भारत और न्यूयॉर्क में गूगल का माहौल एक जैसा नहीं, वायरल वीडियो ने खोली वैश्विक कार्य संस्कृति की परतें

भारत और न्यूयॉर्क में गूगल का माहौल एक जैसा नहीं, वायरल वीडियो ने खोली वैश्विक कार्य संस्कृति की परतें

प्रेषित समय :21:41:28 PM / Fri, Jan 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

 नई दिल्ली .  दुनिया की दिग्गज तकनीकी कंपनी गूगल के दो बड़े कार्यालयों—भारत के बेंगलुरु और अमेरिका के न्यूयॉर्क—की कार्य संस्कृति को लेकर एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। गूगल की कर्मचारी दीक्षा अग्रवाल द्वारा साझा किया गया यह वीडियो न केवल कॉरपोरेट संस्कृति की विविधता को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि एक ही कंपनी अलग-अलग देशों में किस तरह स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे के अनुसार खुद को ढालती है।

बेंगलुरु स्थित गूगल के अनंथा कैंपस में कार्यरत दीक्षा अग्रवाल हाल ही में कंपनी के न्यूयॉर्क कार्यालय, जिसे नाइंथ एवेन्यू ऑफिस के नाम से जाना जाता है, के दौरे पर गई थीं। इस दौरान उन्होंने अपने अनुभवों को एक छोटे वीडियो के जरिए साझा किया। वीडियो की शुरुआत में ही वह स्पष्ट शब्दों में कहती हैं कि भारत और न्यूयॉर्क में गूगल की संस्कृति एक जैसी नहीं है। यही वाक्य सोशल मीडिया पर चर्चा की चिंगारी बन गया।

वीडियो में दीक्षा बेंगलुरु कार्यालय के माहौल को जीवंत, सहयोगात्मक और ऊर्जा से भरपूर बताती हैं। उनके अनुसार यहां कर्मचारी आपस में अधिक संवाद करते हैं, टीमवर्क की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है और कार्यस्थल पर एक सामूहिक उत्साह महसूस होता है। वह बताती हैं कि बेंगलुरु ऑफिस में काम केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समूह के रूप में समस्याओं को हल करने और विचार साझा करने पर जोर दिया जाता है।

इसके विपरीत, न्यूयॉर्क के गूगल कार्यालय का माहौल उन्हें अधिक व्यक्तिगत केंद्रित लगा। वहां कर्मचारी अपने-अपने कार्यों में गहराई से डूबे नजर आते हैं। दीक्षा के अनुसार न्यूयॉर्क ऑफिस में शांति और एकाग्रता का माहौल अधिक है, जहां लोग स्वतंत्र रूप से काम करते हुए अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। हालांकि, वह यह भी स्पष्ट करती हैं कि इसका मतलब यह नहीं है कि एक जगह उत्पादकता कम है और दूसरी जगह ज्यादा। उनके शब्दों में, दोनों ही स्थान अत्यंत उत्पादक हैं, फर्क केवल काम करने की शैली और अभिव्यक्ति का है।

वीडियो में दीक्षा ने कार्यालयी सुविधाओं और नीतियों में अंतर को भी रेखांकित किया है। उन्होंने बताया कि न्यूयॉर्क के गूगल कार्यालय में कर्मचारियों को कई ऐसी सुविधाएं मिलती हैं, जो भारत में आम नहीं हैं। उदाहरण के तौर पर, वहां कार्यालय परिसर में शराब की अनुमति है और कर्मचारी अपने पालतू कुत्तों को भी दफ्तर ला सकते हैं। यह वातावरण को अधिक अनौपचारिक और आरामदायक बनाता है।

वहीं, बेंगलुरु कार्यालय में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इस पर दीक्षा ने बेहद संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत में ऐसा न होना अपने आप में सही है। उनके अनुसार यह अंतर स्थानीय संस्कृति, सामाजिक मानदंडों और नियमों के अनुरूप है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी भी वैश्विक कंपनी के लिए जरूरी है कि वह जिस देश में काम कर रही हो, वहां की संवेदनाओं और नियमों का सम्मान करे।

दीक्षा अग्रवाल ने दोनों कार्यालयों की वास्तुकला की तुलना भी की, जिसने दर्शकों का खास ध्यान खींचा। उन्होंने बेंगलुरु के अनंथा कैंपस को खुला, विस्तृत और सांस लेने की जगह देने वाला बताया। इसके विपरीत, न्यूयॉर्क कार्यालय को उन्होंने ऊंचाई में फैला हुआ, परतदार और शहरी ढांचे का प्रतिबिंब कहा। उनके अनुसार, जैसे बेंगलुरु की पहचान खुलेपन और विस्तार से जुड़ी है, वैसे ही न्यूयॉर्क की पहचान ऊंची इमारतों और सीमित जगह में अधिकतम उपयोग से होती है, और यह दोनों कार्यालयों के डिजाइन में साफ झलकता है।

इन तमाम भिन्नताओं के बावजूद दीक्षा इस बात पर जोर देती हैं कि गूगल की मूल आत्मा हर जगह एक जैसी है। उन्होंने कहा कि चाहे बेंगलुरु हो या न्यूयॉर्क, दोनों ही जगहों पर नए विचारों को गंभीरता से लिया जाता है। कर्मचारियों को बड़े सपने देखने और उन पर काम करने की आजादी मिलती है। उनके अनुसार यही वह तत्व है जो गूगल को एक वैश्विक पहचान देता है और उसे बाकी कंपनियों से अलग बनाता है।

इस वीडियो को दीक्षा ने एक साधारण से हिंदी कैप्शन के साथ साझा किया—“भारत और न्यूयॉर्क, गूगल का कल्चर एक जैसा नहीं है।” यही सरल वाक्य इंटरनेट पर हजारों लोगों से जुड़ गया। वीडियो के वायरल होते ही पेशेवरों, छात्रों और कॉरपोरेट जगत से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने इसे वैश्विक कंपनियों की कार्यसंस्कृति को समझने का एक ईमानदार और जमीनी प्रयास बताया।

सोशल मीडिया पर अनेक उपयोगकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे बहुराष्ट्रीय कंपनियां अलग-अलग देशों में स्थानीय संस्कृति के अनुरूप खुद को ढालती हैं। कुछ लोगों ने इसे भारतीय कार्यसंस्कृति की सामूहिकता की ताकत बताया, तो कुछ ने न्यूयॉर्क जैसे शहरों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और एकाग्रता को वहां की कार्यदक्षता का आधार माना।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह वीडियो केवल गूगल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक कार्यस्थलों की एक बड़ी सच्चाई को सामने लाता है। आज के दौर में जब कंपनियां सीमाओं से परे काम कर रही हैं, तब स्थानीय संस्कृति, सामाजिक मूल्य और नीतियां कार्यस्थल के माहौल को गहराई से प्रभावित करती हैं। दीक्षा अग्रवाल का वीडियो इसी सच्चाई को सरल और प्रभावी तरीके से सामने रखता है।

कुल मिलाकर, यह वायरल वीडियो न केवल दो शहरों या दो देशों की तुलना करता है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि कार्यसंस्कृति को हम किस नजर से देखते हैं। क्या बेहतर वही है जो हमारे लिए परिचित है, या हर संस्कृति अपने आप में संतुलित और प्रभावी हो सकती है। दीक्षा अग्रवाल का अनुभव यही संदेश देता है कि विविधता में ही वैश्विक कंपनियों की असली ताकत छिपी होती है, और गूगल इसका एक जीवंत उदाहरण है

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-