकानूनी कंटेंट पर केंद्र का कड़ा प्रहार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सख्त चेतावनी, लापरवाही पर कानूनी कार्रवाई

अश्लील और गैरकानूनी कंटेंट पर केंद्र का कड़ा प्रहार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सख्त चेतावनी, लापरवाही पर कानूनी कार्रवाई

प्रेषित समय :22:24:48 PM / Tue, Dec 30th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से बढ़ते अश्लील, अभद्र और गैरकानूनी कंटेंट को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों को सख्त चेतावनी जारी की है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि प्लेटफॉर्म्स अपने यहां प्रसारित हो रहे अश्लील, पोर्नोग्राफिक, बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री और अन्य अवैध कंटेंट के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ कानून के तहत कड़े कदम उठाए जाएंगे। यह चेतावनी 29 दिसंबर, 2025 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी एक एडवाइजरी के माध्यम से दी गई है, जिसमें सभी डिजिटल इंटरमीडियरीज को अपने कंप्लायंस फ्रेमवर्क की तत्काल समीक्षा करने और कानूनी जिम्मेदारियों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

सरकार की यह एडवाइजरी ऐसे समय पर आई है, जब सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आपत्तिजनक सामग्री की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। खास तौर पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण की सामग्री, महिलाओं के प्रति अभद्र और अपमानजनक पोस्ट, अश्लील वीडियो, डीपफेक और आपत्तिजनक रील्स को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों से गंभीर चिंता जताई जा रही है। मंत्रालय का कहना है कि तकनीक के तेज प्रसार के साथ कंटेंट की मॉडरेशन एक बड़ी चुनौती बन गई है, लेकिन यह प्लेटफॉर्म कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे कानून के दायरे में रहते हुए सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराएं।

एडवाइजरी में MeitY ने साफ शब्दों में कहा है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों और अन्य ऑनलाइन इंटरमीडियरीज पर यह कानूनी दायित्व है कि वे अपने प्लेटफॉर्म्स पर होस्ट किए जा रहे कंटेंट की निगरानी करें और गैरकानूनी सामग्री को समय रहते हटाएं। मंत्रालय ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया है कि बाल यौन शोषण से जुड़ी किसी भी प्रकार की सामग्री को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म्स को तुरंत कार्रवाई करनी होगी, साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करना होगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल कंटेंट हटाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्लेटफॉर्म्स को मजबूत शिकायत निवारण तंत्र, प्रभावी मॉडरेशन सिस्टम और तकनीकी उपाय अपनाने होंगे, ताकि इस तरह की सामग्री के अपलोड होने से पहले ही उसे रोका जा सके। एडवाइजरी में ऑटोमेटेड टूल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉडरेशन सिस्टम और मानव निगरानी के बेहतर संयोजन पर भी जोर दिया गया है। मंत्रालय का मानना है कि तकनीक के सही उपयोग से अवैध और अश्लील कंटेंट के प्रसार पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

केंद्र सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया कंपनियां अक्सर ‘सेफ हार्बर’ के प्रावधानों का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती हैं, लेकिन यदि वे कानून का पालन नहीं करतीं, तो उन्हें इस संरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। एडवाइजरी में चेतावनी दी गई है कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में प्लेटफॉर्म्स पर जुर्माना, कानूनी कार्रवाई और अन्य दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। सरकार ने यह संकेत भी दिया है कि जरूरत पड़ने पर और सख्त नियम लाने से भी परहेज नहीं किया जाएगा।

डिजिटल स्पेस में बढ़ती अश्लीलता को लेकर लंबे समय से सामाजिक संगठनों, महिला अधिकार समूहों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही थी। कई मामलों में देखा गया है कि आपत्तिजनक कंटेंट लंबे समय तक ऑनलाइन बना रहता है, जिससे पीड़ितों को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक नुकसान झेलना पड़ता है। सरकार का मानना है कि ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म्स की ढिलाई अस्वीकार्य है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।

एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि प्लेटफॉर्म्स को अपने यूजर्स को स्पष्ट कम्युनिटी गाइडलाइंस के बारे में जानकारी देनी चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। बार-बार नियम तोड़ने वाले अकाउंट्स को सस्पेंड या ब्लॉक करने, फर्जी अकाउंट्स पर लगाम लगाने और शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता लाने के निर्देश भी दिए गए हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि यूजर्स की शिकायतों का समयबद्ध और संवेदनशील तरीके से निपटारा किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि भारत जैसे देश में, जहां सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, वहां सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम बेहद जरूरी है। हालांकि, कुछ तकनीकी विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कंटेंट मॉडरेशन एक जटिल प्रक्रिया है और इसके लिए प्लेटफॉर्म्स को पर्याप्त संसाधन और स्पष्ट दिशानिर्देशों की जरूरत होती है। इसके बावजूद, कानून के पालन में कोई ढील नहीं दी जा सकती।

सरकार की इस चेतावनी के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सोशल मीडिया कंपनियां किस तरह से अपने सिस्टम और नीतियों में बदलाव करती हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्लेटफॉर्म्स वास्तव में अश्लील और गैरकानूनी कंटेंट के खिलाफ सख्त कदम उठाते हैं या फिर सरकार को और कड़े उपाय अपनाने पड़ते हैं। फिलहाल, केंद्र सरकार का संदेश साफ है कि डिजिटल आजादी के नाम पर कानून और सामाजिक जिम्मेदारी की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ऑनलाइन दुनिया को सुरक्षित बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-