कलेक्टर और निगमायुक्त ने खुद पानी पीकर जांची शहर की पेयजल गुणवत्ता, जल शोधन संयंत्रों का आकस्मिक निरीक्षण

कलेक्टर और निगमायुक्त ने खुद पानी पीकर जांची शहर की पेयजल गुणवत्ता, जल शोधन संयंत्रों का आकस्मिक निरीक्षण

प्रेषित समय :20:17:17 PM / Sat, Jan 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित और मानक स्तर का पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन और नगर निगम ने एक नई और अनुकरणीय मिसाल पेश की है. शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर बरती जा रही सतर्कता का प्रत्यक्ष प्रमाण शनिवार को तब देखने मिला जब जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने जल शोधन संयंत्रों का आकस्मिक निरीक्षण किया.

इस दौरान एक अभूतपूर्व दृश्य तब उभरा जब दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने न केवल संयंत्रों की तकनीकी कार्यप्रणाली को समझा बल्कि शोधित किए गए पानी को स्वयं पीकर उसकी गुणवत्ता की पुष्टि की. अधिकारियों का यह कदम जनता के बीच विश्वास बहाली और प्रशासनिक जवाबदेही का सशक्त संदेश माना जा रहा है. शहरवासियों को शुद्ध, सुरक्षित और मानक स्तर का पेयजल उपलब्ध कराने को लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम पूरी तरह सतर्क और सक्रिय नजर आ रहा है. 

रमनगरा, भोंगाद्वार और गौर नदी स्थित जल शोधन संयंत्रों में पहुंचकर दोनों अधिकारियों ने न केवल वहां की तकनीकी और व्यवस्थागत स्थिति का बारीकी से जायजा लिया, बल्कि स्वयं शुद्ध किया गया पानी पीकर उसकी गुणवत्ता की जांच भी की. अधिकारियों द्वारा मौके पर कराई गई लैब टेस्टिंग में पानी सभी आवश्यक मानकों पर खरा पाया गया, जिससे शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर संतोषजनक स्थिति सामने आई.

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जल शोधन प्रक्रिया, फिल्ट्रेशन सिस्टम, क्लोरीनेशन और वितरण नेटवर्क की विस्तार से जानकारी ली. उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा यह विषय अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए पेयजल की शुद्धता में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने निर्देश दिए कि जल शोधन संयंत्रों में प्रतिदिन नियमित और सघन जांच सुनिश्चित की जाए तथा पानी की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जाए. इसके साथ ही उन्होंने जल स्रोतों से लेकर उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली पाइपलाइन में किसी भी प्रकार के लीकेज, गंदगी या प्रदूषण की संभावना को तुरंत समाप्त करने के निर्देश दिए.

नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने भी जल आपूर्ति से जुड़े अमले को सतर्क रहने और तकनीकी मानकों का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी. उन्होंने कहा कि शुद्ध पेयजल नागरिकों का अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है. निरीक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि जल शोधन संयंत्रों में आवश्यक रसायनों की उपलब्धता, मशीनों की कार्यक्षमता और कर्मचारियों की तैनाती संतोषजनक स्थिति में है.

इस मौके पर नगर निगम का तकनीकी अमला पूरी सक्रियता के साथ उपस्थित रहा. अधीक्षण यंत्री कमलेश श्रीवास्तव, सहायक यंत्री राजेश खंपरिया, उपयंत्री मंसूरी और शमीम खान सहित अन्य विभागीय अधिकारियों ने जल शोधन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी और बताया कि लगातार मॉनिटरिंग और समय-समय पर होने वाली जांच के चलते शहर में सप्लाई होने वाला पानी सुरक्षित और पीने योग्य बना हुआ है.

जल शोधन संयंत्रों के निरीक्षण के बाद कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने स्मार्ट सिटी कार्यालय में नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक भी की. इस बैठक में शहर के विकास कार्यों, जनसुविधाओं, स्वच्छता, आवास योजनाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स की गहन समीक्षा की गई. कलेक्टर ने अधिकारियों से अब तक की प्रगति का विस्तृत फीडबैक लिया और जिन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है, वहां आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत चल रही छह प्रमुख परियोजनाओं—मोहनिया, कुदवारी, तेवर, परसवाड़ा (ए और बी) तथा तिलहरी—की प्रगति को पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया. कलेक्टर ने कहा कि इन परियोजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद नागरिकों को पक्के आवास उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है, इसलिए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा दोनों का विशेष ध्यान रखा जाए. उन्होंने निर्देश दिए कि आवास समय पर पूर्ण कर हितग्राहियों को सौंपे जाएं, ताकि लोगों का “अपना घर” का सपना जल्द साकार हो सके.

स्वच्छता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा करते हुए कलेक्टर ने नगर निगम की कार्यप्रणाली की सराहना की. उन्होंने कहा कि शहर का सीएनडी प्लांट और अन्य स्वच्छता इकाइयां बेहतर ढंग से कार्य कर रही हैं, जिसका सकारात्मक प्रभाव शहर की साफ-सफाई और पर्यावरण पर दिखाई दे रहा है. कलेक्टर ने विश्वास जताया कि सुव्यवस्थित कचरा प्रबंधन, वैज्ञानिक अपशिष्ट निपटान और बेहतर प्लांट संचालन के दम पर इस वर्ष स्वच्छता रैंकिंग में जबलपुर पहले से कहीं बेहतर स्थान हासिल करेगा.

बैठक में अमृत योजना के तहत चल रहे जलापूर्ति और सीवर परियोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई. कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि इन निर्माण कार्यों के दौरान आम नागरिकों को न्यूनतम असुविधा होनी चाहिए. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़कों की खुदाई, पाइपलाइन बिछाने और सीवर से जुड़े कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए और कार्य पूर्ण होने के बाद सड़कों की मरम्मत तुरंत कराई जाए.

इसके साथ ही प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के कार्यों की भी समीक्षा की गई. कलेक्टर ने निर्देश दिए कि योजना के पात्र हितग्राहियों तक लाभ शीघ्रता से पहुंचे और प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए. स्मार्ट सिटी के अंतर्गत संचालित परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई और शहर के समग्र विकास को गति देने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए.

बैठक के अंत में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने अधिकारियों से कहा कि शहर के विकास, स्वच्छता और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों में आपसी समन्वय और जिम्मेदारी बेहद जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन की प्राथमिकता जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. बैठक में स्मार्ट सिटी के सीईओ अनुराग सिंह सहित नगर निगम के सभी विभागीय प्रमुख और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे.

 कलेक्टर और निगमायुक्त द्वारा स्वयं पानी पीकर की गई जांच से लेकर विकास कार्यों की व्यापक समीक्षा तक, यह स्पष्ट संकेत मिला कि प्रशासन शहरवासियों को शुद्ध पेयजल, बेहतर बुनियादी ढांचा और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-