लापता महिला के मामले में फिरौती की मांग पर हाई कोर्ट सख्त, एसपी को तत्काल बरामदगी के निर्देश

लापता महिला के मामले में फिरौती की मांग पर हाई कोर्ट सख्त, एसपी को तत्काल बरामदगी के निर्देश

प्रेषित समय :20:30:13 PM / Sat, Jan 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने एक महिला के रहस्यमय तरीके से लापता होने और उसके परिजनों से एक लाख रुपये की फिरौती मांगे जाने के गंभीर मामले को अत्यंत संवेदनशीलता से लेते हुए पुलिस प्रशासन को कड़े तेवर दिखाए हैं। न्यायमूर्ति की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की अब तक की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए जबलपुर पुलिस अधीक्षक को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि वे इस मामले में स्वयं संज्ञान लें और तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। न्यायालय ने पुलिस को सख्त हिदायत दी है कि किसी भी स्थिति में लापता महिला को अगली सुनवाई तक ढूंढ निकाला जाए और उसे सुरक्षित रूप से न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए। यह मामला न केवल एक महिला की सुरक्षा से जुड़ा है बल्कि शहर की कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यक्षमता पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को अवगत कराया कि पीड़ित महिला कई दिनों से लापता है और इस दौरान अज्ञात अपहरणकर्ताओं द्वारा परिवार से धन की मांग की जा रही है, जो इस मामले को सामान्य गुमशुदगी से हटाकर फिरौती के लिए अपहरण की श्रेणी में ले आता है।

अदालत ने इस तथ्य पर विशेष आपत्ति जताई कि फिरौती की मांग जैसी गंभीर जानकारी के बावजूद पुलिस अब तक महिला का सुराग लगाने में विफल रही है। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि जब किसी नागरिक की जान जोखिम में हो और फिरौती के कॉल आ रहे हों, तो पुलिस को अपनी जांच की गति और तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना चाहिए। हाई कोर्ट ने जबलपुर एसपी को निर्देश दिया है कि वे एक विशेष टीम गठित करें जो आधुनिक सर्विलांस और मुखबिर तंत्र के माध्यम से अपहरणकर्ताओं की लोकेशन ट्रैक करे। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई की तिथि तक महिला की बरामदगी नहीं होती है या जांच में किसी भी प्रकार की शिथिलता पाई जाती है, तो इसे अदालत की अवमानना और गंभीर प्रशासनिक विफलता माना जाएगा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से उपस्थित सरकारी वकील को भी निर्देशित किया गया है कि वे पुलिस विभाग से विस्तृत प्रगति रिपोर्ट लेकर अदालत को सौंपें।

कानूनी जानकारों का मानना है कि हाई कोर्ट का यह कड़ा रुख पुलिस पर दबाव बनाने के लिए आवश्यक था क्योंकि अक्सर गुमशुदगी के मामलों में पुलिस की शुरुआती ढिलाई अपराधियों को भागने या पीड़ित को नुकसान पहुँचाने का मौका दे देती है। फिरौती की मांग वाले इस मामले ने संस्कारधानी जबलपुर में हड़कंप मचा दिया है और सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोग महिला की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। पुलिस के लिए अब यह प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है कि वे ८ जनवरी की समय-सीमा से पहले आरोपियों के चंगुल से महिला को मुक्त कराएं। याचिकाकर्ता के परिजनों ने अदालत की इस सक्रियता पर राहत महसूस की है, हालांकि उनके मन में अब भी अनहोनी की आशंका बनी हुई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे फिरौती के लिए किए गए कॉल्स की कॉल डिटेल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन के आधार पर संदिग्धों के करीब पहुंच रहे हैं, लेकिन जब तक महिला सुरक्षित नहीं मिल जाती, तब तक सफलता का दावा करना जल्दबाजी होगी।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी रेखांकित किया कि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में त्वरित न्याय और त्वरित कार्रवाई अनिवार्य है। कोर्ट की सख्ती के बाद जबलपुर पुलिस मुख्यालय में हलचल तेज हो गई है और जिले के वरिष्ठ अधिकारी इस केस की पल-पल की अपडेट ले रहे हैं। इस मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या शहर में सीसीटीवी कैमरों का जाल और पुलिस पेट्रोलिंग पर्याप्त है, क्योंकि अपराधी दिन-दहाड़े फिरौती मांगने का दुस्साहस कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें ८ जनवरी की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब पुलिस को यह साबित करना होगा कि उन्होंने कानून और न्यायालय की मर्यादा की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए हैं। यदि पुलिस इस अवधि में महिला को पेश करने में नाकाम रहती है, तो न्यायालय द्वारा सख्त दंडात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। फिलहाल, यह मामला जबलपुर के विधिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा का सबसे प्रमुख विषय बना हुआ है और हर कोई महिला की सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहा है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-