जबलपुर. डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बीच साइबर ठगों के हौसले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं. जबलपुर में गुरुवार को ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक महिला को बिजली बिल ठीक कराने का झांसा देकर साइबर अपराधियों ने उसके खाते से एक लाख रुपये उड़ा लिए. यह घटना न केवल साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी है, बल्कि आम नागरिकों की डिजिटल जागरूकता पर भी सवाल खड़े करती है.
जानकारी के अनुसार, ठगी का शिकार हुई महिला की पहचान बिलहरी क्षेत्र स्थित राजुल सिटी निवासी सुनीता कश्यप के रूप में हुई है. सुनीता के मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को बिजली कंपनी का अधिकारी बताया. कॉल करने वाले ने कहा कि उनका बिजली बिल ऑनलाइन सिस्टम में अपडेट नहीं हो रहा है और यदि इसे तुरंत ठीक नहीं किया गया तो कनेक्शन से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं. भरोसा दिलाने के अंदाज और सरकारी अधिकारी जैसा व्यवहार करने के कारण महिला उसकी बातों में आ गई.
इसके बाद ठग ने सुनीता को व्हाट्सएप पर एक APK फाइल भेजी और कहा कि इसे डाउनलोड कर लेने से समस्या तुरंत हल हो जाएगी. महिला ने बिना किसी संदेह के उस फाइल को अपने मोबाइल फोन में इंस्टॉल कर लिया. जैसे ही APK फाइल डाउनलोड हुई, साइबर अपराधियों को उसके मोबाइल फोन और उसमें मौजूद डिजिटल पेमेंट एप्लिकेशन तक पहुंच मिल गई. कुछ ही समय में महिला के फोनपे अकाउंट से एक लाख रुपये किसी अन्य खाते में ट्रांसफर कर दिए गए.
सुनीता को इस ठगी का अहसास तब हुआ, जब उसके मोबाइल पर बैंक ट्रांजैक्शन का संदेश आया. अचानक खाते से बड़ी रकम निकलने की जानकारी मिलते ही वह घबरा गई और समझ गई कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है. इसके बाद उसने तुरंत गोरखपुर थाना पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई.
पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि ठगों ने रिमोट एक्सेस के जरिए महिला के फोन को नियंत्रित किया और डिजिटल भुगतान एप से पैसे निकाल लिए. पुलिस का कहना है कि इस तरह की ठगी में अक्सर अपराधी देश के दूसरे हिस्सों या यहां तक कि विदेशों से भी ऑपरेट करते हैं, जिससे उनकी पहचान और गिरफ्तारी चुनौतीपूर्ण हो जाती है.
पुलिस अधिकारी मामले की तकनीकी जांच में जुटे हुए हैं और जिस खाते में पैसे ट्रांसफर हुए हैं, उसकी जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है. साइबर सेल की मदद से मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और डिजिटल लेनदेन के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके. हालांकि, पुलिस का मानना है कि समय रहते शिकायत दर्ज कराना पीड़ित के लिए अहम कदम होता है, जिससे पैसे वापस मिलने की संभावना कुछ हद तक बढ़ जाती है.
इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने आम नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की है. पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर APK फाइल डाउनलोड न करें और न ही व्हाट्सएप या अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर आए किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करें. बिजली कंपनी, बैंक या किसी भी सेवा प्रदाता के नाम पर आने वाले कॉल की पुष्टि संबंधित विभाग की आधिकारिक हेल्पलाइन या कार्यालय से अवश्य करें.
विशेषज्ञों का कहना है कि APK फाइल के जरिए ठगी आजकल साइबर अपराधियों का पसंदीदा तरीका बनता जा रहा है. ऐसी फाइलें मोबाइल में इंस्टॉल होते ही यूजर की निजी जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड और डिजिटल वॉलेट तक पहुंच बना लेती हैं. एक बार एक्सेस मिल जाने के बाद ठग बिना यूजर की जानकारी के पैसे ट्रांसफर कर देते हैं.
जबलपुर में सामने आया यह मामला अकेला नहीं है. हाल के महीनों में मध्य प्रदेश के कई जिलों से इसी तरह की साइबर ठगी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. कहीं खुद को बैंक अधिकारी बताकर तो कहीं केवाईसी अपडेट के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है. इसके बावजूद लोग लालच या डर में आकर ठगों की बातों में फंस जाते हैं.
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे डिजिटल लेनदेन के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतें. मोबाइल में केवल गूगल प्ले स्टोर या आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करें. किसी भी अनजान फाइल या लिंक से दूर रहें और अपने फोन में सुरक्षा से जुड़ी सेटिंग्स को मजबूत रखें.
जबलपुर की यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि तकनीक जितनी सुविधाजनक है, उतनी ही सावधानी की मांग भी करती है. थोड़ी सी लापरवाही भारी नुकसान में बदल सकती है. अब देखना होगा कि पुलिस की जांच में साइबर ठगों तक कब और कैसे पहुंचा जाता है, लेकिन तब तक यह मामला आम लोगों के लिए एक कड़ा सबक बनकर सामने आया
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

