भारत-बांग्लादेश के बिगड़ते राजनीतिक रिश्तों का असर क्रिकेट पर, द्विपक्षीय सीरीज पर संकट के बादल

भारत-बांग्लादेश के बिगड़ते राजनीतिक रिश्तों का असर क्रिकेट पर, द्विपक्षीय सीरीज पर संकट के बादल

प्रेषित समय :21:49:49 PM / Sat, Jan 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से चली आ रही क्रिकेटीय प्रतिद्वंद्विता और सहयोग पर अब राजनीतिक तनाव की छाया पड़ती नजर आ रही है. दोनों देशों के बीच बिगड़ते कूटनीतिक संबंधों के चलते प्रस्तावित द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं. हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि आने वाले समय में भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट संबंधों पर सीधा असर पड़ सकता है. खेल जगत में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि क्या राजनीतिक तनाव एक बार फिर खेल से ऊपर हावी होगा.

दरअसल, भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में उस समय तीखा मोड़ आया, जब अगस्त 2025 में बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से बेदखल कर दिया गया. राजनीतिक उथल-पुथल के बीच शेख हसीना भारत आ गई थीं, जिसके बाद बांग्लादेश की नई सत्ता संरचना और भारत के बीच रिश्तों में तल्खी बढ़ती चली गई. दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संवेदनशील मुद्दों ने इस घटनाक्रम के बाद और गंभीर रूप ले लिया. इसका असर अब केवल कूटनीतिक बैठकों और बयानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेल जैसे लोकप्रिय और जनभावनाओं से जुड़े क्षेत्र तक पहुंचता दिख रहा है.

क्रिकेट भारत और बांग्लादेश दोनों ही देशों में केवल एक खेल नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा विषय है. पिछले कुछ वर्षों में दोनों टीमों के बीच मुकाबले बेहद प्रतिस्पर्धी और रोमांचक रहे हैं. आईसीसी टूर्नामेंट से लेकर द्विपक्षीय सीरीज तक, भारत-बांग्लादेश मैचों ने दर्शकों को भरपूर रोमांच दिया है. लेकिन मौजूदा राजनीतिक हालात ने क्रिकेट प्रशंसकों की उम्मीदों पर पानी फेरने का खतरा पैदा कर दिया है.

सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड्स के बीच प्रस्तावित सीरीज को लेकर अनौपचारिक बातचीत जरूर हुई है, लेकिन राजनीतिक माहौल के कारण निर्णय टलते जा रहे हैं. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड इस स्थिति में बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं. कोई भी बोर्ड फिलहाल ऐसा कदम नहीं उठाना चाहता, जिससे राजनीतिक स्तर पर विवाद और गहरा जाए. इसी कारण सीरीज की तारीखों, कार्यक्रम और आयोजन स्थल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश की नई राजनीतिक व्यवस्था अभी स्थिर नहीं हुई है. देश के भीतर असंतोष, विरोध प्रदर्शन और सत्ता संतुलन की प्रक्रिया जारी है. ऐसे माहौल में किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की मेजबानी या उसमें भागीदारी को लेकर सुरक्षा और कूटनीतिक चिंताएं स्वाभाविक हैं. भारत की ओर से भी यह आशंका जताई जा रही है कि मौजूदा परिस्थितियों में खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन सकती है.

क्रिकेट जगत के जानकारों का कहना है कि भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट संबंधों का इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. कभी मैदान पर तनावपूर्ण मुकाबले, तो कभी खेल भावना की मिसाल—दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ कई यादगार पल देखे हैं. बावजूद इसके, राजनीतिक कारणों से यदि सीरीज रद्द या स्थगित होती है, तो यह दोनों देशों के क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ा झटका होगा.

इस पूरे घटनाक्रम में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की भूमिका पर भी नजर रखी जा रही है. हालांकि द्विपक्षीय सीरीज आईसीसी के सीधे नियंत्रण में नहीं होती, लेकिन क्रिकेट कूटनीति के स्तर पर आईसीसी अक्सर पर्दे के पीछे संतुलन साधने की कोशिश करता है. फिलहाल आईसीसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन हालात पर नजर बनाए रखने की बात जरूर कही जा रही है.

भारत में भी क्रिकेट प्रशंसकों के बीच इस मुद्दे को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. एक वर्ग का मानना है कि राजनीति को खेल से दूर रखा जाना चाहिए और दोनों देशों को क्रिकेट के जरिए संवाद का रास्ता खुला रखना चाहिए. वहीं दूसरा वर्ग यह तर्क दे रहा है कि राष्ट्रीय हित और सुरक्षा सर्वोपरि हैं और मौजूदा हालात में किसी भी तरह का जोखिम उठाना उचित नहीं होगा.

बांग्लादेश में भी क्रिकेट प्रेमियों के बीच चिंता का माहौल है. वहां क्रिकेट देश की पहचान और गौरव का प्रतीक बन चुका है. भारत के खिलाफ खेलना वहां के खिलाड़ियों के लिए हमेशा खास रहा है. यदि सीरीज पर संकट आता है, तो इसका असर न केवल खिलाड़ियों के मनोबल पर पड़ेगा, बल्कि देश की क्रिकेट अर्थव्यवस्था और प्रशंसकों की भावनाओं पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा.

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भारत-बांग्लादेश रिश्तों में सुधार की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन इसमें समय लग सकता है. जब तक दोनों देशों के बीच राजनीतिक स्तर पर संवाद और विश्वास बहाल नहीं होता, तब तक क्रिकेट जैसे बड़े आयोजनों पर अनिश्चितता बनी रह सकती है. इतिहास गवाह है कि दक्षिण एशिया में कई बार राजनीतिक तनावों ने खेल संबंधों को प्रभावित किया है और यह स्थिति उसी कड़ी का एक नया अध्याय बन सकती है.

फिलहाल, दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड आधिकारिक तौर पर स्थिति स्पष्ट करने से बच रहे हैं. न तो सीरीज के रद्द होने की पुष्टि की गई है और न ही इसके आयोजन को लेकर ठोस भरोसा जताया गया है. ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय क्रिकेट पूरी तरह ठप हो जाएगा, लेकिन इतना तय है कि मौजूदा राजनीतिक तनाव ने खेल के भविष्य पर सवालिया निशान जरूर लगा दिया है.

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक स्तर पर कोई सकारात्मक पहल होती है या नहीं. यदि रिश्तों में नरमी आती है, तो क्रिकेट एक बार फिर दोनों देशों को करीब लाने का माध्यम बन सकता है. लेकिन यदि राजनीतिक गतिरोध जारी रहा, तो इसका सीधा असर भारत-बांग्लादेश क्रिकेट संबंधों पर पड़ना तय माना जा रहा है. फिलहाल क्रिकेट प्रेमी अनिश्चितता के इस दौर में केवल उम्मीद लगाए बैठे हैं कि खेल भावना राजनीति से ऊपर उठे और मैदान पर फिर से रोमांचक मुकाबले देखने को मिलें.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-