एवोकाडो की खेती से किसानों की आय में क्रांतिकारी उछाल, एक एकड़ में 10 लाख रुपये तक कमाई का नया रास्ता

एवोकाडो की खेती से किसानों की आय में क्रांतिकारी उछाल, एक एकड़ में 10 लाख रुपये तक कमाई का नया रास्ता

प्रेषित समय :23:01:23 PM / Mon, Jan 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कभी विदेशी और शहरी वर्ग तक सीमित समझा जाने वाला एवोकाडो अब भारतीय खेती की तस्वीर बदलने लगा है। बदलते खानपान, स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ाव ने इस फल को किसानों के लिए सोने की फसल बना दिया है। देश के कई हिस्सों, खासकर महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक में किसान पारंपरिक फसलों से हटकर एवोकाडो की खेती को अपना रहे हैं और एक एकड़ से सालाना 8 से 10 लाख रुपये तक की आमदनी दर्ज कर रहे हैं। यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भारतीय कृषि के भविष्य की दिशा भी तय कर रहा है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एवोकाडो की मांग बीते कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। मेट्रो शहरों से लेकर टियर-2 शहरों तक इसके उपभोक्ता बढ़ रहे हैं। होटल, रेस्टोरेंट, कैफे, जिम, न्यूट्रिशन सेंटर और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में एवोकाडो का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। यही कारण है कि बाजार में इसकी कीमत 300 से 400 रुपये प्रति किलो तक बनी रहती है, जबकि कुछ विशेष किस्मों के लिए इससे अधिक दाम भी मिल जाते हैं।

महाराष्ट्र के कई जिलों में युवा किसान इस नई खेती का प्रयोग कर रहे हैं। पारंपरिक फसलों जैसे कपास, सोयाबीन या गन्ने में जहां लागत अधिक और मुनाफा सीमित था, वहीं एवोकाडो ने कम क्षेत्र में अधिक आय का भरोसा दिया है। किसानों का कहना है कि सही तकनीक, उचित पौध रोपण और ड्रिप सिंचाई के जरिए यह फसल लंबे समय तक स्थायी आमदनी का साधन बन सकती है। एक बार लगाए गए पौधे 40 से 50 वर्षों तक फल देते हैं, जिससे यह खेती पीढ़ियों तक लाभ पहुंचा सकती है।

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि एवोकाडो को केवल पहाड़ी इलाकों तक सीमित समझना अब पुरानी धारणा हो चुकी है। नई किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों की मदद से यह फल मैदानी और गर्म क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा रहा है। तमिलनाडु के कोयंबटूर जैसे गर्म क्षेत्रों में भी किसान अच्छी पैदावार ले रहे हैं। खास तौर पर ‘हास’ किस्म को मैदानी इलाकों के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। पौधों को 20×20 फीट की दूरी पर लगाने, शुरुआती दो वर्षों तक हल्की छाया देने और नियमित सिंचाई से उत्पादन बेहतर होता है।

एवोकाडो की खेती का एक बड़ा लाभ यह है कि इसमें जोखिम अपेक्षाकृत कम है। पारंपरिक फसलों की तुलना में कीट और रोगों का प्रकोप कम देखा जाता है। साथ ही बाजार में इसकी मांग स्थिर और बढ़ती हुई है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के बाद विपणन में भी ज्यादा परेशानी नहीं आती, क्योंकि व्यापारी और थोक खरीदार खुद खेत तक पहुंचने लगे हैं।

सरकारी स्तर पर भले ही एवोकाडो के लिए अलग से कोई विशेष सब्सिडी घोषित न हो, लेकिन बागवानी योजनाओं के तहत किसानों को पौध, सिंचाई, मल्चिंग और जल स्रोत विकास में सहायता मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस फल को प्रोत्साहन फसलों की सूची में शामिल करे, तो इससे और अधिक किसान जुड़ सकते हैं और देश को आयात पर निर्भरता भी कम करनी पड़ सकती है।

पोषण विशेषज्ञ एवोकाडो को ‘सुपरफूड’ मानते हैं। इसमें मौजूद हेल्दी फैट, फाइबर, विटामिन और खनिज तत्व इसे हृदय स्वास्थ्य, वजन नियंत्रण और त्वचा के लिए लाभकारी बनाते हैं। यही वजह है कि शहरी उपभोक्ताओं में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। आइसक्रीम, सलाद, स्मूदी, सॉस और कॉस्मेटिक उत्पादों में इसके उपयोग ने इसकी मांग को और मजबूत किया है।

किसानों के अनुभव बताते हैं कि शुरुआत में पौधों की लागत और देखभाल पर खर्च जरूर आता है, लेकिन तीसरे या चौथे वर्ष से जब उत्पादन शुरू होता है, तब मुनाफा लागत से कई गुना अधिक हो जाता है। एक एकड़ में लगाए गए लगभग 100 पौधों से धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ता है और पूर्ण विकसित अवस्था में भारी मात्रा में फल मिलने लगता है। यही कारण है कि एवोकाडो को दीर्घकालिक निवेश की तरह देखा जा रहा है।

कृषि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि एवोकाडो जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर झुकाव भारतीय कृषि को पारंपरिक घाटे के चक्र से बाहर निकाल सकता है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितता के बीच यह फसल किसानों को स्थिरता और भरोसा देती है। साथ ही निर्यात की संभावनाएं भी इसमें जुड़ी हुई हैं, जिससे आने वाले समय में विदेशी बाजारों में भारतीय एवोकाडो अपनी पहचान बना सकता है।

कुल मिलाकर एवोकाडो की खेती केवल एक नई फसल नहीं, बल्कि किसानों के लिए सोच में बदलाव का प्रतीक बन चुकी है। यह दिखाता है कि यदि किसान तकनीक, बाजार और उपभोक्ता की जरूरतों को समझकर कदम उठाएं, तो खेती फिर से लाभ का सौदा बन सकती है। आज एवोकाडो उन किसानों के लिए उम्मीद की फसल है, जो कम जमीन में ज्यादा आमदनी और सुरक्षित भविष्य की तलाश में हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-