कर्म और ग्रहों की चाल से खुलेगा आपकी सफलता का गुप्त द्वार, जानिए कब और कैसे चमकेगा आपका भाग्य

कर्म और ग्रहों की चाल से खुलेगा आपकी सफलता का गुप्त द्वार, जानिए कब और कैसे चमकेगा आपका भाग्य

प्रेषित समय :21:46:14 PM / Thu, Jan 15th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कुंडली के चक्रव्यूह में छिपा है आपके उत्कर्ष का रहस्य और इस रहस्य की कुंजी थामे बैठा है आपकी जन्मकुंडली का नौवां भाव जिसे ज्योतिषीय भाषा में 'भाग्य भाव' कहा जाता है। अक्सर मनुष्य यह सवाल करता है कि कठोर परिश्रम के बावजूद सफलता उससे कोसों दूर क्यों है या फिर किसी व्यक्ति को बिना मांगे सब कुछ कैसे मिल जाता है। इन तमाम अनुत्तरित प्रश्नों का उत्तर नौवें भाव के स्वामी यानी 'भाग्येश' की स्थिति में निहित है। ज्योतिष शास्त्र की प्रमाणिक गणनाओं के अनुसार भाग्योदय का समय और माध्यम कोई संयोग नहीं बल्कि एक गणितीय सत्य है जो जातक के जन्म के साथ ही निर्धारित हो जाता है।

आधुनिक समय में जब प्रतिस्पर्धा चरम पर है तब यह जानना बेहद दिलचस्प है कि किस ग्रह की आयु में आपके जीवन का स्वर्ण काल शुरू होगा। ग्रहों की अपनी एक निश्चित परिपक्वता आयु होती है जहाँ वे अपनी पूरी शक्ति के साथ फल प्रदान करते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी जातक का भाग्येश बृहस्पति है तो 16 से 24 वर्ष की अल्पायु में ही उसके जीवन में सफलता के अंकुर फूटने लगते हैं जबकि शनि के भाग्येश होने पर 36 वर्ष की आयु के बाद ही स्थायित्व प्राप्त होता है। यह विलंब हार नहीं बल्कि एक लंबी और टिकाऊ सफलता की तैयारी है जिसे ज्योतिषीय शब्दावली में 'शनि का अनुशासन' कहा जाता है।

पत्रकारिता की इस पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि भाग्योदय का माध्यम भी पूर्णतः पूर्व-निर्धारित होता है। अक्सर देखा गया है कि कुछ लोगों का विवाह होते ही उनकी आर्थिक स्थिति में आमूलचूल परिवर्तन आ जाता है। यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि सप्तम भाव में बैठे भाग्येश का प्रभाव है जो जीवनसाथी के आगमन को भाग्य की चाबी बना देता है। इसी तरह यदि भाग्येश चतुर्थ भाव से संबंध बनाता है तो जातक को अपनी जन्मभूमि और माता के आशीर्वाद से ही वैभव प्राप्त होता है। इसके विपरीत बारहवें भाव में भाग्येश की उपस्थिति व्यक्ति को अपनी मिट्टी से दूर समंदर पार या विदेश में राजा जैसा सम्मान और धन दिलाती है। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी सीख है जो अपनी जड़ों से कटकर परेशान हैं या जो विदेश जाकर भी सफल नहीं हो पा रहे।

कुंडली के ग्रहों की दशा और अंतर्दशा भी उस अलार्म घड़ी की तरह काम करती है जो भाग्योदय के समय को निर्धारित करती है। जब धनेश या लाभेश की महादशा भाग्येश के गोचर के साथ तालमेल बिठाती है तब व्यक्ति के जीवन में उन्नति के द्वार स्वतः ही खुलते चले जाते हैं। वर्तमान दौर में जहाँ लोग अल्पकालिक सफलता के पीछे भाग रहे हैं वहां ज्योतिष शास्त्र यह समझाता है कि अपने इष्ट देव की उपासना और बड़ों का सम्मान केवल धार्मिक कृत्य नहीं बल्कि आपके भाग्य भाव को सक्रिय करने के वैज्ञानिक तरीके हैं। नौवां भाव धर्म का भी है और जब व्यक्ति धार्मिक और नैतिक रूप से सशक्त होता है तो उसके भाग्य के अवरोध स्वतः ही समाप्त होने लगते हैं। रत्नों का प्रभाव और मंत्रों की शक्ति इस प्रक्रिया में उत्प्रेरक का कार्य करती है। अंततः भाग्योदय का मार्ग कर्म और ग्रहों के सही संरेखण से बनता है और अपनी कुंडली के इन गुप्त संकेतों को समझकर कोई भी व्यक्ति अपने संघर्ष को सफलता में बदल सकता है।

अपनी कुंडली के 'भाग्येश' (9वें भाव के स्वामी) को पहचानने के लिए आपको अपनी लग्न राशि (Ascendant) का पता होना चाहिए। लग्न आपकी कुंडली के पहले भाव की राशि होती है।

नीचे दी गई तालिका से आप जान सकते हैं कि आपकी राशि के अनुसार आपका भाग्यशाली ग्रह कौन सा है, उसका भाग्योदय वर्ष क्या है और सफलता का माध्यम क्या होगा:

भाग्येश निर्धारण तालिका (लग्न राशि के अनुसार)

लग्न राशि भाग्येश (9th Lord) भाग्योदय की आयु सफलता का मुख्य माध्यम
मेष (Aries) बृहस्पति (Guru) 16, 22, 24 वर्ष उच्च शिक्षा, गुरुजन, पिता और धार्मिक यात्राएं।
वृषभ (Taurus) शनि (Shani) 36 वर्ष के बाद तकनीकी कार्य, लोहा, कोयला, तेल या बहुत कड़ी मेहनत के बाद।
मिथुन (Gemini) शनि (Shani) 36 वर्ष के बाद संपादन, लेखन, न्याय विभाग या संघर्ष के बाद स्थायी सफलता।
कर्क (Cancer) बृहस्पति (Guru) 16, 22, 24 वर्ष ज्ञान, परामर्श (Consultancy), शिक्षण और बैंक।
सिंह (Leo) मंगल (Mangal) 28 वर्ष की आयु सेना, पुलिस, प्रॉपर्टी, साहस और खेलकूद।
कन्या (Virgo) शुक्र (Shukra) 25 वर्ष की आयु कला, सौंदर्य, संगीत, मीडिया और लग्जरी वस्तुएं।
तुला (Libra) बुध (Budh) 32 वर्ष की आयु व्यापार, संचार, गणित और बुद्धिमत्ता पूर्ण कार्य।
वृश्चिक (Scorpio) चंद्रमा (Chandra) 24 वर्ष की आयु माता का सहयोग, तरल पदार्थ (दूध, पानी), यात्रा और संवेदनशीलता।
धनु (Sagittarius) सूर्य (Surya) 22 वर्ष की आयु सरकारी नौकरी, राजनीति, पिता और प्रशासनिक पद।
मकर (Capricorn) बुध (Budh) 32 वर्ष की आयु मार्केटिंग, व्यापारिक सूझबूझ और लेखा-जोखा (Accounts)।
कुंभ (Aquarius) शुक्र (Shukra) 25 वर्ष की आयु रचनात्मकता, डिजाइनिंग, विदेशी व्यापार और फैशन।
मीन (Pisces) मंगल (Mangal) 28 वर्ष की आयु अचल संपत्ति, इंजीनियरिंग, सर्जरी और साहसिक कार्य।

सफलता का सटीक माध्यम कैसे पहचानें?

जैसा कि आपने पहले चर्चा की थी, भाग्येश कुंडली के जिस भाव में बैठता है, सफलता वहीं से आती है। इसे और गहराई से समझने के लिए ये 3 मुख्य बिंदु देखें:

  1. यदि आपका भाग्येश दशम भाव (10th House) में है: आप जो भी नौकरी या व्यवसाय करेंगे, वही आपका भाग्योदय करेगा। यानी आपका काम ही आपका भाग्य है।

  2. यदि भाग्येश लग्न (1st House) में है: आपको किसी के सहारे की जरूरत नहीं होगी। आप स्वयं के निर्णय से फर्श से अर्श तक पहुंचेंगे।

  3. यदि भाग्येश दूसरे भाव (2nd House) में है: आपका भाग्य आपके वाणी और धन संचय से जुड़ा है। आप जितना मीठा बोलेंगे और परिवार से जुड़कर रहेंगे, उतना ही भाग्योदय होगा।

भाग्य को बलवान बनाने का तरीका

  • बीज मंत्र: अपने भाग्येश ग्रह के बीज मंत्र का जाप करें (जैसे मंगल के लिए 'ॐ अं अंगारकाय नमः')।

  • दान: यदि भाग्येश कमजोर है, तो उससे संबंधित वस्तुओं का दान करें (जैसे सूर्य के लिए गुड़, चंद्रमा के लिए चावल)।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-