विश्व प्रसिद्ध वेब सीरीज 'गेम ऑफ थ्रोन्स' (GOT) में सांसा स्टार्क के किरदार से रातों-रात वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने वाली अभिनेत्री सोफी टर्नर ने अपने करियर और अतीत को लेकर कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. सोफी ने स्वीकार किया है कि वे न तो कभी इस शो को दोबारा देखती हैं और न ही इसमें अपने अभिनय को निहारना पसंद करती हैं क्योंकि इससे जुड़ी यादें आज भी उनके लिए किसी डरावने अनुभव की तरह हैं. हाल ही में 'द टुनाइट शो विद जिमी फॉलन' में अतिथि के रूप में शामिल हुईं सोफी ने बताया कि शो के प्रसिद्ध 'थीम सॉन्ग' को सुनते ही वे आज भी मानसिक तनाव (PTSD) का अनुभव करने लगती हैं. अभिनेत्री के अनुसार यह बेहद शर्मिंदगी भरा होता है जब लोग उनके सामने उस संगीत को बजाते हैं या शो की चर्चा करते हैं, क्योंकि उनका दिमाग तुरंत उन्हीं मुश्किल दिनों की यादों में लौट जाता है. जिमी फॉलन के साथ बातचीत के दौरान जब मेजबान ने याद दिलाया कि इस शो को शुरू हुए अब 15 साल बीत चुके हैं, तो सोफी ने स्पष्ट किया कि 'गेम ऑफ थ्रोन्स' उनकी सबसे बेहतरीन यादों का हिस्सा नहीं है और यही कारण है कि वे इससे दूरी बनाए रखना चाहती हैं.
सोफी टर्नर के लिए साल 2026 की शुरुआत काफी व्यस्तताओं भरी रही है क्योंकि उनकी आगामी डकैती थ्रिलर फिल्म 'स्टील' (Steal) इसी महीने के अंत में प्राइम वीडियो पर रिलीज होने के लिए तैयार है. अपने नए प्रोजेक्ट्स के प्रचार के दौरान उन्होंने उस सफर को याद किया जिसने उन्हें शोहरत की बुलंदियों पर पहुँचाया, लेकिन साथ ही उन भावनात्मक घावों का भी जिक्र किया जो इस सफर के दौरान मिले. सोफी ने जिमी फॉलन को स्कॉटिश नए साल की परंपरा के तहत कोयले का एक टुकड़ा उपहार में देते हुए पुरानी बातों को साझा किया. उन्होंने बताया कि सांसा स्टार्क का किरदार निभाना उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ था, लेकिन उस दौरान किए गए काम और सेट के अनुभव ने उनके मानस पटल पर एक गहरा नकारात्मक प्रभाव छोड़ा है. अभिनेत्री का यह बयान उन प्रशंसकों के लिए काफी हैरान करने वाला है जो आज भी सांसा स्टार्क को एक सशक्त प्रेरणा के रूप में देखते हैं, जबकि खुद सोफी उस किरदार की छाया से निकलने की कोशिश कर रही हैं.
सिनेमाई पर्दे पर और वास्तविक जीवन के संघर्षों के बीच का अंतर सोफी के बयानों में साफ झलकता है. जहाँ 'गेम ऑफ थ्रोन्स' के कलाकारों की एक तस्वीर में विजय, शिवकार्तिकेयन, चिरंजीवी और बालकृष्ण जैसे दिग्गजों के बीच उनकी सांसा स्टार्क वाली छवि को एक ऐतिहासिक फिल्म के संदर्भ में देखा जा रहा है, वहीं सोफी खुद को उस अभिनय से अलग करने में जुटी हैं. पत्रकारिता के दृष्टिकोण से यह मामला केवल एक अभिनेत्री की नापसंदगी का नहीं, बल्कि ग्लैमर की दुनिया के पीछे छिपे उन मनोवैज्ञानिक दबावों का भी है जो कलाकारों को उम्र भर के लिए प्रभावित कर सकते हैं. सोफी ने खुलकर कहा कि वे अपनी ही परफॉर्मेंस को स्क्रीन पर नहीं देख पातीं और जब भी कहीं गलती से शो का संगीत बज जाता है, तो वे असहज हो जाती हैं. यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े कलाकार ने अपने सबसे सफल प्रोजेक्ट से इस तरह के जटिल जुड़ाव की बात कही हो, लेकिन सोफी का 'PTSD' जैसा शब्द इस्तेमाल करना मामले की गंभीरता को दर्शाता है.
फिलहाल सोफी अपनी नई फिल्म 'स्टील' को लेकर उत्साहित हैं और उन्हें उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों के बीच उनकी एक नई छवि स्थापित करेगी. 15 साल पहले शुरू हुए उस सफर को पीछे छोड़ते हुए वे अब वैश्विक पटल पर एक परिपक्व अभिनेत्री के रूप में खुद को देख रही हैं. उनके प्रशंसक जहाँ एक तरफ उनकी ईमानदारी की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह जानकर दुखी भी हैं कि जिस शो ने उन्हें इतना प्यार दिया, वही शो उनके लिए आज भी घबराहट का कारण बना हुआ है. सोफी टर्नर की यह स्वीकारोक्ति उन उभरते कलाकारों के लिए भी एक सबक है जो सफलता के शिखर की चमक में इसके साथ आने वाले मानसिक स्वास्थ्य के जोखिमों को अक्सर अनदेखा कर देते हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

