राजस्थान में भैंस और बछड़े के स्वामित्व को लेकर अनोखा विवाद, मेडिकल रिपोर्ट से सुलझा मामला

राजस्थान में भैंस और बछड़े के स्वामित्व को लेकर अनोखा विवाद, मेडिकल रिपोर्ट से सुलझा मामला

प्रेषित समय :22:32:17 PM / Sun, Jan 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कोटा. राजस्थान के कोटा जिले में एक ऐसा अनोखा और दिलचस्प मामला सामने आया, जिसने पुलिस और प्रशासन को भी कुछ समय के लिए असमंजस में डाल दिया। यहां दो व्यक्तियों ने एक ही भैंस और उसके बछड़े पर अपना-अपना दावा ठोक दिया। दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि आखिरकार इसका समाधान पशु चिकित्सकीय जांच और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर करना पड़ा। यह मामला न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के स्वामित्व से जुड़े विवादों की जटिलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि प्रशासन किस तरह वैज्ञानिक और निष्पक्ष तरीके से ऐसे मामलों को सुलझाने का प्रयास करता है।

पुलिस के अनुसार, यह मामला कोटा के कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र का है। नारायण विहार निवासी रामलाल ने लगभग एक महीने पहले शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी भैंस और उसका बछड़ा अचानक गायब हो गए हैं। रामलाल का कहना था कि वह लगातार दोनों की तलाश कर रहा था, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। इसी बीच दो दिन पहले उसे सूचना मिली कि रामचंद्रपुरा मरगिया बस्ती इलाके में इंद्रजीत केवट के बाड़े में एक भैंस और बछड़ा बंधे हुए हैं, जो बिल्कुल उसके पशुओं जैसे ही दिखाई देते हैं। जब रामलाल वहां पहुंचा तो उसने तुरंत दावा किया कि वे दोनों उसी के हैं।

रामलाल के इस दावे का इंद्रजीत केवट ने कड़ा विरोध किया। इंद्रजीत का कहना था कि यह भैंस उसने दो साल पहले बड़ी गांव से खरीदी थी और अब उसकी उम्र करीब सात साल है। उसके अनुसार, भैंस और बछड़े पर उसका पूरा अधिकार है और रामलाल का दावा गलत है। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी बढ़ गई और मामला स्थानीय स्तर पर सुलझने के बजाय पुलिस थाने तक पहुंच गया।

शनिवार को दोनों पक्ष कुन्हाड़ी थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने प्रारंभिक पूछताछ शुरू की। जांच के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क और दावे पेश किए। रामलाल का कहना था कि उसकी भैंस की उम्र चार से पांच साल के बीच है और उसने हाल ही में बछड़े को जन्म दिया है। वहीं इंद्रजीत बार-बार यह दोहराता रहा कि भैंस लगभग सात साल की है और वह लंबे समय से उसके पास है। दोनों के दावों में अंतर होने के कारण पुलिस के सामने यह तय करना मुश्किल हो गया कि सच क्या है।

कुन्हाड़ी थाने की सर्किल इंस्पेक्टर कौशल्या के अनुसार, जब आपसी सहमति से विवाद का समाधान नहीं हो सका तो पुलिस ने विशेषज्ञ राय लेने का फैसला किया। इसके लिए एक पशु चिकित्सकीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। भैंस और बछड़े को कोटा के मोखापाड़ा स्थित सरकारी पशु चिकित्सालय ले जाया गया, जहां पशु चिकित्सकों की टीम ने उनकी विस्तृत जांच की।

पशु चिकित्सकों ने भैंस की उम्र और स्थिति का आकलन करने के लिए उसके दांतों और शारीरिक बनावट की जांच की। पशु चिकित्सा विज्ञान में दांतों के आधार पर पशु की उम्र का अनुमान लगाया जाता है और इसी प्रक्रिया को अपनाया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला कि भैंस की उम्र लगभग चार से पांच साल के बीच है, न कि सात साल, जैसा कि इंद्रजीत दावा कर रहा था। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि भैंस ने हाल ही में बछड़े को जन्म दिया है, जिससे रामलाल के दावे को बल मिला।

मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के साथ उसका मिलान किया। रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने रामलाल के दावे को सही माना। शनिवार देर शाम भैंस और बछड़े को आधिकारिक रूप से रामलाल को सौंप दिया गया। यह फैसला सुनाए जाने के बाद रामलाल ने राहत की सांस ली, क्योंकि लगभग एक महीने से वह अपने पशुओं की तलाश में परेशान था।

हालांकि दूसरा दावेदार इंद्रजीत इस निर्णय से संतुष्ट नहीं था। उसने पुलिस के फैसले पर आपत्ति जताई, लेकिन जब उससे अपने पक्ष में ठोस सबूत पेश करने को कहा गया तो वह ऐसा नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने अंतिम रूप से भैंस और बछड़े को रामलाल के हवाले कर दिया।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में पशु केवल आजीविका का साधन ही नहीं होते, बल्कि परिवार का अहम हिस्सा भी माने जाते हैं। ऐसे में उनके स्वामित्व को लेकर विवाद भावनात्मक रूप भी ले लेता है। पुलिस और प्रशासन के लिए ऐसे मामलों को निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से सुलझाना एक बड़ी चुनौती होता है।

कोटा में सामने आया यह मामला भले ही देखने में अजीब लगे, लेकिन यह दर्शाता है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कभी-कभी प्रशासन को असामान्य स्थितियों में भी व्यावहारिक और तकनीकी उपाय अपनाने पड़ते हैं। पशु चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर लिया गया फैसला इस बात का उदाहरण है कि कैसे विज्ञान और कानून मिलकर न्याय सुनिश्चित कर सकते हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-