माघ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदश तिथि यानी 16 जनवरी 2026 को पड़ने वाला शुक्र प्रदोष व्रत इस बार सामान्य से कहीं अधिक फलदायी और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होने जा रहा है. भारतीय पंचांग के अनुसार जब त्रयोदश तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है तो इसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है और शास्त्रों में इस व्रत को सौभाग्य, आरोग्य और सुख-समृद्धि का द्वार माना गया है. इस विशेष दिन पर केवल भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा ही नहीं मिलेगी बल्कि ग्रहों की दुनिया में हो रहे एक बड़े उलटफेर के कारण दो विशेष राशियों के लिए भाग्य के बंद दरवाजे खुलने वाले हैं. शुक्रवार का दिन शुक्र देव को समर्पित है जो ऐश्वर्य और भौतिक सुखों के कारक हैं जबकि प्रदोष काल महादेव की असीम शक्ति का समय है. इस अद्भुत संयोग में चंद्र देव का राशि परिवर्तन सोने पर सुहागा जैसा काम करेगा क्योंकि चंद्र देव स्वयं महादेव के मस्तक पर सुशोभित हैं. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस राशि परिवर्तन का सीधा सकारात्मक प्रभाव वृषभ और कर्क राशि के जातकों पर पड़ने वाला है जिन्हें आर्थिक तंगी से मुक्ति के साथ-साथ करियर में ऊंची उड़ान भरने के नए अवसर प्राप्त होंगे.
इस दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इस बार शुक्र प्रदोष व्रत पर कई ऐसे मंगलकारी योगों का निर्माण हो रहा है जो दशकों में एक बार देखने को मिलते हैं. पंचांग के विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि चंद्र देव जब अपनी राशि बदलेंगे तो वे उन जातकों के जीवन में शीतलता और मानसिक शांति लेकर आएंगे जो लंबे समय से तनाव या पारिवारिक कलह से जूझ रहे थे. शुक्र प्रदोष के पुण्य प्रताप से साधक की हर वह मनोकामना पूरी हो सकती है जो लंबे समय से अधूरी थी. विशेष रूप से वे लोग जो ऋण के जाल में फंसे हैं या जिनकी आय के स्रोत सीमित हो गए हैं उनके लिए 16 जनवरी का सूर्यास्त के बाद का समय यानी प्रदोष काल अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध होगा. धर्म के जानकारों का मानना है कि प्रदोष काल में की गई शिव आराधना का फल सहस्त्र गुना अधिक होता है क्योंकि इस समय महादेव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और कैलास पर्वत पर नंदी के साथ नृत्य करते हैं.
इस पावन दिन पर शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगना तय है क्योंकि शुक्र प्रदोष का व्रत महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और पुरुषों के लिए कार्यक्षेत्र में विजय का कारक माना जाता है. चंद्र देव का गोचर न केवल आध्यात्मिक बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी जातकों को मजबूती प्रदान करेगा. ज्योतिषीय विश्लेषण बताते हैं कि जिन दो राशियों पर शिव की विशेष कृपा बरसने वाली है उनके लिए यह समय निवेश और नए व्यापारिक अनुबंधों के लिए सर्वश्रेष्ठ है. भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लीन रहने वाले साधकों के लिए यह दिन केवल एक व्रत भर नहीं है बल्कि यह खुद को ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ने का एक महा-अवसर है. शुक्र प्रदोष की शाम को दीपदान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है जिससे घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है.
शुक्रवार को प्रदोष होने के कारण शुक्र ग्रह की अशुभता भी दूर होती है. जिन लोगों की कुंडली में शुक्र कमजोर स्थिति में है और उन्हें भौतिक सुखों की प्राप्ति नहीं हो पा रही है वे इस दिन विशेष अनुष्ठान के जरिए अपने सोए हुए भाग्य को जगा सकते हैं. 16 जनवरी की सुबह से ही श्रद्धालुओं में एक नया उत्साह देखा जाएगा क्योंकि ग्रहों की यह चाल समाज में सकारात्मक परिवर्तन के संकेत दे रही है. महादेव की पूजा में बेलपत्र, शमी पत्र और गंगाजल का अभिषेक करने से दरिद्रता का नाश होता है. इस बार का प्रदोष इसलिए भी अनूठा है क्योंकि चंद्र देव का राशि परिवर्तन ठीक उसी समय हो रहा है जब प्रदोष काल की पूजा अपने चरम पर होगी. यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना है जो सीधे तौर पर मानव जीवन के आर्थिक और मानसिक पहलुओं को प्रभावित करेगी.
प्रदोष व्रत की महिमा का बखान करते हुए शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति निष्काम भाव से इस दिन उपवास रखता है उसे अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है. आज के आधुनिक युग में जब लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में शांति की तलाश कर रहे हैं तब ऐसे आध्यात्मिक संयोग एक नई राह दिखाते हैं. वृषभ और कर्क राशि के जातक जिन्हें इस गोचर का सर्वाधिक लाभ मिलने वाला है उन्हें सलाह दी गई है कि वे इस दिन सफेद वस्तुओं का दान करें और शिव चालीसा का पाठ करें. शिव की कृपा से मिलने वाला यह लाभ न केवल तात्कालिक होगा बल्कि भविष्य की नींव को भी मजबूत करेगा. आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों के लिए यह दिन एक उम्मीद की किरण बनकर आ रहा है. कुल मिलाकर 16 जनवरी का यह शुक्र प्रदोष व्रत खगोलीय घटनाओं और धार्मिक आस्था का एक ऐसा संगम है जो भक्त के जीवन से अंधकार को मिटाकर प्रकाश की ओर ले जाने का सामर्थ्य रखता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

