AajKaDin: 9 जनवरी 2026, कांपता है काल जिनसे... वो हैं काल भैरव!

AajKaDin: 9 जनवरी 2026, कांपता है काल जिनसे... वो हैं काल भैरव!

प्रेषित समय :21:53:33 PM / Thu, Jan 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 6367472963)
* कालाष्टमी- 10 जनवरी 2026, शनिवार
* मासिक कृष्ण जन्माष्टमी - 10 जनवरी 2026, शनिवार
* मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पूजा - 12:16 एएम से 01:09 एएम (11 जनवरी 2026)
* कृष्ण अष्टमी प्रारम्भ - 08:23 एएम, 10 जनवरी 2026
* कृष्ण अष्टमी समाप्त - 10:20 एएम, 11 जनवरी 2026

* जिस दिन भगवान शिव भैरव के रूप में प्रकट हुए थे, उसे कालभैरव जयन्ती कहा जाता है. कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान इसे मनाया जाता है. इसलिए हर कृष्ण पक्ष की अष्टमी, कालाष्टमी कहलाती है. 
* इस दिन काल भैरव का दर्शन-पूजन सर्व मनोकामना पूर्ण करता है. इस दिन प्रातः पवित्र नदी-सरोवर में स्नान के बाद  पितरों का श्राद्ध-तर्पण करके भैरव पूजा-व्रत करने से तमाम विघ्न समाप्त हो जाते हैं, दीर्घायु प्राप्त होती है.
* देवी भक्त कालाष्टमी के दिन काल भैरव के साथ-साथ देवी कालिका की पूजा-अर्चना-व्रत भी करते हैं. भैरव पूजा-आराधना करने से परिवार में सुख-समृद्धि के साथ-साथ स्वास्थ्य रक्षा और अकाल मौत से सुरक्षा भी होती है. 
* कालभैरव अष्टमी पर भैरव के दर्शन-पूजन मात्र से अशुभ कर्मों से मुक्ति  मिलती है, क्रूर ग्रहों के कुप्रभाव से छुटकारा मिलता है. 
* भोलेनाथ के भैरव स्वरूप की पूजा, उपासना करने वाले शिवभक्तों को भैरवनाथ की पूजा करके अर्घ्य देना चाहिए. 
* रात्रि जागरण करके शिव-पार्वती की कथा और भजन-कीर्तन करना चाहिए. भैरव कथा का श्रवण और आरती करनी चाहिए. 
* भगवान भैरवनाथ की प्रसन्नता के लिए उनके वाहन श्वान- कुत्ते को भोजन कराना चाहिए. 
* इस दिन प्रातः पवित्र नदी-सरोवर में स्नान करके  पितरों का श्राद्ध-तर्पण करके भैरव-पूजा-व्रत करने से सारे विघ्न समाप्त हो जाते हैं. 
* अकाल मृत्यु से रक्षा होकर दीर्घायु प्राप्त होती है.
॥ श्री भैरव आरती ॥
सुनो जी भैरव लाड़िले,कर जोड़ कर विनती करूँ.
कृपा तुम्हारी चाहिए,मैं ध्यान तुम्हारा ही धरूँ.
मैं चरण छुता आपके,अर्जी मेरी सुन लीजिये॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
मैं हूँ मति का मन्द,मेरी कुछ मदद तो कीजिये.
महिमा तुम्हारी बहुत,कुछ थोड़ी सी मैं वर्णन करूँ॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
करते सवारी स्वान की,चारों दिशा में राज्य है.
जितने भूत और प्रेत,सबके आप ही सरताज हैं॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
हथियार हैं जो आपके,उसका क्या वर्णन करूँ.
माता जी के सामने तुम,नृत्य भी करते सदा॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
गा गा के गुण अनुवाद से,उनको रिझाते हो सदा.
एक सांकली है आपकी,तारीफ उसकी क्या करूँ॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
बहुत सी महिमा तुम्हारी,मेंहदीपुर सरनाम है.
आते जगत के यात्री,बजरंग का स्थान है॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
श्री प्रेतराज सरकार के,मैं शीश चरणों में धरूँ.
निशदिन तुम्हारे खेल से,माताजी खुश रहें॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
सिर पर तुम्हारे हाथ रख कर,आशीर्वाद देती रहें.
कर जोड़ कर विनती करूँ,अरु शीश चरणों में धरूँ॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
दैनिक चौघड़िया - 9 जनवरी 2026
* दिन का चौघड़िया
चर - 07:21 से 08:41
लाभ - 08:41 से 10:02
अमृत - 10:02 से 11:22
काल - 11:22 से 12:42
शुभ - 12:42 से 02:03
रोग - 02:03 से 03:23
उद्वेग - 03:23 से 04:43
चर - 04:43 से 06:04
* रात्रि का चौघड़िया
रोग - 06:04 से 07:43
काल - 07:43 से 09:23
लाभ - 09:23 से 11:03
उद्वेग - 11:03 से 12:42
शुभ - 12:42 से 02:22
अमृत - 02:22 से 04:02
चर - 04:02 से 05:41
रोग - 05:41 से 07:21
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-