नई दिल्ली। पुरुष-प्रधान समाज और परंपरागत सोच की सीमाओं को तोड़ते हुए अगर कोई भारतीय महिला उद्यमिता की नई ऊंचाइयों को छूने में सफल हुई है, तो वह हैं शार्क टैंक इंडिया की जज और जेटसेटगो की संस्थापक कनीका टेकरीवाल। महज 21 वर्ष की उम्र में 5600 रुपये के निवेश से शुरू हुआ उनका सपना आज 420 करोड़ रुपये से अधिक की नेटवर्थ में तब्दील हो चुका है। यह कहानी सिर्फ आर्थिक सफलता की नहीं, बल्कि साहस, आत्मविश्वास और सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने की मिसाल है।
कनीका टेकरीवाल का नाम आज देश की सबसे कम उम्र की अमीर महिलाओं में गिना जाता है। हुरुन रिच लिस्ट में शामिल कनीका ने यह मुकाम ऐसे समय में हासिल किया, जब एक लड़की का एविएशन सेक्टर में आगे बढ़ना भी समाज के लिए असहज करने वाला विचार माना जाता था। कनीका का सपना बचपन से ही आसमान से जुड़ा था। उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि जब वह केवल चार साल की थीं और पहली बार एक हेलीकॉप्टर को उतरते देखा, तभी उनके मन में उड़ान भरने का सपना जन्म ले चुका था।
कनीका पायलट बनना चाहती थीं। वह कॉकपिट में बैठकर आसमान को करीब से देखना चाहती थीं, लेकिन उनकी यह चाहत परिवार की सोच से टकरा गई। मारवाड़ी परिवार की पारंपरिक मानसिकता के चलते उन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि “तू ड्राइवर बनेगी?” इस एक वाक्य ने कनीका के सपने की दिशा जरूर बदली, लेकिन उन्हें जमीन पर नहीं उतारा। यही अस्वीकार उनके लिए प्रेरणा बन गया। उन्होंने तय कर लिया कि अगर वह खुद विमान नहीं उड़ा सकतीं, तो एविएशन की दुनिया में कुछ ऐसा जरूर करेंगी, जो देश में पहले कभी नहीं हुआ हो।
समय के साथ कनीका के दिमाग में एक अनोखा विचार जन्मा—आसमान के लिए उबर जैसा प्लेटफॉर्म। निजी जेट खरीदकर उन्हें किराए पर देना, लेकिन पूरी पारदर्शिता और पेशेवर प्रबंधन के साथ। यह विचार जितना क्रांतिकारी था, उतना ही लोगों के लिए समझ से बाहर भी। 2014 में, जब स्टार्टअप संस्कृति अभी शुरुआती दौर में थी, तब 21 साल की कनीका ने जेटसेटगो की नींव रखी। उस समय उनके पास न तो बड़े निवेशक थे, न ही उद्योग का समर्थन, सिर्फ एक साफ दृष्टि और खुद पर भरोसा था।
शुरुआती दिन आसान नहीं थे। खुद कनीका ने स्वीकार किया है कि जब उन्होंने अपना बिजनेस शुरू किया, तब शायद ही कोई इसे समझ पाया। एक ओर वह कम उम्र की थीं, दूसरी ओर एक महिला, और तीसरी ओर ऐसा सेक्टर, जहां पुरुषों का वर्चस्व था। वह जब एयरपोर्ट पर विमान देखने जाती थीं, तो लोग अक्सर उन्हें केबिन क्रू समझ लेते थे। कई बार उनसे पूछा जाता था कि वह फ्लाइट अटेंडेंट हैं या नहीं। कनीका इन पलों को अपमान नहीं, बल्कि समाज की सोच का प्रतिबिंब मानती थीं और मुस्कुराकर आगे बढ़ जाती थीं।
उस दौर में जब हर स्टार्टअप फंडिंग के पीछे भाग रहा था, कनीका ने भी निवेश जुटाने की कोशिश की। लेकिन हर दरवाजा उनके लिए बंद होता चला गया। उनसे बार-बार पूछा गया कि मार्केट साइज क्या है, प्राइवेट एविएशन भारत में कितना बड़ा हो सकता है। ज्यादातर निवेशकों ने उनके विचार को अव्यावहारिक मानकर नकार दिया। सिर्फ एक व्यक्ति ने उन पर भरोसा दिखाया, लेकिन कनीका आज मानती हैं कि फंडिंग न मिलना ही उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बन गया।
उन्होंने कभी बड़े निवेश पर निर्भर हुए बिना अपने बिजनेस को खड़ा किया। आज भी कनीका गर्व से कहती हैं कि उन्होंने कुल मिलाकर सिर्फ 5600 रुपये का निजी निवेश किया और उसी के दम पर भारत के सबसे बड़े प्राइवेट जेट बेड़े का संचालन कर रही हैं। जेटसेटगो आज तक एक लाख से अधिक यात्रियों को सेवा दे चुका है और 6000 से ज्यादा उड़ानों का संचालन कर चुका है। कंपनी के पास नौ प्राइवेट जेट और दो हेलीकॉप्टर हैं, जो इसे निजी विमानन क्षेत्र में अग्रणी बनाते हैं।
जेटसेटगो अब सिर्फ चार्टर फ्लाइट कंपनी नहीं रही। यह एयरक्राफ्ट मैनेजमेंट, ओनरशिप गाइडेंस, एक्सक्लूसिव मेंबरशिप प्रोग्राम और भविष्य की एविएशन तकनीक पर भी काम कर रही है। कंपनी इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट और वर्टिकल टेक-ऑफ सिस्टम जैसी आधुनिक संभावनाओं की तैयारी कर रही है। कनीका का विजन साफ है—भारत में प्राइवेट एविएशन को सुरक्षित, पारदर्शी और सुलभ बनाना।
शार्क टैंक इंडिया में जब कनीका टेकरीवाल ने अपनी कहानी साझा की, तो वह लाखों युवाओं, खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गईं। बिना ऊंची आवाज, बिना आक्रामकता, सिर्फ आत्मविश्वास और तथ्यों के साथ उन्होंने दिखाया कि नेतृत्व का मतलब सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि दृष्टि और धैर्य भी होता है। उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि सामाजिक सीमाएं तभी तक होती हैं, जब तक हम उन्हें स्वीकार करते हैं।
आज 420 करोड़ रुपये की नेटवर्थ के साथ कनीका टेकरीवाल न सिर्फ एक सफल उद्यमी हैं, बल्कि उस पीढ़ी की आवाज भी हैं, जो सपनों को पंख देने से पहले अनुमति नहीं मांगती। एक लड़की, जिसे कभी पायलट बनने से रोका गया था, आज पूरे देश के एविएशन सेक्टर को नई दिशा दे रही है। उनकी कहानी बताती है कि अगर हौसले मजबूत हों, तो आसमान भी सीमा नहीं होता।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

