एनसीईआरटी की बड़ी कार्रवाई, गाजियाबाद में नकली किताबों का भंडाफोड़, 32 हजार से ज्यादा पायरेटेड पुस्तकें जब्त

एनसीईआरटी की बड़ी कार्रवाई, गाजियाबाद में नकली किताबों का भंडाफोड़, 32 हजार से ज्यादा पायरेटेड पुस्तकें जब्त

प्रेषित समय :21:51:17 PM / Fri, Jan 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

गाजियाबाद. देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक बड़े अवैध कारोबार का पर्दाफाश करते हुए एनसीईआरटी और दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गाजियाबाद में संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई की है. इस छापेमारी में अलग-अलग कक्षाओं और विषयों की लगभग 32 हजार नकली एनसीईआरटी किताबें जब्त की गई हैं. यह कार्रवाई गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के जवली गांव में स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस पर की गई, जहां लंबे समय से नकली शैक्षणिक पुस्तकों की छपाई और आपूर्ति किए जाने की जानकारी सामने आ रही थी. पुलिस की इस कार्रवाई के बाद शिक्षा जगत से लेकर अभिभावकों तक में हड़कंप मच गया है.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान न सिर्फ भारी मात्रा में नकली किताबें बरामद की गईं, बल्कि दो बड़ी प्रिंटिंग मशीनें, एल्युमीनियम की प्लेटें, बड़ी संख्या में छपाई का कागज और स्याही भी जब्त की गई है. बरामद सामग्री को देखकर यह साफ हो गया कि यह काम किसी छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से बड़े पैमाने पर किया जा रहा था. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि ये नकली किताबें विभिन्न राज्यों में सप्लाई की जा रही थीं, खासकर बोर्ड परीक्षाओं से पहले इनकी मांग तेजी से बढ़ जाती थी.

यह कार्रवाई नवंबर 2025 में दर्ज एक पुराने मामले की जांच के दौरान मिली ठोस जानकारी के आधार पर की गई. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को इनपुट मिला था कि गाजियाबाद के इस इलाके में एनसीईआरटी की किताबों की अवैध छपाई हो रही है. इसके बाद पुलिस ने निगरानी बढ़ाई और पुख्ता सबूत जुटाने के बाद छापेमारी की योजना बनाई. कार्रवाई के दौरान एनसीईआरटी के प्रकाशन विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे, जिन्होंने असली और नकली किताबों की पहचान करने में पुलिस की मदद की.

अधिकारियों के मुताबिक, जब्त की गई किताबें देखने में हूबहू असली एनसीईआरटी पुस्तकों जैसी लगती थीं, लेकिन उनकी छपाई की गुणवत्ता, कागज और स्याही में अंतर साफ नजर आया. कई किताबों में तथ्यात्मक गलतियां और छपाई की खामियां भी पाई गईं. यही वजह है कि एनसीईआरटी लंबे समय से इस तरह की पायरेसी को छात्रों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा मानती रही है. नकली किताबों में न केवल पाठ्यक्रम से जुड़ी गलत जानकारी होती है, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी बेहद खराब होती है, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ता है.

जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह स्कूलों के आसपास, फुटपाथों पर और कुछ स्थानीय दुकानों के जरिए इन नकली किताबों की बिक्री कर रहा था. असली किताबों की तुलना में सस्ती कीमत पर उपलब्ध होने के कारण कई अभिभावक अनजाने में इन्हें खरीद लेते थे. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं और इन किताबों की सप्लाई किन-किन शहरों तक की जा रही थी. इस मामले में आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है.

एनसीईआरटी ने इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उसकी किताबों की अवैध छपाई और बिक्री पूरी तरह से गैरकानूनी है और इसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. एनसीईआरटी अधिकारियों का कहना है कि नकली किताबें शिक्षा की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाती हैं और छात्रों को भ्रमित करती हैं. कई बार इन किताबों में पुराने पाठ्यक्रम या गलत जानकारी छपी होती है, जिससे परीक्षाओं में छात्रों का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अवैध प्रिंटिंग प्रेस अक्सर घनी आबादी वाले इलाकों में छिपकर काम करते हैं, ताकि उन पर शक न हो. लेकिन इस मामले में मिली गोपनीय सूचना के बाद पुलिस ने सतर्कता बरतते हुए पूरी योजना के साथ कार्रवाई की. छापेमारी के दौरान मौके से बड़ी मात्रा में तैयार और अधूरी छपी किताबें भी मिलीं, जिससे यह साफ होता है कि आने वाले समय में और बड़ी खेप बाजार में उतारी जाने वाली थी.

एनसीईआरटी ने अभिभावकों, छात्रों और स्कूल प्रबंधन से अपील की है कि वे किताबें केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदें. अगर किसी दुकान या स्थान पर बेहद कम कीमत पर एनसीईआरटी की किताबें मिल रही हों, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें. संस्था ने यह भी कहा है कि नकली किताबों की पहचान के लिए वह समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाती है और भविष्य में इस तरह की कार्रवाइयों को और तेज किया जाएगा.

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड परीक्षाओं के समय नकली किताबों का बाजार तेजी से फलता-फूलता है और यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के साथ धोखाधड़ी भी है. ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई न केवल अपराधियों के लिए सबक बनती है, बल्कि समाज में यह संदेश भी देती है कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

फिलहाल पुलिस ने जब्त की गई सभी सामग्री को अपने कब्जे में ले लिया है और प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े लोगों से पूछताछ जारी है. इस कार्रवाई को शिक्षा क्षेत्र में पायरेसी के खिलाफ एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए जांच का दायरा  और बढ़ाया जाएगा, ताकि इस तरह के अवैध कारोबार पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-