हैदराबाद. भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाने वाले निर्देशक एसएस राजामौली अपनी भव्य फिल्मों, दमदार कथानक और कलाकारों से असाधारण अभिनय निकलवाने की कला के लिए जाने जाते हैं. बाहुबली और आरआरआर जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने यह साबित किया है कि वे केवल बड़े सेट और एक्शन के निर्देशक नहीं हैं, बल्कि अभिनय की बारीकियों को पहचानने वाली पैनी नजर भी रखते हैं. ऐसे में जब राजामौली किसी कलाकार की खुलकर सराहना करते हैं, तो वह बात सिनेमा जगत में खास महत्व रखती है. एक पुराने इंटरव्यू में राजामौली ने एक ऐसी ही युवा अभिनेत्री का जिक्र किया था, जिसने अपने सादे लेकिन गहरे अभिनय से उन्हें भीतर तक प्रभावित किया.
राजामौली ने बताया था कि उन्हें अक्सर भव्य अभिनय या संवादों से ज्यादा वह कलाकार पसंद आते हैं, जो बिना अधिक बोले अपने भाव दर्शकों तक पहुंचा दें. इसी संदर्भ में उन्होंने फिल्म राजन्ना से जुड़ा एक किस्सा साझा किया, जो उनके पिता और मशहूर लेखक-विचारक विजयेंद्र प्रसाद द्वारा निर्देशित थी. इस फिल्म में एक बाल कलाकार के रूप में नजर आई अभिनेत्री एनी ने उन्हें खास तौर पर चौंका दिया था. राजामौली भले ही उस फिल्म के मुख्य निर्देशक नहीं थे, लेकिन एक्शन दृश्यों की जिम्मेदारी उन्होंने संभाली थी और इसी दौरान उन्होंने एनी के अभिनय को बेहद करीब से देखा.
राजामौली के अनुसार, एनी की सबसे बड़ी ताकत उसकी आंखें थीं. वह बिना किसी बनावटी भाव-भंगिमा के केवल आंखों के जरिए दर्द, मासूमियत और संवेदना को इस तरह व्यक्त कर रही थी कि दृश्य अपने आप प्रभावशाली हो जाते थे. उन्होंने कहा था कि कई बार अनुभवी कलाकार भी भाव प्रकट करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करते हैं, लेकिन एनी का अभिनय बिल्कुल सहज और स्वाभाविक था. कैमरा जैसे ही उसके चेहरे पर टिकता, दर्शक उसके भीतर चल रही भावनाओं को महसूस कर सकते थे.
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि राजामौली उन निर्देशकों में शामिल हैं, जो अभिनय को लेकर बेहद सख्त माने जाते हैं. वे कलाकारों से बार-बार रिहर्सल करवाते हैं और तब तक संतुष्ट नहीं होते, जब तक दृश्य उनकी कल्पना के अनुरूप न उतर जाए. ऐसे निर्देशक का किसी बाल या युवा कलाकार के अभिनय से इस कदर प्रभावित होना यह दर्शाता है कि प्रतिभा उम्र या अनुभव की मोहताज नहीं होती.
राजामौली ने अपने करियर में जहां एक ओर प्रभास, रामचरण, जूनियर एनटीआर और महेश बाबू जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया है, वहीं दूसरी ओर वे यह भी मानते हैं कि सिनेमा की असली ताकत मजबूत कलाकारों से आती है, चाहे वे किसी भी स्तर के हों. उन्होंने कई मौकों पर दिग्गज अभिनेत्रियों सावित्री और सूर्यकांतम का उदाहरण देते हुए कहा है कि सच्चा अभिनय वही होता है, जो बिना शब्दों के भी दर्शकों तक पहुंच जाए.
फिल्मी गलियारों में यह चर्चा भी होती रही है कि राजामौली की नजर नए और कच्चे लेकिन प्रतिभाशाली कलाकारों पर हमेशा रहती है. वे स्टारडम से ज्यादा अभिनय की सच्चाई को तरजीह देते हैं. यही कारण है कि उनकी फिल्मों में सहायक और छोटे किरदार भी दर्शकों को लंबे समय तक याद रहते हैं. एनी को लेकर उनकी यह टिप्पणी इसी सोच को और मजबूत करती है.
सिने विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान युवा कलाकारों के लिए बड़ी प्रेरणा होते हैं. जब देश का सबसे सफल निर्देशक किसी बच्चे या नई अभिनेत्री की तारीफ करता है, तो वह संदेश देता है कि मेहनत और ईमानदार अभिनय कभी नजरअंदाज नहीं होता. यह भी संकेत है कि आने वाले समय में राजामौली जैसे निर्देशक नए चेहरों को बड़े मंच पर लाने से पीछे नहीं हटेंगे.
फिलहाल राजामौली अपनी आगामी मेगा बजट फिल्म में व्यस्त हैं, जिसमें महेश बाबू मुख्य भूमिका में नजर आएंगे. इस प्रोजेक्ट को लेकर भी चर्चाएं हैं कि निर्देशक इस बार भी कुछ नए और चौंकाने वाले चेहरों को मौका दे सकते हैं. ऐसे में एनी जैसी प्रतिभाओं का उदाहरण यह साबित करता है कि राजामौली का सिनेमा केवल सितारों का नहीं, बल्कि अभिनय की आत्मा का उत्सव है.
कुल मिलाकर, एसएस राजामौली द्वारा एक युवा अभिनेत्री की सादगी और आंखों से बोलने वाली अभिनय शैली की सराहना यह दर्शाती है कि भारतीय सिनेमा में प्रतिभा की पहचान आज भी जीवित है. यह बयान न सिर्फ उस अभिनेत्री के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उन तमाम नए कलाकारों के लिए भी उम्मीद की किरण है, जो बिना शोर-शराबे के अपने अभिनय से पहचान बनाना चाहते हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

