सोशल मीडिया पर पुलिस की 100 डायल गाड़ियां बिकने का दावा वायरल, जबलपुर में मचा हड़कंप

सोशल मीडिया पर पुलिस की 100 डायल गाड़ियां बिकने का दावा वायरल, जबलपुर में मचा हड़कंप

प्रेषित समय :19:29:40 PM / Fri, Jan 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. जिले में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने पुलिस प्रशासन और आम जनता दोनों को चौंका दिया है. वायरल वीडियो में जबलपुर पुलिस की 100 डायल सेवा में उपयोग की गई पुरानी गाड़ियों को खुलेआम बिक्री के लिए पेश किए जाने का दावा किया गया है. यह वीडियो गुरुवार 15 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 12 बजे फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैलने लगा, जिसके बाद शहर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. वीडियो में साफ तौर पर पुलिस और डायल 100 लिखी गाड़ियां दिखाई दे रही हैं, जिन्हें कथित तौर पर निजी तौर पर बेचे जाने की बात कही जा रही है.

वीडियो सामने आते ही लोगों में यह सवाल उठने लगा कि क्या वाकई सरकारी संपत्ति को इस तरह सोशल मीडिया के जरिए बेचा जा सकता है. कई यूजर्स ने इसे गंभीर लापरवाही और नियमों का खुला उल्लंघन बताया, तो कुछ ने आशंका जताई कि कहीं यह किसी बड़े घोटाले की ओर इशारा तो नहीं कर रहा. वीडियो में दिखाई दे रही गाड़ियों की हालत पुरानी और इस्तेमाल की हुई नजर आ रही है, लेकिन उन पर पुलिस और 100 डायल के स्पष्ट निशान होने से मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया.

प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया है कि इन वीडियो को एक निजी इंस्टाग्राम अकाउंट “गैंगस्टर सेल वैन” नाम के पेज से अपलोड किया गया है. इसी अकाउंट से सरकारी वाहनों की बिक्री से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर डाले गए, जिनमें जबलपुर पुलिस की पुरानी डायल 100 गाड़ियों को बेचने का दावा किया गया. वीडियो में गाड़ियों के आसपास खड़े लोग, उनके नंबर और हालत को दिखाते हुए संभावित खरीदारों को आकर्षित करने की कोशिश की गई है. यही वजह है कि वीडियो ने न केवल आम लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि पुलिस विभाग को भी सतर्क कर दिया.

वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद जबलपुर पुलिस हरकत में आ गई. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं. पुलिस का कहना है कि सरकारी वाहनों की नीलामी और निपटान की एक तय प्रक्रिया होती है, जो नियमों और प्रशासनिक स्वीकृति के तहत की जाती है. सोशल मीडिया के जरिए इस तरह से किसी सरकारी वाहन की बिक्री न तो वैध है और न ही स्वीकार्य. ऐसे में वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए हर पहलू से जांच की जा रही है.

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी देखा जा रहा है कि वीडियो में दिखाई दे रही गाड़ियां वास्तव में जबलपुर पुलिस की ही हैं या फिर किसी अन्य स्थान की पुरानी गाड़ियों को जबलपुर से जोड़कर भ्रामक तरीके से पेश किया गया है. इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन गाड़ियों को किस स्थिति में और किसके द्वारा वीडियो में दिखाया गया. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या ये वाहन पहले से अधिकृत नीलामी प्रक्रिया से बाहर किए जा चुके थे या फिर अब भी आधिकारिक तौर पर पुलिस रिकॉर्ड का हिस्सा हैं.

मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में यह साबित होता है कि सरकारी संपत्ति को अवैध तरीके से बेचने या बेचने का प्रयास किया गया है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसमें आईटी एक्ट के साथ-साथ सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है. पुलिस ने साइबर सेल को भी इस मामले में शामिल किया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वीडियो किसने बनाया, किसने अपलोड किया और इसके पीछे क्या उद्देश्य था.

इस वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है. कुछ लोग इसे सच मानते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कई यूजर्स इसे अफवाह या आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर फैलाया गया वीडियो बता रहे हैं. कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि कई बार विभागीय नीलामी में पुरानी गाड़ियों को कबाड़ या स्क्रैप के रूप में बेचा जाता है, लेकिन इस तरह से खुले मंच पर वीडियो बनाकर बेचने का तरीका संदेह पैदा करता है.

पुलिस सूत्रों के अनुसार, 100 डायल सेवा में उपयोग होने वाली गाड़ियों को एक निश्चित समय और उपयोग के बाद सेवा से हटाया जाता है. इसके बाद इन्हें या तो विभागीय नीलामी के जरिए बेचा जाता है या फिर स्क्रैप घोषित किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रशासनिक अनुमति अनिवार्य होती है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखाई गई प्रक्रिया इस आधिकारिक व्यवस्था से मेल नहीं खाती, इसी कारण पुलिस इसे गंभीरता से ले रही है.

जबलपुर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि किए ऐसे वीडियो और पोस्ट को साझा न करें. पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अधूरी या भ्रामक जानकारी से न केवल प्रशासन की छवि प्रभावित होती है, बल्कि कानून-व्यवस्था से जुड़ी गलत धारणाएं भी बनती हैं. पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले में अंतिम स्थिति साफ हो पाएगी.

फिलहाल, सोशल मीडिया पर पुलिस की 100 डायल गाड़ियां बिकने के दावे से जुड़ा यह मामला जांच के दायरे में है. पुलिस प्रशासन का कहना है कि सच्चाई सामने आने के बाद पूरे मामले को सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की अफवाह पर विराम लगाया जा सके. इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया के दौर में वायरल कंटेंट पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है और क्यों हर खबर की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-