सोमनाथ. भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा देने वाला सोमनाथ स्वाभिमान पर्व शुक्रवार से पूरे वैभव और श्रद्धा के साथ प्रारंभ हो गया है. तीन दिनों तक चलने वाले इस विशेष आयोजन में 72 घंटे का अखंड ‘ओंकार’ जाप देश-दुनिया में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह अनूठी अवधारणा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है. इस पर्व के माध्यम से न केवल भगवान शिव के प्रति आस्था का प्रदर्शन हो रहा है, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान और ऐतिहासिक चेतना को भी सशक्त किया जा रहा है.
गुजरात सरकार के कैबिनेट मंत्री जीतुभाई वाघाणी ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की तैयारियों और उसके व्यापक महत्व की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि श्री सोमनाथ महादेव मंदिर के साथ देशभर के करोड़ों नागरिकों की आस्था गहराई से जुड़ी हुई है. यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता और आत्मसम्मान का प्रतीक है. उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संस्कृति और अध्यात्म के माध्यम से राष्ट्र को मजबूत कर रहे हैं, ताकि पवित्र तीर्थ स्थलों का महत्व नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचे.
तीन दिवसीय इस पर्व का सबसे विशेष आकर्षण 72 घंटे का अखंड ‘ओंकार’ जाप है. मंत्री ने बताया कि यह विचार स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया था. देशभर से आए ऋषिकुमार और साधु-संत लगातार 72 घंटे तक ‘ओंकार’ का उच्चारण कर रहे हैं. यह जाप विश्व कल्याण और मानवता के हित के लिए किया जा रहा है. इस अखंड साधना से सोमनाथ परिसर में अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है, जिसे श्रद्धालु गहराई से अनुभव कर रहे हैं. शिवभक्ति और साधना का यह संगम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को एक विशिष्ट आध्यात्मिक पहचान दे रहा है.
इस आयोजन के जरिए भारत के इतिहास के उन महान योगदानों को भी स्मरण किया जा रहा है, जिन्होंने देश की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए संघर्ष और त्याग किया. मंत्री वाघाणी ने कहा कि लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लेकर देश के आत्मविश्वास और स्वाभिमान को पुनर्जीवित किया था. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व उसी ऐतिहासिक संकल्प और राष्ट्रीय गौरव को नमन करने का अवसर है. भारतीय संस्कृति की रक्षा और पुनर्स्थापना के लिए जिन महापुरुषों ने बलिदान दिए, यह पर्व उनके प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शनिवार को सोमनाथ आगमन इस पर्व को और भी ऐतिहासिक बना देगा. उनके स्वागत के लिए भव्य तैयारियां की गई हैं. 108 घोड़ों की शौर्य यात्रा, भव्य ड्रोन शो और विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं. सोमनाथ की पावन धरती पर प्रधानमंत्री का आगमन श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है. सुरक्षा से लेकर व्यवस्थाओं तक राज्य सरकार ने व्यापक इंतजाम किए हैं, ताकि कार्यक्रम गरिमा और दिव्यता के साथ संपन्न हो.
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लेने के लिए गुजरात ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. पूरे नगर में उत्सव का माहौल है. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों को भव्य रोशनी से सजाया गया है. साधु-संतों के नेतृत्व में रवाड़ी और पालकी यात्रा निकाली जा रही है, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया है. हर ओर ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष सुनाई दे रहे हैं. श्रद्धालु इस पर्व को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सव के रूप में देख रहे हैं.
राज्य सरकार द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं. आवागमन, आवास, स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान रखा गया है. प्रशासन का दावा है कि आने वाले प्रत्येक भक्त को सुगम और सुरक्षित अनुभव मिले, इसके लिए सभी विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं. सोमनाथ की दिव्य छवि इन व्यवस्थाओं के कारण और अधिक प्रभावशाली बनकर सामने आ रही है.
मंत्री वाघाणी ने समाज के सभी वर्गों से इस ऐतिहासिक सनातन धर्म पर्व में भाग लेने की अपील की है. उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और राष्ट्र की आत्मा से जुड़ा उत्सव है. इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी की उपस्थिति भी आयोजन को विशेष महत्व प्रदान करेगी.
प्रधानमंत्री के गुजरात दौरे का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वे सोमनाथ दर्शन के बाद राजकोट में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन में भी भाग लेंगे. यह सम्मेलन सौराष्ट्र और पूरे गुजरात में विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए अहम माना जा रहा है. सरकार का मानना है कि आध्यात्मिक विरासत और आर्थिक विकास, दोनों साथ-साथ आगे बढ़ें, यही प्रधानमंत्री मोदी की व्यापक सोच का हिस्सा है.
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व इस दृष्टि का सजीव उदाहरण बनकर उभर रहा है, जहां अध्यात्म, संस्कृति, इतिहास और आधुनिक भारत की विकास यात्रा एक साथ दिखाई देती है. 72 घंटे के अखंड ओंकार जाप से लेकर ऐतिहासिक स्मरण और भव्य स्वागत समारोह तक, यह आयोजन देश को अपनी जड़ों से जोड़ने और आत्मविश्वास से भरने का संदेश दे रहा है. सोमनाथ की धरती पर गूंजती शिवध्वनि आने वाले समय में भी राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को प्रेरित करती रहेगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

