विजय हजारे ट्रॉफी में चयन की जंग, न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए छह खिलाड़ी बने मजबूत दावेदार

विजय हजारे ट्रॉफी में चयन की जंग, न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए छह खिलाड़ी बने मजबूत दावेदार

प्रेषित समय :21:50:47 PM / Wed, Dec 31st, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. घरेलू क्रिकेट का प्रतिष्ठित टूर्नामेंट विजय हजारे ट्रॉफी इस बार सिर्फ खिताब की लड़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय वनडे टीम में जगह बनाने का सबसे बड़ा मंच बनकर उभरा है. न्यूजीलैंड के खिलाफ 11 जनवरी से शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान 3 या 4 जनवरी को होने की संभावना है. ऐसे में चयनकर्ताओं की नजरें विजय हजारे ट्रॉफी में चल रहे हर मुकाबले और हर प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं. इस सीजन में कई खिलाड़ियों ने बल्ले और गेंद से ऐसा दमदार प्रदर्शन किया है कि वे सीधे तौर पर राष्ट्रीय टीम के दरवाजे पर दस्तक देते नजर आ रहे हैं.

घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए विजय हजारे ट्रॉफी हमेशा से वनडे चयन की सीढ़ी रही है. इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही हैं. टीम इंडिया के नियमित खिलाड़ियों में से कुछ के चोटिल होने और कुछ के कार्यभार प्रबंधन के चलते चयनकर्ताओं के सामने नए चेहरों को आजमाने का मौका है. इसी वजह से यह टूर्नामेंट खिलाड़ियों के लिए खुद को साबित करने का सुनहरा अवसर बन गया है.

इस सीजन का सबसे बड़ा नाम कर्नाटक के बाएं हाथ के बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल का रहा है. उन्होंने चार मैचों में 408 रन बनाकर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है. तीन शतक और 102 की औसत के साथ उनका प्रदर्शन न सिर्फ आंकड़ों में बल्कि प्रभाव के लिहाज से भी शानदार रहा है. स्ट्राइक रेट 106 के आसपास रहना यह दिखाता है कि वह आधुनिक वनडे क्रिकेट की मांग के मुताबिक तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं. रोहित शर्मा और शुभमन गिल के ओपनिंग स्लॉट लगभग तय माने जा रहे हैं, जबकि विराट कोहली नंबर तीन पर बल्लेबाजी करेंगे. ऐसे में नंबर चार का स्थान फिलहाल खाली नजर आ रहा है. श्रेयस अय्यर की फिटनेस को लेकर अनिश्चितता के बीच पडिक्कल ने खुद को इस भूमिका के लिए मजबूत विकल्प के तौर पर पेश किया है.

बल्लेबाजी विभाग में ही एक और नाम जिसने लगातार सुर्खियां बटोरी हैं, वह है तमिलनाडु के युवा बल्लेबाज साई सुदर्शन का. उन्होंने दबाव में रन बनाने की अपनी क्षमता से सभी को प्रभावित किया है. मुश्किल परिस्थितियों में संयम के साथ खेलते हुए बड़ी पारियां खेलना उनकी खासियत रही है. चयनकर्ता ऐसे बल्लेबाजों को तरजीह देते हैं जो वनडे क्रिकेट में पारी को संभालने के साथ जरूरत पड़ने पर आक्रामक भी हो सकें, और सुदर्शन इस कसौटी पर खरे उतरते नजर आए हैं.

मध्यक्रम की मजबूती के लिहाज से मुंबई के कप्तान श्रेयस अय्यर की अनुपस्थिति में कुछ नए चेहरों ने दावेदारी ठोकी है. केरल के संजू सैमसन का नाम भी चर्चा में है, जिन्होंने विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर लगातार रन बनाए हैं. सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी आक्रामकता और अनुभव टीम को संतुलन प्रदान कर सकता है. इसके अलावा, विकेटकीपिंग का विकल्प होना चयनकर्ताओं के लिए अतिरिक्त लाभ बन सकता है.

गेंदबाजी की बात करें तो इस विजय हजारे ट्रॉफी में तेज गेंदबाजों ने खासा असर छोड़ा है. मध्य प्रदेश के आवेश खान ने अपनी रफ्तार और सटीकता से बल्लेबाजों को परेशान किया है. नई गेंद से विकेट निकालने और डेथ ओवरों में रन रोकने की उनकी क्षमता उन्हें वनडे टीम के लिए उपयोगी बनाती है. न्यूजीलैंड जैसी मजबूत बल्लेबाजी वाली टीम के खिलाफ ऐसे गेंदबाजों की अहमियत और बढ़ जाती है.

स्पिन विभाग में भी कुछ खिलाड़ियों ने चयन की रेस में खुद को आगे किया है. राजस्थान के लेग स्पिनर रवि बिश्नोई ने अपनी विविधता और नियंत्रण से लगातार विकेट झटके हैं. वनडे क्रिकेट में बीच के ओवरों में विकेट लेना मैच का रुख बदल सकता है, और बिश्नोई इस भूमिका में फिट बैठते हैं. उनकी गेंदों में फ्लाइट और गति का मिश्रण बल्लेबाजों के लिए चुनौती साबित हुआ है.

ऑलराउंडर की भूमिका में वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ियों की चर्चा भी हो रही है. बल्लेबाजी में उपयोगी योगदान देने के साथ-साथ किफायती स्पिन गेंदबाजी उनकी ताकत रही है. विजय हजारे ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन यह दिखाता है कि वह निचले क्रम में रन बना सकते हैं और साथ ही 10 ओवर का कोटा भरोसेमंद तरीके से पूरा कर सकते हैं. आधुनिक वनडे क्रिकेट में ऐसे ऑलराउंडरों की मांग लगातार बढ़ रही है.

कुल मिलाकर विजय हजारे ट्रॉफी का यह सीजन चयनकर्ताओं के लिए सुखद सिरदर्द लेकर आया है. हर विभाग में कई खिलाड़ी शानदार फॉर्म में हैं और सभी ने खुद को साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज को भविष्य की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है, जहां कुछ नए चेहरों को आजमाया जा सकता है. ऐसे में घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मौका मिलना लगभग तय माना जा रहा है.

चयन समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह अनुभव और फॉर्म के बीच संतुलन बनाए. विजय हजारे ट्रॉफी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय घरेलू क्रिकेट में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. अब देखना दिलचस्प होगा कि इनमें से किन छह खिलाड़ियों की मेहनत रंग लाती है और कौन-से नाम न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए भारतीय जर्सी पहनने में सफल होते हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-