जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित राज्य के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल में सोमवार देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अस्पताल का पॉलीट्रॉमा आईसीयू अचानक पानी से भरने लगा. कड़ाके की ठंड के बीच यह घटना रात करीब 10 बजे सामने आई, जब आईसीयू में भर्ती गंभीर रूप से घायल और जीवन के लिए संघर्ष कर रहे मरीज अपने बेड पर थे और अस्पताल का स्टाफ नियमित ड्यूटी में जुटा हुआ था. प्रारंभिक जांच में पानी भरने की वजह एक जर्जर और जंग लगी पाइपलाइन में लीकेज को बताया गया है, जिसने अस्पताल की अव्यवस्थाओं और बुनियादी ढांचे की जमीनी हकीकत को एक बार फिर उजागर कर दिया.
पॉलीट्रॉमा आईसीयू में अचानक फर्श पर पानी फैलने लगा और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए. आईसीयू जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र में पानी भरने की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आया. स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तत्काल आईसीयू को खाली कराने का फैसला लिया गया. वहां भर्ती सभी 14 गंभीर मरीजों को सुरक्षित रूप से अन्य आईसीयू और आपातकालीन वार्डों में स्थानांतरित किया गया. इस पूरे ऑपरेशन को डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने मिलकर अंजाम दिया. ठंड, पानी और आपात स्थिति के बीच मरीजों को स्ट्रेचर और बेड पर शिफ्ट करना आसान नहीं था, लेकिन स्टाफ की तत्परता से किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आईसीयू में पानी घुसने से बिजली उपकरणों, मॉनिटर और अन्य जीवन रक्षक मशीनों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी पैदा हो गई थी. ऐसे में सबसे बड़ा खतरा मरीजों की जान को लेकर था. कई मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे, जिन्हें स्थानांतरित करना अत्यंत जोखिम भरा माना जाता है. इसके बावजूद मेडिकल टीम ने संयम और पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए सभी मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया और परिजनों में भी घबराहट देखी गई.
घटना की जानकारी मिलते ही राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ स्वयं एसएमएस अस्पताल पहुंचीं. उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और अस्पताल प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की. प्रमुख सचिव ने इसे गंभीर लापरवाही का मामला मानते हुए एसएमएस अस्पताल के सभी आईसीयू का व्यापक निरीक्षण कराने के निर्देश दिए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल मरीजों की जान के लिए खतरा हैं, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं.
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि जिस पाइपलाइन से पानी लीक हुआ, वह काफी पुरानी और जंग लगी हुई थी. लंबे समय से रखरखाव और समय पर मरम्मत न होने के कारण पाइप कमजोर हो चुकी थी. ठंड के मौसम में दबाव बढ़ने से पाइपलाइन ने जवाब दे दिया और पानी सीधे आईसीयू में भरने लगा. सवाल यह उठ रहा है कि राज्य के सबसे बड़े रेफरल अस्पताल में, जहां गंभीर मरीजों का इलाज होता है, वहां बुनियादी ढांचे की इस हालत पर पहले ध्यान क्यों नहीं दिया गया.
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है. स्मार्ट अस्पताल, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और विश्वस्तरीय इलाज के दावों के बीच एसएमएस अस्पताल की यह तस्वीर नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करती है. मरीजों के परिजनों ने भी अस्पताल प्रबंधन पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि यदि समय रहते पाइपलाइन की जांच और मरम्मत की गई होती, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती.
हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई मरीज हताहत नहीं हुआ. अस्पताल प्रशासन ने दावा किया है कि सभी मरीज फिलहाल स्थिर हैं और उन्हें वैकल्पिक आईसीयू में समुचित इलाज मिल रहा है. साथ ही प्रभावित आईसीयू को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया है. तकनीकी टीम को पाइपलाइन सिस्टम की पूरी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो.
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि आईसीयू जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की नियमित ऑडिट और मेंटेनेंस बेहद जरूरी है. पानी, बिजली और ऑक्सीजन सप्लाई जैसी व्यवस्थाओं में थोड़ी सी चूक भी मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है. एसएमएस अस्पताल में हुई यह घटना पूरे राज्य के सरकारी अस्पतालों के लिए चेतावनी मानी जा रही है.
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. यह देखा जा रहा है कि पाइपलाइन की खराब स्थिति के बारे में पहले कोई रिपोर्ट आई थी या नहीं और यदि आई थी तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई. यदि लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों पर कार्रवाई की जा सकती है.
जयपुर के एसएमएस अस्पताल में आईसीयू में पानी भरने की यह घटना केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी, रखरखाव और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल बनकर सामने आई है. जिस अस्पताल पर लाखों लोगों की जिंदगी टिकी है, वहां इस तरह की चूक भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है. सरकार और प्रशासन के लिए यह वक्त आत्ममंथन का है कि दावों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाए, ताकि मरीजों की जान के साथ कोई समझौता न हो.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

