पौष पूर्णिमा पर आस्था का महासैलाब, प्रयागराज पहुंचे विंध्य, जबलपुर और मध्य प्रदेश के हजारों श्रद्धालु

पौष पूर्णिमा पर आस्था का महासैलाब, प्रयागराज पहुंचे विंध्य, जबलपुर और मध्य प्रदेश के हजारों श्रद्धालु

प्रेषित समय :20:25:54 PM / Sun, Jan 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. प्रयागराज माघ मेले के पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर आस्था और विश्वास का विशाल जनसैलाब देखने को मिला। मध्य प्रदेश से सटे इलाकों, पूरे विंध्य क्षेत्र और जबलपुर संभाग से बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज पहुँचे हैं। संगम में स्नान की धार्मिक मान्यता ने ठंड, दूरी और यात्रा की कठिनाइयों को पीछे छोड़ दिया। पौष पूर्णिमा की पूर्व संध्या से ही प्रयागराज जाने वाले मार्गों पर भीड़ बढ़ने लगी थी। ट्रेनों, बसों, निजी वाहनों और जत्थों में पैदल चलते श्रद्धालु संगम की ओर बढ़ते दिखाई दिए।

विंध्य क्षेत्र के रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर जिलों के साथ-साथ जबलपुर, कटनी, मैहर, पन्ना और नरसिंहपुर से भी बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज पहुँचे। जबलपुर से आए श्रद्धालुओं का कहना है कि संगम स्नान केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और नई ऊर्जा का स्रोत है। कई परिवार हर वर्ष पौष पूर्णिमा पर स्नान के लिए प्रयागराज आते हैं और इसे अपनी परंपरा का हिस्सा मानते हैं।

प्रयागराज पहुँचते ही श्रद्धालुओं ने तड़के ब्रह्म मुहूर्त में संगम की ओर रुख किया। कड़ाके की ठंड के बावजूद गंगा-यमुना के पावन जल में डुबकी लगाने के लिए लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। घाटों पर हर-हर गंगे, जय संगम और हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे। साधु-संतों के अखाड़े, कल्पवासी और आम श्रद्धालु—सभी एक ही भाव से संगम तट पर जुटे नजर आए। माघ मेले के आरंभिक दिन में ही प्रयागराज की धार्मिक और सांस्कृतिक भव्यता सामने आ गई।

जबलपुर और विंध्य क्षेत्र से आए श्रद्धालुओं के समूह संगम क्षेत्र में विशेष रूप से दिखाई दिए। कई लोगों ने बताया कि जबलपुर से प्रयागराज की दूरी अपेक्षाकृत कम होने के कारण यहाँ के लोग बड़ी संख्या में माघ मेले में शामिल होते हैं। कुछ श्रद्धालु परिवार सहित आए हैं तो कई युवाओं के समूह भी संगम स्नान के लिए पहुँचे। उनके लिए यह यात्रा आस्था के साथ-साथ सामाजिक मेल-मिलाप का अवसर भी बन गई है।

इस बार माघ मेले से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक पर, तेजी से वायरल हो रही हैं। संगम स्नान, घाटों की रौनक, तंबुओं की कतारें, अलाव तापते श्रद्धालु और सूर्योदय के समय संगम का दृश्य लोगों को आकर्षित कर रहा है। जबलपुर, रीवा और सतना जैसे शहरों से आए श्रद्धालु अपनी यात्रा और स्नान की तस्वीरें साझा कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का जीवंत स्वरूप है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, साफ-सफाई, यातायात नियंत्रण और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। पुलिस, होमगार्ड और स्वयंसेवक श्रद्धालुओं को संगम क्षेत्र में मार्गदर्शन देते नजर आए। ठंड को देखते हुए अलाव की व्यवस्था भी की गई है, जिससे दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को राहत मिल सके।

विंध्य और जबलपुर क्षेत्र से आए कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे हर वर्ष माघ मेले के पहले स्नान के लिए प्रयागराज आते हैं। उनका मानना है कि पौष पूर्णिमा पर संगम में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और वर्षभर के लिए सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। कुछ लोग कल्पवास के उद्देश्य से भी आए हैं, जो पूरे माघ महीने संगम तट पर रहकर धार्मिक अनुष्ठान, साधना और सेवा कार्य करते हैं। उनके तंबुओं में भजन-कीर्तन और प्रवचन का माहौल बना हुआ है।

पौष पूर्णिमा को माघ स्नान का शुभारंभ माना जाता है और इसका विशेष धार्मिक महत्व है। इसी कारण पहले स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहती है। मध्य प्रदेश, विंध्य क्षेत्र और जबलपुर संभाग के अलावा अन्य राज्यों से भी लोग प्रयागराज पहुँचे हैं। संगम तट पर यह दृश्य आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया है।

जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ती गई। ठंड के बावजूद लोगों के चेहरों पर श्रद्धा और संतोष साफ दिखाई दे रहा था। पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ ही माघ मेले की विधिवत शुरुआत हो चुकी है और आने वाले दिनों में जबलपुर, विंध्य और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-