नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे विस्फोटक बल्लेबाज़ों में शुमार शेफाली वर्मा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह केवल ताक़तवर शॉट्स खेलने वाली खिलाड़ी नहीं, बल्कि समय के साथ अपने खेल को ढालने वाली परिपक्व क्रिकेटर भी हैं। श्रीलंका के खिलाफ वर्ष के अंत में खेली गई पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में शेफाली ने अपने खेल का ऐसा बदला हुआ और विकसित रूप पेश किया, जिसने 2026 के लिए भारतीय क्रिकेट को नई उम्मीदें दे दी हैं। यह प्रदर्शन सिर्फ रन बनाने का नहीं था, बल्कि यह इस बात का संकेत था कि शेफाली अब परिस्थितियों के अनुसार अपनी बल्लेबाज़ी के गियर बदलना जानती हैं।
श्रीलंका के खिलाफ इस सीरीज़ में भारत ने 5-0 से क्लीन स्वीप किया, लेकिन इस जीत की सबसे चमकदार कहानी शेफाली वर्मा रहीं। उन्होंने तीन मैचों में नाबाद 69, नाबाद 79 और 79 रनों की पारियां खेलते हुए कुल 241 रन बनाए। खास बात यह रही कि ये रन केवल आक्रामक अंदाज़ में नहीं, बल्कि संयम और समझदारी के साथ आए। 133 गेंदों में 181 से अधिक की स्ट्राइक रेट, 37 चौके और पांच छक्के—ये आंकड़े शेफाली की ताकत तो दर्शाते ही हैं, साथ ही यह भी बताते हैं कि अब वह हर गेंद पर हमला करने के बजाय हालात के अनुसार पारी गढ़ने लगी हैं।
टी20 फॉर्मेट हमेशा से शेफाली का पसंदीदा रहा है। श्रृंखला के बाद मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा भी कि टी20 उन्हें सबसे ज्यादा मज़ा देता है। लेकिन इस बार जो बदलाव दिखा, वह सिर्फ आनंद का नहीं था, बल्कि जिम्मेदारी का भी था। पहले शेफाली को अक्सर ‘हिट या मिस’ बल्लेबाज़ माना जाता था—या तो वह गेंदबाज़ों पर पूरी तरह हावी होती थीं या फिर जल्दी आउट हो जाती थीं। श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने यह धारणा बदलने की ठोस कोशिश की। उन्होंने दिखाया कि वह पावरप्ले में आक्रामक शुरुआत करने के बाद पारी को संभाल भी सकती हैं और अंत तक ले जाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा सकती हैं।
यह बदला हुआ शेफाली वर्मा अचानक सामने नहीं आया। इसके पीछे एक कठिन दौर और आत्ममंथन की कहानी छिपी है। 2024 के अंत में जब उन्हें भारतीय टीम से बाहर किया गया, तो यह उनके करियर का पहला बड़ा झटका था। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धमाकेदार शुरुआत करने वाली शेफाली के लिए यह दौर आसान नहीं था। खुद उन्होंने माना कि टीम से बाहर होना उन्हें भीतर तक चुभा। लेकिन यहीं से उनके खेल के नए अध्याय की शुरुआत हुई।
टीम से बाहर रहने के दौरान शेफाली ने अपने खेल की बारीकियों पर काम किया। उन्होंने एक बार फिर अपने पिता के साथ अभ्यास शुरू किया, ठीक वैसे ही जैसे शुरुआती दिनों में किया करती थीं। यह वापसी सिर्फ तकनीक सुधारने की नहीं थी, बल्कि मानसिक रूप से मजबूत होने की भी थी। उन्होंने यह समझा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबे समय तक टिके रहने के लिए सिर्फ ताक़त काफी नहीं होती, बल्कि निरंतरता, धैर्य और मैच की मांग के अनुसार खेलने की कला भी जरूरी होती है।
श्रीलंका के खिलाफ श्रृंखला में यही परिपक्वता साफ नजर आई। कुछ मैचों में जब गेंदबाज़ों ने कसी हुई शुरुआत की, तो शेफाली ने जोखिम भरे शॉट्स से परहेज़ किया और सिंगल-दो रन लेकर पारी को आगे बढ़ाया। वहीं, जैसे ही मौका मिला, उन्होंने अपनी ताक़त का इस्तेमाल करते हुए गेंदबाज़ों को बैकफुट पर धकेल दिया। यह संतुलन ही शेफाली वर्मा 2.0 की सबसे बड़ी पहचान बनता जा रहा है।
भारतीय महिला टीम के लिए यह बदलाव बेहद सकारात्मक संकेत है। आने वाले महीनों में भारत को ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अन्य मजबूत टीमों के खिलाफ खेलना है, जहां गेंदबाज़ी की गुणवत्ता कहीं ज्यादा होगी। ऐसे में शेफाली का यह विकसित रूप टीम के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। वह अब सिर्फ तेज़ शुरुआत देने वाली बल्लेबाज़ नहीं रहीं, बल्कि ऐसी खिलाड़ी बनती जा रही हैं जो पारी को आख़िरी ओवर तक ले जा सकती हैं।
शेफाली की इस नई सोच का असर उनके शॉट चयन में भी दिखा। पहले जहां वह अक्सर हवा में शॉट खेलने से नहीं हिचकिचाती थीं, वहीं अब उन्होंने ज़मीन पर खेले जाने वाले शॉट्स, गैप खोजने और फील्ड सेटिंग को पढ़ने पर ज्यादा ध्यान दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि उनके बड़े स्कोर भी आए और विकेट भी सुरक्षित रहा। यही कारण है कि वह तीन मैचों में नाबाद रहीं, जो टी20 जैसे तेज़ फॉर्मेट में उनकी बढ़ती मैच समझ को दर्शाता है।
टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं के लिए भी शेफाली का यह प्रदर्शन राहत भरा है। एक समय जिस खिलाड़ी को अनुशासन और निरंतरता की कमी के कारण बाहर बैठना पड़ा था, वही खिलाड़ी अब सीख लेकर और निखरकर लौटती दिख रही है। यह युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक संदेश है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सही दिशा में मेहनत करने का अवसर बन सकती है।
शेफाली वर्मा की यह वापसी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह मानसिक मजबूती, आत्मविश्वास और खुद को बेहतर बनाने की इच्छा की कहानी है। उन्होंने दिखा दिया है कि वह सिर्फ ‘पावर हिटर’ के खांचे में बंद नहीं रहना चाहतीं, बल्कि भारतीय टीम की भरोसेमंद ओपनर बनना चाहती हैं। 2026 की शुरुआत में उनका यह बदला हुआ रूप भारतीय महिला क्रिकेट के भविष्य के लिए बेहद शुभ संकेत है।
अगर यही निरंतरता और सीखने की भूख बरकरार रही, तो आने वाले समय में शेफाली वर्मा न केवल मैच विनर बनेंगी, बल्कि टी20 क्रिकेट में भारत की सबसे बड़ी ताक़तों में से एक के रूप में खुद को स्थापित करेंगी। श्रीलंका के खिलाफ यह श्रृंखला शायद बड़ी चुनौती नहीं थी, लेकिन इसने यह जरूर दिखा दिया कि शेफाली वर्मा अब सिर्फ तेज़ खेलने वाली बल्लेबाज़ नहीं, बल्कि समझदारी से जीत की कहानी लिखने वाली खिलाड़ी बन चुकी हैं।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

