मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जारी किया 2026 पर्यटन कैलेंडर और डिजिटल पोर्टल, जम्मू-कश्मीर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई मजबूती

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जारी किया 2026 पर्यटन कैलेंडर और डिजिटल पोर्टल, जम्मू-कश्मीर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई मजबूती

प्रेषित समय :21:25:53 PM / Tue, Jan 6th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जम्मू. जम्मू-कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वर्ष 2026 के पर्यटन कैलेंडर का औपचारिक विमोचन किया और इसके साथ ही ‘टूरिज्म कश्मीर’ नामक एक अत्याधुनिक डिजिटल पोर्टल की शुरुआत की। घाटी के हृदय स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम में सरकार के शीर्ष अधिकारियों, पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों, होटल व्यवसायियों और स्थानीय हितधारकों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा सरकार पर्यटन को केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के समग्र विकास की रीढ़ मानकर आगे बढ़ रही है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक दौर में पर्यटन को डिजिटल नवाचार और मजबूत बुनियादी ढांचे के साथ जोड़ना समय की मांग है और यही सोच इन नई पहलों की आधारशिला है।

वर्ष 2026 के लिए जारी किए गए पर्यटन कैलेंडर को महज तारीखों का संग्रह नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की विविधता, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य की एक दृश्य यात्रा के रूप में देखा जा रहा है। कैलेंडर के प्रत्येक महीने में घाटी के अलग-अलग रंगों को दर्शाया गया है, जिसमें बर्फ से ढकी वादियों की सर्दियां, वसंत में खिलते ट्यूलिप गार्डन, गर्मियों की हरी-भरी पहाड़ियां और शरद ऋतु के सुनहरे दृश्य शामिल हैं। पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस कैलेंडर को दो वर्ष पहले जारी करने का उद्देश्य यह है कि देश-विदेश के पर्यटक, ट्रैवल एजेंसियां और टूर ऑपरेटर्स अपने यात्रा कार्यक्रमों की योजना पहले से बना सकें। यह कदम अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में जम्मू-कश्मीर की मौजूदगी को और मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

इस अवसर पर लॉन्च किया गया ‘टूरिज्म कश्मीर’ डिजिटल पोर्टल सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें पर्यटन को तकनीक के माध्यम से अधिक पारदर्शी, सुलभ और भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया गया है। यह पोर्टल यात्रियों के लिए एक सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है, जहां मौसम की ताजा जानकारी, यात्रा परामर्श, परमिट से जुड़ी सूचनाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का कैलेंडर और वर्चुअल टूर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरों और यूजर-फ्रेंडली डिजाइन के जरिए घाटी की खूबसूरती को डिजिटल रूप में दुनिया के सामने पेश करने का प्रयास किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह पोर्टल मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर जैसे सभी उपकरणों पर समान रूप से सुचारू रूप से काम करेगा, ताकि पर्यटक कहीं से भी जानकारी हासिल कर सकें।

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि नया डिजिटल पोर्टल केवल गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जम्मू-कश्मीर के उन क्षेत्रों को भी सामने लाएगा, जो अब तक मुख्यधारा के पर्यटन से दूर रहे हैं। सरकार का मानना है कि पर्यटन का संतुलित विकास तभी संभव है जब भीड़ को कुछ चुनिंदा स्थानों तक सीमित रखने के बजाय नए और कम प्रसिद्ध इलाकों तक फैलाया जाए। इसी उद्देश्य से पोर्टल में इंटरएक्टिव मैप और स्थानीय गाइड की जानकारी जोड़ी गई है, जिससे स्वतंत्र रूप से यात्रा करने वाले पर्यटकों को भी भरोसेमंद दिशा-निर्देश मिल सकें।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में कहा कि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का योगदान बेहद अहम है और लाखों परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी क्षेत्र पर निर्भर करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित, सुविधाजनक और यादगार अनुभव देना भी है। इसी क्रम में उन्होंने सतत और जिम्मेदार पर्यटन की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करते हुए विकास ही भविष्य का सही रास्ता है।

कार्यक्रम के दौरान सतत पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। 2026 के पर्यटन कैलेंडर और डिजिटल पोर्टल दोनों में जिम्मेदार यात्रा से जुड़े संदेश शामिल किए गए हैं, जिनमें कचरा प्रबंधन, स्थानीय परंपराओं के सम्मान और वन्यजीव संरक्षण जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाने की कोशिश की गई है। अधिकारियों का मानना है कि इन मूल्यों को शुरुआत से ही प्रचार सामग्री का हिस्सा बनाकर एक जागरूक और संवेदनशील पर्यटक वर्ग को आकर्षित किया जा सकता है। साथ ही, स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के लिए डिजिटल पोर्टल के माध्यम से हस्तशिल्प कारीगरों, होमस्टे संचालकों और छोटे व्यवसायियों को सीधे वैश्विक दर्शकों से जोड़ने की योजना भी सामने रखी गई है।

पर्यटन कैलेंडर को दो वर्ष पहले जारी करने के पीछे की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन उद्योग में पैकेज और ब्रॉशर वर्षों पहले तय कर लिए जाते हैं और ऐसे में समय रहते प्रचार सामग्री उपलब्ध कराना बेहद जरूरी होता है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल कैटलॉग में अधिक प्रमुखता मिलेगी और आने वाले वर्षों में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके साथ ही, पोर्टल पर दी जाने वाली सूचनाओं को नियमित रूप से अपडेट रखने के लिए एक समर्पित टीम तैनात की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की गलत या पुरानी जानकारी पर्यटकों तक न पहुंचे।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों में एक नई ऊर्जा और आशावाद देखने को मिला। पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का मानना है कि 2026 का पर्यटन कैलेंडर और नया डिजिटल पोर्टल जम्मू-कश्मीर के लिए केवल प्रचार के साधन नहीं, बल्कि आधुनिक और आत्मविश्वासी छवि के प्रतीक हैं। इन पहलों से होटल उद्योग, स्थानीय हस्तशिल्प, परिवहन और सेवा क्षेत्र को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का दावा है कि सुनियोजित और चरणबद्ध विकास के जरिए जम्मू-कश्मीर को वैश्विक पर्यटन मंच पर प्रतिस्पर्धी और आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में शुरू की गई ये पहलें यह संकेत देती हैं कि जम्मू-कश्मीर अब पारंपरिक पर्यटन प्रचार से आगे बढ़कर डिजिटल कनेक्टिविटी, दूरदर्शी योजना और सतत विकास के रास्ते पर अग्रसर है। हर पहाड़, हर झील और हर सांस्कृतिक उत्सव को डिजिटल पहचान देकर घाटी की कहानी दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने का यह प्रयास आने वाले वर्षों में जम्मू-कश्मीर के पर्यटन परिदृश्य को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-